👉🏻DMF के मामले में जांच टीम ने सुनी आपत्तियां
कोरबा। कोरबा जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के कुआवंटन और कुप्रबंधन पर दायर शिकायत की उपेक्षा के संबंध में जाँच हेतु राज्य शासन द्वारा गठित 3 सदस्यीय दल ने आज जिला कार्यालय कोरबा में आपत्तियों को सुना।
याचिकाकर्ताओं लक्ष्मी चौहान, सपुरन कुलदीप और अजय श्रीवास्तव सहित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने अपनी बातें कोरबा DMF प्रभारी व जांच समिति के हरिशंकर चौहान, उपायुक्त (विकास) कार्यालय आयुक्त बिलासपुर संभाग, श्रीमती स्मृति तिवारी, उपायुक्त (राजस्व) कार्यालय आयुक्त बिलासपुर संभाग एवं श्रीमती स्मिता पाण्डेय, लेखाधिकारी, कार्यालय आयुक्त बिलासपुर संभाग के समक्ष रखी।
👉🏻 पूछा- जहां भी खर्च किया,रिफंड में क्या लाभ..?
इस दौरान सवाल किया गया कि 10 वर्षों में 4000 करोड रुपए डीएमएफ में खर्च किए गए किंतु अधिकांश राशि वहां खर्च की गई जो खनन प्रभावित क्षेत्र नहीं है। जिन बड़े-बड़े भवनों व अन्य निर्माण कार्यों में डीएमएफ की राशि खर्च की गई है उसमें यह स्पष्ट नहीं है कि उनसे प्राप्त आय राशि की उपयोगिता भूविस्थापितों अथवा खनन क्षेत्र में कितनी होगी? सतरेंगा जैसे क्षेत्र में जो कि पर्यटन मंडल के अधीन है, वहां भी डीएमएफ की राशि खर्च की गई है जबकि यहां होने वाली आय पर्यटन मंडल के पास जाती है।यहां के खर्च का भूविस्थापितों को क्या लाभ? कई ऐसे भी मामले हैं जिनमें एसईसीएल के CSR मद से कार्य हुए किंतु ऐसे ही कार्यों को डीएमएफ से भी होना बता कर राशि खर्च किए जाने की आशंका जाहिर की गई। यह भी सवाल उठाया गया कि विभिन्न विभागों का अपना विभागीय मद होता है, जिससे वह वर्षों से कार्य करते आ रहे हैं और ऐसे निर्माण विभागों के काम भी डीएमएफ की राशि से कराए जा रहे हैं किंतु कार्य धरातल पर अपेक्षाकृत नजर नहीं आता। भूविस्थापितों के पैसों पर दूसरे मौज कर रहे हैं, इसमें कोई संदेह नहीं।
🫵🏻 500 गांवों में कराए कार्यों का ब्यौरा मांगा
आवेदक लक्ष्मी चौहान ने जांच दल से मांग की है कि-राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में बताया है कि जिला खनिज न्यास संस्थान के द्वारा लगभग 500 प्रत्यक्ष गांवों में डीएमएफटी से कार्य कराए गए हैं, और संबंधित दस्तावेज दिखाए एवं इसके अलावा अन्य तथ्य भी उनके द्वारा न्यायालय के समक्ष रखे गए। जाँच समिति से उक्त तथ्यों से संबंधित समस्त दस्तावेजों की प्रति चाही गई है, जिससे उसका प्रतिपरीक्षण कर अपना पक्ष जांच टीम के समक्ष रख सकें। दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद पांच दिवस का समय अपना पक्ष रखने हेतु देने का निवेदन किया गया है।
✍🏻समिति से की गई प्रमुख मांगों पर एक नजर:- सपुरन कुलदीप ने मांग रखी कि-
1.डीएमएफटी मद से की जा रही समस्त नियुक्ति में प्रत्यक्ष प्रभावितो को प्राथमिकता दी जाय। स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण विभाग आदि विभागों में अब तक हुई संविदा नियुक्ति (एक वर्ष) के लिए निरस्त किया जाय और संविदा भर्ती प्रक्रिया का पालन कर दोबारा नियुक्ति की जाय।
