0 पथरीली जमीन के बीच मिट्टी खोदकर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही
कोरबा। अरबों रुपए के डीएमएफ मद के अलावा आकांक्षी जिला की सूची में शामिल कोरबा जिले में जल जीवन मिशन का कार्य मिशन मोड पर कराया जाता रहा है। प्राथमिकता रही है कि हर घर तक नल और पानी पहुंचा कर दिया जाए। दूसरी तरफ यह कैसी विडंबना है कि ग्रामीण और वनांचल इलाकों में आज भी पानी की किल्लत वैसे ही बनी हुई है जैसे वर्षों पहले हुआ करती थी। ना संसाधन की कमी है ना साधन की और ना ही धन की लेकिन फिर भी दूरस्थ ग्रामवासियों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।

यह जो तस्वीर है,इसे कोरबा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत डोकरमना के कुदरीचिंगार जूनपार का है। यहां पिछले कई महीनो से ग्रामीणों के द्वारा यह बात सामने लाई जा रही है कि गांव में लगा हुआ हैंडपंप खराब है किंतु इसे बनाया नहीं जा सका है। दूसरी तरफ यहां के जल स्रोत में पानी काफी कम मात्रा में आ रहा है और पानी की समस्या लगातार बनी हुई है। अभी आलम यह है कि ग्रामीणों को पथरीली जमीन के बीच में से जगह देखकर मिट्टी खोदकर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इस तस्वीर में सहज ही देखा जा सकता है,जिसे गांव के जागरूक अतरसाय मंझवार ने भेजा है।
अतरसाय ने बताया कि यहां के बिगड़े हुए हैंडपंप को सुधारने के लिए कोई रुचि नहीं दिखाई जा रही है, पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है लेकिन समाधान नहीं हो पा रहा है।गांव वाले आज भी गड्ढा खोद- खोदकर पानी की व्यवस्था करने इधर-उधर भटक रहे हैं।
वैसे,जंगल क्षेत्र होने के कारण वन विभाग के द्वारा भी जंगल में रहने वाले जानवरों के साथ-साथ ग्रामीणों के उपयोग हेतु विभिन्न मदों से तालाब आदि की खुदाई कराई जाती है। मनरेगा से भी तालाब गांव और जंगल क्षेत्र में खुदवाए जाते हैं ताकि जल की उपयोगिता खासकर गर्मी के मौसम में सुनिश्चित हो सके। इन सब के बावजूद अरबों का आर्थिक संसाधन इन दूरस्थ ग्रामीणों की प्यास बुझा पाने में सफल नहीं हो पा रहा है।
ग्राम पंचायत डोकरमना के ग्राम कुदरीचिंगार जूनपार में पानी को लेकर बहुत परेशानी हो रही है। यहां के नल में पानी कम हो जाने पर इधर-उधर भटकना पड़ता है।
