👉🏻 कटघोरा वनमंडल में पीछा नहीं छोड़ रहा स्टॉप डेम घोटाला
कोरबा-कटघोरा। कोरबा जिले के कटघोरा वन मंडल में पूर्व के वर्षों में स्टाप डेम निर्माण में हुए घोटाला का मामला पीछा नहीं छोड़ रहा है। किसी न किसी तरह से इस पूरे घोटाले को निपटाने और शिकायतों को नस्तीबद्ध करने के लिए अधिकारी शिद्दत से जुटे हुए हैं। इसी बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें मामले की जांच में लीपापोती करते-कराते हुए प्रशिक्षु रेंजरों द्वारा फर्जी हस्ताक्षर से पंचनामा तैयार कराया गया और इस पंचनामा के आधार पर मामले को नस्तीबद्ध करने की कार्रवाई वन मंडल अधिकारी द्वारा कर दी गई है। साथ ही कलेक्टर जनदर्शन में हुई शिकायत में भी इसे लगाकर गुमराह किया गया है। अब यह मामला सामने आने के बाद इसे मैनेज करने की कवायद में संबंधित लोग जुट गए हैं।
गौरतलब है कि यह मामला कटघोरा वन मंडल के पसान परिक्षेत्र में कैम्पा मद से गोलवानाला एवं कलेवा नाला में स्टापडेम का निर्माण से जुड़ा है। वन परिक्षेत्र पसान द्वारा निर्माण कराया गया था जिसमें पूर्व वन परिक्षेत्र अधिकारी धर्मेंद्र चौहान के कार्यकाल में गोलवा नाला स्टापडेम का कार्य 70 प्रतिशत पुर्ण हो चुका था क्योंकि निर्माण कार्य होने के दौरान तत्कालीन वनमंडल अधिकारी प्रेमलता यादव द्वारा औचक निरीक्षण में कुछ कमियां पाई गई थी। उस समय के उप वनमंडल अधिकारी श्री बंजारे एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग पोड़ी उपरोड़ा के अनुविभागीय अधिकारी के द्वारा संयुक्त जांच में पाया था की कार्य संतोषजनक है और 29 लाख का कार्य होना पाया गया लेकिन उसके बाद वर्तमान रेंजर रामनिवास दहायत एवं एसडीओ संजय त्रिपाठी ने मिलकर षणयंत्र कर डेम प्राक्कलन रिवाइज कर दिया और पूरी रकम, मजदूरी का भुगतान रेंजर एवं दूसरे सर्किल के डिप्टी रेंजर ने अपने परिजनों रिश्तेदार और दोस्त यार के खातों में डालकर रकम गबन कर लिया।
सूत्रों ने बताया कि डेम का रिवाइज करना कैम्पा अधिनियमों का उलंघन है वहीं माप मुस्तिका एवं समायोजित बिल बाउचर में भिन्नता भी पाई गई थी। मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्यवाही की शिकायत पर विभागीय जांच कराई गई।
निर्धारित जांच नवम्बर 2025 को की गई।
👉🏻 बिना जानकारी कराया हस्ताक्षर,फर्जी भी
इस मामले में सूत्रों के मुताबिक जो ज्ञात हुआ है उसके अनुसार 27 नवंबर 2025 को जांच पंचनामा तैयार किया गया लेकिन इस पंचनामा में जिनके हस्ताक्षर कराए गए हैं उन्होंने इसे अपना नहीं होना और फर्जी बताया है। उनकी मानें तो पंचनामा में जो कुछ लिखा गया, उसे ना तो पढ़कर सुनाया गया और न ही पंचनामा में लिखी बातों के बारे में इन कथित गवाहों के हस्ताक्षर हैं। इस तरह से पूरे मामले में लीपापोती करते हुए इसमें संलिप्त अधिकारियों और फर्जीवाड़ा करने वालों को दोषमुक्त कराने के लिए साजिश के तहत कार्य किया गया है। जांच प्रतिवेदन में संलग्न पंचनामा कुल मिलाकर दोषपूर्ण कहा जा सकता है।
👉🏻 दूषित जांच के आधार पर शिकायत नस्तीबद्ध
उक्त जांच टीम द्वारा वन परिक्षेत्र पसान के अंतर्गत गोलवानाला एवं कलेवा नाला में स्टापडेम निर्माण कार्य का निरीक्षण कर दोनों स्टॉपडेम प्राक्कलन के अनुसार होना पाया।संबंधित स्थानीय ग्रामीणों से पूछताछ कर, मौका पंचनामा लिया गया। पूछताछ के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय स्तर पर लेबर का किसी भी प्रकार का भुगतान शेष नहीं है। जिससे यह स्पष्ट है कि गोलवानाला एवं कलेवानाला स्टापडेम का किसी भी प्रकार का कोई मजदूरी भुगतान शेष नहीं है। उक्त दोनों स्टॉपडेम निर्माण कार्य प्राक्कलन के अनुरूप पूर्ण होना पाया गया। इस प्रकरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई है।
उपवनमण्डलाधिकारी पाली द्वारा प्रेषित जांच प्रतिवेदन के आधार पर उक्त शिकायत को वनमण्डल अधिकारी द्वारा नस्तीबद्ध करने की अनुशसा की गई है। अब दूसरी तरफ जब बिना पढ़ाये और बिना जानकारी के ही फर्जी हस्ताक्षर के जरिए पंचनामा तैयार कर लिया गया, तो यह पूरी जांच ही दूषित कही जा रही है।