- जब तक प्रत्यक्ष प्रभावित व्यक्ति और क्षेत्र की पहचान कर उनकी सूची नहीं बन जाती और शोसल आडिट , परफार्मेंस आडिट नहीं हो जाता तब तक किसी भी नई कार्य की स्वीकृत और किसी भी पद पर नियुक्ति रोक दी जाय
- तत्काल जनसूचना अधिकारी की नियुक्ति की जाय (पूर्व में पृथक व्यवस्था थी)
- डीएमएफटी के वेबसाइट को तत्काल अपडेट करते हुए न्यास नियम के प्रावधानों के अनुसार समस्त जानकारी अपडेट किया जाय
- ख़ान मंत्रालय भारत सरकार 2024 के दिशा निर्देश के अनुसार भू विस्थापितों के कृषि उत्पादक समूह , महिला स्वसहायता समूह, को- ऑपरेटिव को, रोजगारमूलक परियोजनाओं को प्राथमिकता दिया जाय
- DMFT के मद से बने विभिन्न व्यावसायिक भवन, पर्यटन केंद्र , कार पार्किंग, स्कूल बिल्डिंग, गार्डन से होने वाले आय का लाभ प्रभावितों के लिए सुनिश्चित किया जाय
- न्यास नियम के अंतर्गत निर्धारित विजन डाक्यूमेंट (क्षेत्र के विकास के लिए) जब भी तैयार किया जाय, प्रभावित क्षेत्र के प्रतिनिधि को शामिल किया जाय
- पुनर्वासित गांवों (सर्वमंगला नगर, वैशालीनगर, यमुना नगर, लक्ष्मण नगर, गंगानगर, विजय नगर, अवधनगर, विवेकानंद नगर
चैनपुर नगर, गांधीनगर, नेहरू नगर, बरमपुर, खम्हारिया) इत्यादि को प्रथम प्राथमिकता में रखते हुए यहाँ के विकास के लिए योजना बनाई जाय जो कि न्यास गठन का मुख्य उदेश्य भी है। - भूविस्थापित परिवारों के लिए हाइवे/मुख्य सड़क व प्रमुख स्थलों में व्यवसायिक परिसर का निर्माण किया जाये एवं व्यवसाय शुरू करने के लिए पूंजी की व्यवस्था दी जाए।
👉🏻इन्होंने भी रखी अपनी बात
सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी हिस्सा लिया। इन्होंने समिति को बताया कि किस तरह प्रभावितों के हक के पैसे का बंदरबांट किया जा रहा है। शिकायत दर्ज कराने वालों में प्रमुख रूप से बसन्त कुमार कंवर (जनपद सदस्य, कटघोरा) अनिल टंडन (जनपद सदस्य, पाली), ग्राम सरपंच गौरी बाई (बेलटिकरी), विष्णु बिंझवार (रलिया) और लोकेश कंवर (हरदीबाजार), समिति एवं ग्रामीण प्रतिनिधि रुद्र दास महंत (नराईबोध), सतीश कुमार (भैरोताल), देवेंद्र कुमार (पुनर्वास ग्राम गंगानगर) के अलावा अन्य ग्रामीणों ने भी डीएमएफ फंड के बंदरबांट पर कड़ा विरोध जताया ।
👉🏻प्रभावित गांवों की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों ने समिति को अवगत कराया कि कोयला खदान क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित 43 गांवों की स्थिति दयनीय है विशेष रूप से उन 13 गांवों का मुद्दा उठाया गया जिन्हें 7 साल पहले आदर्श गांव’ घोषित किया गया था लेकिन आज तक वहां कोई बुनियादी विकास कार्य नहीं हुआ शिकायतकर्ताओं ने मांग की कि नियम विरुद्ध किए जा रहे कार्यों को तत्काल रोका जाए और फंड का उपयोग केवल भूविस्थापितों के कल्याण के लिए किया जाए ।





