👉🏻 शिक्षकों के साथ अब संसाधनों का भी अटैचमेंट…!
👉🏻DMF से बच्चों के लिए खरीदे कम्प्यूटरों पर दूसरे विभागों की नजर
👉🏻 स्कूलों को मिले कंप्यूटर-प्रिंटर की वापसी का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं, पूरे जिले के सरकारी और आत्मानंद स्कूलों की जांच की जरूरत
कोरबा। कोरबा जिले में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के साथ-साथ शिक्षा के संसाधनों और आवश्यक जरूरत को पूरा करने के लिए सामग्रियों की खरीदी के नाम पर भी बड़ा खेल हो रहा है। यह बड़ा ही अचरज और गहन जाँच का मुद्दा है कि पहले शिक्षा विभाग के शिक्षकों को दूसरे विभागों में काम करने के लिए अटैचमेंट पर भेजा जाता रहा और अब तो हालात ऐसे हैं कि शिक्षा विभाग के संसाधनों को भी एक तरह से दूसरे विभागों में अटैचमेंट पर दे दिया गया है। ना शिक्षकों के मूल शाला में वापसी कराने में ईमानदारी नजर आती है और ना ही दूसरे विभागों में दिए गए सामानों की। इसमें सबसे बड़ा खेल कंप्यूटरों को लेकर हुआ है जो चुनिंदा सरकारी और आत्मानंद स्कूलों में ही नहीं बल्कि पूरे जिले के कंप्यूटर आपूर्ति वाले स्कूलों और आत्मानंद स्कूलों में जांच का विषय बन चुके हैं।
मिली पुष्ट जानकारियों के मुताबिक जिले के स्वामी आत्मानंद स्कूलों में बच्चों को आधुनिक शिक्षा और कंप्यूटर प्रशिक्षण देने के लिए सीएसआर/DMF मद से उपलब्ध कराए गए कंप्यूटर दूसरे विभागों के काम आ रहे हैं। इसने संसाधनों की निगरानी और उनके इस्तेमाल पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। तीन अलग-अलग आत्मानंद स्कूलों की जानकारी में सामने आया है कि स्कूलों को उपलब्ध कराए गए कंप्यूटरों में से कई को जिला शिक्षा कार्यालय, सहायक जिला परियोजना अधिकारी कार्यालय और निर्वाचन संबंधी कार्यों के लिए दे दिया गया। ये सभी कंप्यूटर स्कूल को वापस मिले नहीं हैं।
👉🏻20-20 कंप्यूटर मिले, कई दूसरे विभागों को दे दिए
- दुरपा के आत्मानंद स्कूल को वित्तीय वर्ष 2022-23 से अब तक 20 कंप्यूटर और 3 प्रिंटर CSR/DMF से उपलब्ध कराए गए। इनमें से 5 कम्प्यूटर चोरी हो गए, 2 कंप्यूटर सहायक जिला परियोजना अधिकारी समग्र शिक्षा के जी भारद्वाज द्वारा कार्यालय कार्य के लिए लिए गए। 3 कंप्यूटर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा निर्वाचन कार्य के लिए 11/10/2023 को लिए गए। फिर 1 कंप्यूटर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा विभागीय कार्य के लिए 31/12/2025 को लिया गया। इसी तरह सहायक जिला परियोजना अधिकारी समग्र शिक्षा द्वारा 26 जून 2023 को एक प्रिंटर व जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के लिए 11 अक्टूबर 2023 को एक प्रिंटर लिया गया।
- इसी कड़ी में सेजेस रुमगरा को 20 कंप्यूटर व तीन प्रिंटर प्रदाय किए गए जिनमें DEO द्वारा 1 मई 2024 को 3 कंप्यूटर लिए गए, पुनः 2 कम्प्यूटर व एक प्रिंटर 18 अक्टूबर 2023 को लिया गया। 2 कंप्यूटर सहायक जिला परियोजना अधिकारी समग्र शिक्षा केजी भारद्वाज द्वारा 4 सितंबर 2023 को लिया गया।
- सेजेस चैत्मा पाली में दिए गए 20 कंप्यूटर में से एक कंप्यूटर एडीपीओ समग्र शिक्षा के जी भारद्वाज के द्वारा ले जाया गया। यहां स्कूल में 19 कंप्यूटर व तीन प्रिंटर शेष हैं।
🤔 सरकार की ICT योजना पर सवाल
स्कूलों में आईसीटी (ICT – Information and Communication Technology) योजना भारत सरकार द्वारा दिसंबर 2004 में शुरू की गई थी और बाद में इसे ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत शामिल किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य माध्यमिक और उच्च माध्यमिक सरकारी स्कूलों (जिनमें आत्मानंद शामिल हैं) में डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करना, कंप्यूटर-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना और छात्रों के डिजिटल कौशल को सुधारना है। आत्मानंद स्कूलों के लिए अच्छी क्वालिटी वाले कंप्यूटर DMF से खरीद कर प्रदान कराए गए लेकिन इसमें भी समग्र शिक्षा और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने ऐसी सेंध लगाई कि ICT योजना पर पानी फिर गया है।
🫵🏻 जब विभागों का अपना बजट है तो स्कूलों का संसाधन क्यों?
सूचना का अधिकार के तहत इन तीन स्कूलों की जानकारी सामने आई है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि और भी स्वामी आत्मानंद स्कूलों में इस तरह का खेल हुआ है। अब, सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा विभाग और निर्वाचन विभाग सहित प्रत्येक सरकारी विभाग के पास अपने कार्यालयीन कार्यों के लिए बजट और संसाधन उपलब्ध हैं। इसके बावजूद आत्मानंद स्कूलों में बच्चों के लिए DMF से खरीदे गए कंप्यूटरों का इस्तेमाल दूसरे विभागों के काम के लिए क्यों किया जा रहा है?
यदि किसी विभाग को कंप्यूटर की आवश्यकता थी तो उसके लिए अलग से खरीदी या उपलब्ध संसाधन की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
👉🏻 इन सवालों पर जांच कराए प्रशासन
- क्या DMF से आत्मानंद स्कूलों के लिए खरीदे गए संसाधनों को दूसरे कार्यालयों में इस्तेमाल करने की अनुमति थी? यदि थी तो इसकी अनुमति किस स्तर से मिली?
- सामग्री का स्कूलवार भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।
- कितना सामान खरीदा गया?
कहां पहुंचा? - कितना स्कूल में मौजूद है?
कितना खराब है? - कितना चोरी हुआ?
- कितना दूसरे विभागों को दिया गया? और जो दिया गया, वह वापस आया या नहीं?
👀 अब जरूरत पूरे जिले के आत्मानंद स्कूलों के सिर्फ कम्प्यूटर-प्रिंटर ही नहीं, अन्य प्रदत्त संसाधनों का एक साथ ऑडिट और भौतिक सत्यापन कराने की है।





