0 झगरहा-कोरकोमा-परसखेत-चचिया मार्ग का निर्माण से पहले ही उठे सवाल
कोरबा। कोरबा जिले में जिला खनिज न्यास (DMF) मद से स्वीकृत सड़कों के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ताजा मामला लोक निर्माण विभाग (PWD) कोरबा डिवीजन का है, जहां एक सड़क निर्माण कार्य को निर्धारित दर (SOR) से करीब 16.88% कम दर (Below Rate) पर स्वीकृति दी गई है।
👉🏻 क्या है पूरा मामला?
PWD कोरबा के कार्यपालन अभियंता कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार झगरहा-कोरकोमा-परसखेत-चचिया मार्ग में कुल लागत (PAC) लगभग 28.80 करोड़ रुपये, स्वीकृत दर: 16.88% कम (Below SOR), कार्य की समय सीमा 15 माह (बरसात सहित) DMF (जिला खनिज न्यास) से इस कार्य के लिए “A” क्लास ठेकेदार को अनुबंध दिया गया है।
👉🏻 गुणवत्ता पर बड़ा सवाल
ठेका कार्य के जानकारों का मानना है कि जब ठेकेदार इतनी कम दर पर काम लेता है, तो लागत बचाने के लिए निम्न स्तर की सामग्री या निर्माण प्रक्रिया अपनाने की आशंका बढ़ जाती है।
सवाल उठता है कि “जब 16.88% कम रेट में काम होगा, तो गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित होगी?” DMF फंड का मुख्य उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे और सुविधाएं देना है। लेकिन कम दर पर टेंडर, समय सीमा का दबाव और निगरानी में कमी की वजह से ये सभी बातें मिलकर काम की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
👉🏻 निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत
स्थानीय स्तर पर जरूरी है कि कार्य की थर्ड पार्टी से जांच हो तथा
निर्माण में गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन हो और DMF फंड के उपयोग में पारदर्शिता लाई जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है—
क्या केवल कम रेट को प्राथमिकता दी जाएगी,या गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे? विभागीय जानकार बताते हैं कि 8% से अधिक बिलो दर मितव्ययी नहीं माना जाता,ऐसे कार्यों की निगरानी और जवाबदेही बढ़ जाती है। DMF जैसे महत्वपूर्ण फंड में “बिलो रेट” का यह खेल यदि इसी तरह से चलता रहा, तो विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गहरा असर पड़ सकता है। सवाल साफ है — सस्ता काम या टिकाऊ विकास!






