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रमन सरकार की पुनर्वास नीति अभिशाप बनी भूविस्थापितों के लिए

Admin
Last updated: 03/11/2025 5:52 PM
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0 हाईकोर्ट के आदेश उपरांत छोटे खातेदार रोजगार से वंचित

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    कोरबा। एसईसील कोरबा क्षेत्र के द्वारा सरायपाली बुड़बुड़ खुली खदान के लिए कोल उत्खनन हेतु ग्राम बुड़बुड़ एवं राहाडीह की 550 एकड़ भूमि वर्ष 2007 में प्रथम चरण के लिए अर्जित की थी । सहमति के अनुरूप मध्यप्रदेश पुनर्वास नीति 1991 में रोजगार न देकर बगैर सहमति कोल इंडिया पॉलिसी 2012 लागू कर छोटे खातेदारों को रोजगार से अपात्र कर दिया गया । छोटे खातेदारों ने रोजगार नहीं मिलने के कारण उच्च न्यायालय बिलासपुर में पिटीशन दायर किया । जिसके संबंध में उच्च न्यायालय बिलासपुर ने 15/01/2025 को आदेश पारित किया है कि ,अर्जन के समय प्रचलित नीति के तहत रोजगार प्रदान किया जाय । जिसके खिलाफ एसईसीएल ने डबल बेंच में अपील की थी जहां अपील खारिज कर दी गई । उच्च न्यायालय बिलासपुर के द्वारा पारित आदेश के अनुसार अर्जन के समय प्रचलित नीति के अनुसार रोजगार दिया जाना था ।

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      0 हाईकोर्ट आदेश के संबंध में महाप्रबंधक कोरबा का याचिकाकर्ता को जवाब

      ग्राम बुड़बुड़ एवं राहाडीह के अर्जित भूमि का अवार्ड वर्ष 2007 में पारित हुआ था । उक्त समय छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति 2007 प्रचलित थी । छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति 2007 के अनुसार जितने रोजगार सृजित होंगे , उतने रोजगार उद्योग द्वारा दिया जाएगा है । इसके संबंध में महाप्रबंधक कोरबा ने याचिका जीतने वाले खातेदारों को पत्र प्रेषित कर अवगत कराया है , कि छत्तीसगढ़ राज्य की आदर्श पुनर्वास एवं पुर्नस्थापना नीति 2007 की कंडिका क्रमांक 7.1 (ज) के अनुसार सरायपाली एवं राहाडीह खुली खदान की अनुमोदित प्रोजेक्ट रिपोर्ट में नियमित रोजगार के अवसर कुल 161 पद उपलब्ध होते हैं । जबकि कोल इंडिया लिमिटेड की पुनर्वास एवं पुर्नस्थापना नीति के अनुसार कुल 321 नियमित रोजगार के पद सृजित होते हैं , जो कि तुलनात्मक दृष्टिकोण से भुविस्थापितों के लिए अधिक लाभकारी है ।

      0 सर्वसम्मति से मध्य प्रदेश पुनर्वास नीति 1991 के तहत रोजगार देना तय हुआ था

      एसईसील कोरबा क्षेत्र के अंतर्गत संचालित बुड़बुड़ सरायपाली ओपन कास्ट से प्रभावित ग्राम बुड़बुड़ एवं राहाडीह के 550 एकड़ भूमि के अर्जन हेतु वर्ष 2007 में अवार्ड पारित किया गया है । अवार्ड पारित होने की प्रक्रिया के दौरान महाप्रबंधक कोरबा श्री जेड एच खान के द्वारा श्रीमान अनुविभागीय अधिकारी कटघोरा को 20/12/2005 को पत्र प्रेषित कर जानकारी प्रदान किया था , कि बुड़बुड़ एवं राहाडीह के अधिग्रहण में मध्यप्रदेश पुनर्वास तिथि 1991 के तहत पात्र भूविस्थापितों को रोजगार देने सहमत है । जिसके कारण अवार्ड पत्रक में मध्य प्रदेश पुनर्वास नीति के तहत रोजगार देने का उल्लेख किया गया है। अवार्ड पूर्ण होने के उपरांत जिलाधीश रजत कुमार के द्वारा ग्राम बुड़बुड़ में दिनांक 15/03/2013 को बैठक कर यह निर्णय लिया गया था , कि मध्यप्रदेश पुनर्वास नीति के तहत रोजगार दिया जाना है । रोजगार हेतु शिविर लगाकर एक सप्ताह के अंदर नामांकन आवेदन लिया जाएगा । जिस बैठक में महाप्रबंधक कोरबा जेड एच खान , जिला पंचायत सीईओ कोरबा , नगर निगम आयुक्त , एसडीएम कटघोरा, विधायक पाली तानाखार , जिला पंचायत अध्यक्ष , जनपद पंचायत अध्यक्ष , सरपंच एवं लगभग 400 ग्रामीण उपस्थित थे ।

