0 सत्यसंवाद ने प्रमुखता से उजागर किया है मामला
कोरबा-कटघोरा। कटघोरा नगर पालिका परिषद परिसर में निर्माणाधीन अटल परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा की गुणवत्ता को लेकर उठे विवाद ने अब प्रशासनिक जांच का रूप ले लिया है। कटघोरा में अटल परिसर में स्थापित प्रतिमा की गहन जाँच की मांग की है। प्रतिमा की गुणवत्ता पर लगातार लगाए जा रहे आरोपों के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर संभाग के कार्यपालन अभियंता अली बख्श मंगलवार को कटघोरा पहुंचे और मौके पर प्रतिमा का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान कार्यपालन अभियंता ने प्रतिमा की गुणवत्ता का बारीकी से परीक्षण किया। प्रारंभिक जांच के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि प्रतिमा के निर्माण में अनियमितता के संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया कार्य में गड़बड़ी दिखाई दे रही है, इसलिए प्रतिमा का सैंपल लेकर उसे परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर संबंधित निर्माण एजेंसी और ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य निर्माता एवं पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के लगभग 187 नगरीय निकायों में अटल परिसर निर्माण के लिए करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत किया है। अधिकांश स्थानों पर निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, लेकिन कटघोरा नगर पालिका परिषद के अटल परिसर में स्थापित प्रतिमा की गुणवत्ता को लेकर सामने आए आरोपों ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया है।
स्थानीय स्तर पर लोगों का आरोप है कि प्रतिमा निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया और निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरती गई है। प्रतिमा की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने न केवल कटघोरा बल्कि पूरे कोरबा जिले और प्रदेश में निर्मित अन्य अटल परिसरों के निर्माण कार्यों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। मामले की जांच अब तकनीकी स्तर पर की जा रही है। यदि जांच रिपोर्ट में निर्माण कार्य में अनियमितता अथवा वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो यह मामला बड़े भ्रष्टाचार के रूप में सामने आ सकता है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रतिमा निर्माण में वास्तव में गुणवत्ता संबंधी मानकों की अनदेखी हुई है या नहीं, तथा दोषी पाए जाने वालों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।








