कोरबा। कोरबा सिर्फ कोयला, चिमनी और बिजली की नगरी नहीं, बल्कि कोरबा की असली धड़कन हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन में बसती है।
माटी का श्रृंगार और मीत-मितानी की अमर रीत हमारी भोजली है।
भोजली सिर्फ एक रस्म नहीं है और न ही टोकरी में उगे जौ का हरा पौधा मात्र है। भोजली तो प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता, आस्था और वंदना की पावन परंपरा है।
आसमान से गिरने वाली पानी की हर बूंद को हमारे पुरखों ने गंगा मैया का स्वरूप माना। टोकरी में भीगी हुई मिट्टी रखकर पूरी आस्था के साथ जौ बोया जाता है। यह हरी-भरी भोजली हमारी धरती माता का श्रृंगार है, वही धरती माता जो हमें अन्न देती है और जीवन देती है।
भोजली का यह पर्व हमें याद दिलाता है कि प्रकृति का हम पर कितना बड़ा उपकार है और हम प्रकृति के कितने ऋणी हैं। और हमारी इस संस्कृति में मितान परंपरा का अटूट बंधन भी जुड़ा हुआ है।
आज जब समाज का हर वर्ग रिश्तों का अर्थ खोज रहा है, तब हमारी छत्तीसगढ़िया संस्कृति भोजली के एक तिनके से मितान का रिश्ता जोड़ देती है। कान के पीछे भोजली खोंसकर जब दो लोग एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं, तो वह रिश्ता केवल आज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जिंदगी भर के सुख-दुख का साथी बन जाता है।।यहाँ न कोई जाति का भेद है, न कोई ऊँच-नीच। यहाँ केवल मया, अपनापन और भाईचारा है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारे बच्चे मोबाइल की स्क्रीन में उलझते जा रहे हैं। अगर हम अपने बच्चों को भोजली, करमा, सुआ, पंथी और अपनी लोकपरंपराओं के बारे में नहीं बताएँगे, तो हमारी यह पहचान धीरे-धीरे धुंधली हो जाएगी। इसी सांस्कृतिक ज्योति को कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ में फिर से जगमगाने का यह हमारा एक छोटा-सा प्रयास है।
👉🏻 भव्य प्रदेश स्तरीय सांस्कृतिक समागम
दिलीप मिरी, प्रदेश संयोजक छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना (गैर राजनीतिक संगठन) व अध्यक्ष अतुल दास महन्त ने बताया कि प्रदेश स्तरीय भोजली रैली सिर्फ कोरबा का आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक भव्य प्रदेश स्तरीय सांस्कृतिक समागम बनने जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से लोक कलाकार अपनी मिट्टी की खुशबू, अपनी कला और अपनी संस्कृति को लेकर हमारे बीच पहुँच रहे हैं।
रैली में अलग-अलग अंचलों के पारंपरिक लोकनृत्य, लोकसंगीत और हमारी पुरखौती धरोहर को दर्शाती झाँकियाँ आकर्षण का केंद्र रहेंगी। एक ही मंच पर पूरे छत्तीसगढ़ की बहुरंगी लोकसंस्कृति का यह जीवंत दर्शन हमारे जिले और पूरे प्रदेशवासियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।
👉🏻भोजली महोत्सव 29 अगस्त को घंटाघर में
इसी मिट्टी के गौरव को एक नया विस्तार देने के लिए आगामी 29 अगस्त को कोरबा के घंटाघर चौक में भव्य भोजली रैली निकाली जा रही है। दाई-बहनें पारंपरिक वेशभूषा में, सिर पर भोजली का कलश रखकर रैली में शामिल होंगी। मांदर की थाप होगी, झांझ-मंजीरे की झंकार होगी और पूरा घंटाघर चौक लोकगीतों की मिठास से गूंज उठेगा।
विसर्जन के बाद एक-दूसरे को भोजली भेंट करके भाईचारे, मया-दुलार और सामाजिक सौहार्द के संकल्प को फिर दोहराएँगे।
दिलीप मिरी ने कहा कि सभी के सहयोग बिना यह प्रयास अधूरा है।
यह आयोजन किसी एक संस्था का नहीं है। यह पूरे कोरबा और पूरे छत्तीसगढ़ का आयोजन है। दिलीप मिरी ने आव्हान किया कि, 29 अगस्त को घंटाघर में सभी मिल-जुलकर अपनी लोकसंस्कृति के इस महायज्ञ को सफल बनाएँ। अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति और अपनी परंपरा के मान-सम्मान के लिए हम सभी एकजुट होंए।
KORBA में प्रदेश स्तरीय भोजली महोत्सव आज, घंटाघर में बिखरेंगे लोक कला के रंग-बनाएंगे मितान






