👉🏻 नगर पालिका में चल रही टेंडर की राजनीति, एवब का खेला
कोरबा। नगर पालिका परिषद बांकीमोगरा में पलटी मारने की राजनीति हावी है। यहां शिकायत करने के बाद उसका खण्डन कर दिया गया। कांग्रेस पार्षद दल ने जिसे अपना नेता चुना/ सदन का नेता प्रतिपक्ष बनाया, उस पर ही गुमराह करने का आरोप लगाते हुए संयुक्त संचालक से की गई शिकायत से 4 कांग्रेसी पार्षदों ने हाथ खींच लिया। नेता प्रतिपक्ष ने इस पर कहा है कि नगर पालिका में दबाव की राजनीति कम कर रही है। कुछ लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर यह सब कुछ कराया जा रहा है।
संयुक्त संचालक, नगरीय निकाय, विभाग बिलासपुर को पार्षद रूबी गुप्ता ने धोखे से हस्ताक्षर कराने के विरोध में शिकायत एवं पत्र का खंडन प्रेषित किया है।
रूबी गुप्ता के लेटर हेड व पार्षदों के हस्ताक्षरित आवेदन में लेख है कि- नवगठित नगर पालिका परिषद् बांकीमोंगरा के विषय में परिषद् के नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास द्वारा नगर पालिका के संचालन व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए आरोप लगाया गया है। यह कि वार्डों में कार्य को लेकर भेदभाव किया जाता एवं पार्षद निधि रोक दिया जाता है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। हमारे वार्ड के साथ-साथ 30 वार्ड के पार्षद निधि आबंटित कर कार्य हेतु राशि समय पर आबंटित कर दिया जाता है। पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है एवं टेंडर प्रक्रिया में बंदरबाट किया जा रहा है, इस तरह का बेबुनियाद विषय लिखा गया है, जो कि पूर्णतः असत्य है। हमें गुमराह कर पत्र पर हस्ताक्षर कराया गया है. जिसका हम सब खंडन करते हैं। हमारे परिषद् की टेंडर प्रक्रिया नियमानुसार जारी होता है, जिसमें ऑनलाईन टेंडर भी शामिल है। उसमें किसी प्रकार का कोई भी कार्य मनचाहा ढंग से आबंटित नहीं किया जा सकता। नगर पालिका परिषद् नवगठित होने के बावजूद एक वर्ष के अल्प अवधि में अधिकारी/कर्मचारी एवं संसाधन के अभाव में भी भगवान भरोसे नहीं एवं नगर पालिका परिषद् के नेतृत्व में विकास कार्य सुचारू रूप से चल रहा है,इसमें कोई शिकायत नहीं है। शिकायत में 13 लोगों के हस्ताक्षर थे जिनमें से खण्डन पत्र में 7 (4 कांग्रेसी व 3 भाजपा पार्षद) ने हस्ताक्षर किया है।
👉🏻 यह की गईं है शिकायत,जिसका खण्डन किया गया है
इसके पूर्व् संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन विभाग, बिलासपुर से टेंडर में की जा रही मनमानी की शिकायत कर कार्यवाही चाही गई है। कहा गया है कि बांकीमोंगरा नगर पालिका परिषद जब से अस्तित्व में आया है, तब से यहां का शासन-प्रशासन अपनी मनमानी पर उतारू हैं, कोई भी टेंडर जारी तो जरूर होता है परंतु खुलने का कोई तय समय सीमा नहीं है। बिना ठेकेदारों को सूचना दिए मनमानी तरीके से टेंडर खोल दिया जाता है, समय परिवर्तन कर दिया जाता है। कार्यालय में कुल मिलाकर टेंडर संबंधित व्यवस्था मनमाने तरीके से चल रही है। इसके अलावा वार्डों में हो रहे निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का कोई सरोकार नहीं है। पार्षदों के द्वारा शिकायत करने के बाद भी बिल जारी कर दिया जाता है, कुल मिलाकर पालिका की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। सामान्य सभा में कार्यों को अलग नाम से प्रस्तुत करके पास करवाते हैं, धरातल पर कहानी कुछ और कर दिया जाता है। जो पार्षद ज्यादा विरोध करे उसके वार्ड के कार्यों में विवाद करवाना प्रारम्भ कर दिया जाता है या तो निधि ही रोक दिया जाता है। इसके अलावा टेंडरों को एक ओर बिलो (कम) में जाता है वहीं यहां के लगभग कार्य ABOBE (ज्यादा) में आबंटन होता है, जिससे राजस्व को भी मिलीभगत करके क्षति पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।