      0 ग्रामीणों की आपत्ति उपरांत कोल इंडिया पॉलिसी 2012 लागू किया गया

      जिलाधीश के द्वारा ग्राम में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से मध्य प्रदेश पुनर्वास नीति 1991 के तहत रोजगार देना तय किया गया था । जिसको एकाएक दिनांक 25/02/2016 को बदलते हुए कोल इंडिया पॉलिसी 2012 के तहत रोजगार देना प्रारंभ कर दिया गया । पॉलिसी बदलने के संबंध में जिलाधीश कोरबा को दिनांक 18/04/2016 को ज्ञापन सौंपकर आपत्ति दर्ज कराई थी , परंतु आपत्ति पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई ,न ही आपत्ति कर्ता को इसके संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई गई । जिसके कारण नामांकन एवं सत्यापन हो चुके छोटे खातेदार रोजगार से वंचित हो गए ।

      0 पात्रता प्रमाण पत्र प्रदान कर रोजगार से किया गया वंचित

      ग्राम बुड़बुड़ एवं राहाडीह के खातेदारों को एसईसीएल प्रबंधन के द्वारा रोजगार हेतु पात्रता प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है । जिसमें स्पष्ट रूप से मध्य प्रदेश पुनर्वास नीति 1991 के तहत एक रोजगार के लिए पात्रता संबंधी प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है । खातेदारों को रोजगार पात्रता प्रमाण पत्र प्रदान करने के बाद भी रोजगार से वंचित कर दिया गया है ।

      0 रमन सरकार के द्वारा लाई गई पुनर्वास नीति भुविस्थापितों के लिए अभिशाप

      छत्तीसगढ़ राज्य गठन होने के बाद सर्वप्रथम आदर्श पुनर्वास नीति रमन सरकार के द्वारा 2007 में लाया गया था । जिसमें रोजगार देने हेतु यह निर्देश दिया गया है कि , औद्योगिक इकाइयों में जितने रोजगार सृजित होंगे उतने रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे । इस निर्देश को आधार बनाकर एसईसीएल के द्वारा लोगों को रोजगार से हाई कोर्ट के आदेश उपरांत वंचित किया जा रहा है । मध्यप्रदेश शासन के पुनर्वास नीति 1991 में प्रत्येक खातेदार को रोजगार देने का प्रावधान था जिसके कारण सभी छोटे खातेदारों को रोजगार प्राप्त हो रहा था । एसईसीएल में रोजगार के अवसर की कमी नहीं है सभी खातेदारों को रोजगार दिया जा सकता है । खदान का संचालन और सोर्सिंग कंपनी या मोड के तहत किया जा रहा है जिसके कारण रोजगार की संख्या में कमी आ गई है एसईसीएल के द्वारा ही खदान का संचालन करने से सभी खातेदारों को आसानी से रोजगार दिया जाना संभव था परंतु नीति में कमी होने के कारण रोजगार से वंचित हो गए हैं ।

      माटी अधिकार मंच के अध्यक्ष ब्रजेश श्रीवास ने कहा है कि बुड़बुड़ एवं राहाडीह का प्रकरण स्पष्ट है । सभी तथ्यों को पिटीशन में समाहित नहीं करने के कारण यह स्थिति निर्मित हुई है । बुड़बुड़ एवं राहाडीह में स्पष्ट रूप से मध्यप्रदेश पुनर्वास नीति 1991के तहत रोजगार देने का आदेश न्यायालय से पारित हो सकता था , परंतु खातेदारों के पक्ष में जितने दस्तावेज एवं तथ्य मौजूद थे । उनको पिटीशन में समाहित नहीं किया गया है । छोटे खातेदारों के प्रकरण में मुख्य रूप से रथों बाई एवं प्यारे लाल के आदेश को आधार बनाकर पिटीशन तैयार किया गया है । जिसके कारण यह स्थिति निर्मित हुई है । वास्तविक रूप से प्रत्येक ग्रामों की स्थिति भिन्न-भिन्न है । उन्हीं तथ्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय में पिटीशन दायर किया जाना चाहिए । भविष्य में खातेदारों को न्यायालय में पिटीशन तैयार करते वक्त यह ध्यान रखना आवश्यक है , कि सभी तथ्यों को समाहित कर पिटीशन लगाया जाय अन्यथा खातेदारों को हानि उठाना पड़ सकता है । जिसके कारण एसईसीएल को गुमराह करने का अवसर प्राप्त हो रहा है । माटी अधिकार मंच के अध्यक्ष के द्वारा यह अवगत कराया गया है कि राज्य पुनर्वास समिति के अध्यक्ष माननीय मुख्यमंत्री को इस विषय के संबंध में पत्राचार कर अवगत कराया जाएगा एवं मांग की जाएगी पुनर्वास नीति में आवश्यक संशोधन किया जाए जिससे कि खातेदारों के साथ अहित न हो एवं रोजगार से वंचित होना न पड़े।

      एक प्रकरण में आदेश की प्रति
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