कहा- मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी मानवता पर कलंक
कोरबा। रजगामार की मासूम बच्ची के चार दिनों तक लापता रहने और फिर जंगल में उसका शव मिलने की खबर ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। बच्ची के साथ अनाचार की खबर सामने आने से मन व्यथित है और हृदय में गहरा आक्रोश है,यह केवल एक परिवार का दुःख नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के माथे पर लगा एक कलंक है।
जब पूरा देश नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना में लीन था, जब हर ओर नारी शक्ति की पूजा और सम्मान की बातें हो रही थीं, उसी समय एक मासूम बच्ची के साथ ऐसी दरिंदगी की घटना सामने आना हमारी सामाजिक व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
घटना से उद्वेलित सर्पमित्र व नोवा नेचर के सदस्य जितेन्द्र सारथी ने कहा है कि एक ओर हम मां दुर्गा को शक्ति का स्वरूप मानकर पूजते हैं, तो दूसरी ओर हमारी ही धरती पर मासूम बच्चियां सुरक्षित क्यों नहीं हैं? आखिर हमारी पूजा, हमारे संस्कार और हमारी इंसानियत कहां खो जाती है?
मैं इस जघन्य घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं,जिस व्यक्ति ने भी इस मासूम के साथ ऐसा अमानवीय कृत्य किया है, उसके प्रति मेरे मन में गहरा आक्रोश है, ऐसी घटनाएं किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार कर देती हैं, एक बच्ची, जिसे अभी दुनिया को समझना था, अपने सपनों को जीना था और अपने परिवार के साथ हंसते-खेलते जीवन बिताना था, उसके साथ ऐसी क्रूरता की खबर किसी भी संवेदनशील इंसान को भीतर तक झकझोर देती है।
मेरी मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच की जाए,वैज्ञानिक और ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित की जाए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए, दोषी को तत्काल फांसी देनी चाहिए।






