कोरबा। जिला खनिज संस्थान न्यास के प्रभारी अधिकारी का स्थानांतरण अक्टूबर 2025 में होने के कारण विधिवत प्रभार सूची प्राप्त नहीं होने से अपीलार्थी को जानकारी नहीं दी जा सकती।
जी हां, कुछ ऐसा ही बेतुका नियमों से परे तर्क जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के जनसूचना अधिकारी ने अपीलीय अधिकारी सँयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर (छग) के यहाँ दिया। इस बेतुके तर्क को अपीलीय अधिकारी ने खारिज कर अपीलार्थी को वांछित जानकारी 10 दिवस में उपलब्ध कराने का आदेश पारित कर दिया। लेकिन खुद को नियमों से परे समझने वाले डीईओ कार्यालय ने अपीलीय अधिकारी के आदेशों की अवहेलना कर केंद्रीय कानून की अनदेखी करते हुए 1 माह उपरांत भी जानकारी अपीलार्थी को उपलब्ध न कराकर घोर अनुशासनहीनता का परिचय दिया है।
सरकारी योजनाओं ,व्यवस्थाओं एवं फंड में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू की गई केंद्रीय कानून सूचना का अधिकार अधिनियम छत्तीसगढ़ में भष्ट्र जन सूचना अधिकारियों की वजह से मजाक बनकर रह गया है। भ्रष्टाचार छुपाने इस कदर मनमानी चल रही है कि अपीलीय अधिकारी के आदेश के बाद भी आवेदकों को वांछित दस्तावेजों की सत्यप्रतिलिपि उपलब्ध न कराकर नियमों का माख़ौल उड़ाया जा रहा है। इसकी कोरबा के शिक्षा विभाग में देखी जा सकती है।
जनसूचना अधिकारी सह कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी ,जिला -कोरबा (छग)के यहाँ चालू वित्तीय वर्ष 2025 -26 में पत्र क्रमांक 7329 के माध्यम से पत्र व्यवहार कर पत्र लेख दिनांक (08.09.2025)तक की स्थिति में जिला खनिज संस्थान न्यास से स्वीकृत कार्यों की व्यापक लोकहित में प्रशासकीय स्वीकृति आदेश की सत्यप्रतिलिपि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। जन सूचना अधिकारी ने तय मियाद 30 दिवस के भीतर जानकारी प्रदाय करने कोई पत्र व्यवहार तक नहीं किया। आवेदक ने पत्र क्रमांक 7414 दिनांक 15/10/2025 के माध्यम से अपीलीय अधिकारी कार्यालय संभागीय शिक्षा अधिकारी के यहाँ प्रथम अपील दाखिल कर दी। दिनांक 27 .11.2025 को अपीलीय अधिकारी सह सँयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर के समक्ष सुनवाई के दरम्यान जन सूचना अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी के प्रतिनिधि द्वारा पत्र प्रस्तुत कर बताया गया कि जिला खनिज संस्थान के प्रभारी अधिकारी का स्थानांतरण अक्टूबर 2025 में होने के बाद विधिवत प्रभार सूची प्राप्त नहीं होने के कारण अपीलार्थी को जानकारी नहीं दी जा सकी है। अपीलीय अधिकारी ने उक्त तर्कों को अस्वीकार कर अपीलार्थी को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में तहत नियमानुसार जानकारी 10 दिवस में अपीलार्थी को उपलब्ध कराने का आदेश पारित कर प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया। पत्र क्रमांक सू.अधि./प्र.क्र.397 /2025 /5552 दिनांक 03 /12/25 के माध्यम से पारित आदेश की प्रतिलिपि अपीलार्थी को भी दी गई । 10 दिवस के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने का फरमान आज पर्यन्त परवान नहीं चढ़ा। लिहाजा 01.01.2026 को मुख्य सूचना आयुक्त छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील प्रस्तुत कर इसकी प्रतिलिपि संचालक लोक शिक्षण संचालनालय ,अपीलीय अधिकारी सँयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर एवं कलेक्टर कोरबा को आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु दी गई है। राज्य सूचना आयोग में प्रकरणों की अधिकता की वजह से वहाँ की सुनवाई प्रक्रिया 9 दिन चले अढ़ाई कोस की कहावत जैसी हो गई है। जब तक प्रकरण की सुनवाई तिथि आती है, संबंधित जनसूचना अधिकारी का उस जिले से तबादला हो जाता है। जनसूचना अधिकारी भी इस स्थिति से वाकिफ रहते हैं।
👉आखिर कहां से आती है इतनी हिमाकत?
सबसे बड़ा सवाल एक लोकसेवक के प्रशासनिक जवाबदेहिता को लेकर उठ रहे हैं। आखिर अपीलीय अधिकारी के आदेश की अनदेखी ,अवहेलना कैसे की जा सकती है? स्वीकृत कार्यों की जानकरी विधिवत रूप से साझा करने में कैसा और किसका डर है? प्रभारी अधिकारी द्वारा स्थानांतरण के 2 माह बाद भी विधिवत प्रभार सूची नहीं सौंपा जाना समझ से परे है। अगर ऐसा वाकई है भी तो विभाग ने ऐसे अनुशासनहीन अधिकारी के विरुद्ध प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं कराई ? कुल मिलाकर पूरा माजरा जनसामान्य को डीएमएफ के स्वीकृत कार्यों की जानकारी से वंचित रखने का है।जन सूचना अधिकारी ने जिले में युक्तियुक्तकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी के संदर्भ में अपीलीय अधिकारी के आदेश के बावजूद भी वांछित जानकारी अपीलार्थी को आज पर्यन्त उपलब्ध नहीं कराया जिससे जन सूचना अधिकारी की नीयत पर सवाल उठ रहे। यह कार्य व्यवहार सूचना का अधिकार अधिनियम जैसे केंद्रीय कानून के प्रति आम जनमानस में अविश्वास की भावना पैदा करने वाले कृत्य के समान है।






