👉🏻सनसनीखेज- आदिवासी चपरासी को डायरेक्टर बनाकर खरीदी करोड़ों की बेनामी संपत्ति
👉🏻 राष्ट्रपति सचिवालय से जांच का निर्देश जारी
कोरबा। संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राज्य प्रायोजित हत्या के प्रयास, आर्थिक अपराध एवं अनुसूचित जनजाति के शोषण पर हस्तक्षेप हेतु राष्ट्रपति से विनम्र निवेदन एक वृद्ध आदिवासी ने किया है। उसने एक हत्या का जिक्र करते हुए खुद की जान पर भी इनसे खतरा बताया है।
पीड़ित कांति कुमार प्रधान, उम्र 62 वर्ष, अनुसूचित जनजाति, निवासी कोरबा, जिला कोरबा, छत्तीसगढ़ ने भारत के संविधान के संरक्षक के रूप में आपके समक्ष अपना जीवन बचाने की अंतिम याचना की है।
1. अपराध का विवरण:
शिकायतकर्ता के मुताबिक वह, “हिंद एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड” CIN-U04010WB2005PLC132889 में वर्ष 2006 से चपरासी था। कंपनी के निदेशक *संजय अग्रवाल, पवन कुमार अग्रवाल, सतीश कुमार अग्रवाल, राजीव अग्रवाल व अन्य 8 निदेशकों ने वर्ष 2006 से 2020 तक उसकी निरक्षरता का लाभ उठाकर धोखे से उसे निदेशक बना दिया एवं उसके नाम पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति खरीद ली।
2. पुलिस द्वारा हत्या का प्रयासः
वर्ष 2020 में आयकर विभाग द्वारा खुलासा होने पर उसने अंकित सिंह के माध्यम से पुलिस को सूचना दी। इसके बाद थाना प्रभारी हरीशचंद्र टंडेकर एवं ASI मनोज मिश्रा ने कंपनी मालिकों से मिलकर “SP का आदेश है” का झूठा बहाना बनाकर बिना वारंट के अंकित सिंह के घर से शिकायकर्ता को जबरदस्ती उठाकर ले जाने व जान से मारने का प्रयास किया। अंकित सिंह ने लड़-झगड़ कर उसकी जान बचाई। यह BNS थारा 109 + SC/ST Act के अंतर्गत हत्या का प्रयास है।
- संवैधानिक तंत्र की विफलता:
आज दिनांक 21/05/2026 तक FIR दर्ज नहीं हुई है। TI व ASI निलंबित नहीं हुए हैं। उसकी जान को खतरा है। यह अनुच्छेद 21, 14, 46 का उल्लंघन है।
4. प्रार्थना: - CBI को FIR दर्ज कर TI हरीशचंद्र टंडेकर, ASI मनोज मिश्रा, तत्कालीन SP कोरबा एवं सभी 12 कंपनी निदेशकों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए जाएं।
- मुझे एवं गवाह अंकित सिंह को CRPF सुरक्षा प्रदान की जाए।
- मेरे नाम की समस्त बेनामी संपत्ति जब्त कर मुझे निर्दोष घोषित किया जाए।
- छत्तीसगढ़ में संवैधानिक तंत्र की विफलता पर अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राज्यपाल से रिपोर्ट मंगाई जाए।
- 14 वर्ष के शोषण एवं हत्या के प्रयास के लिए 5 करोड़ मुआवजा स्वीकृत किया जाए।
पीड़ित ने कहा है कि -महामहिम, मैं 62 वर्ष का असहाय आदिवासी हूं। यदि आपके दरबार से भी न्याय नहीं मिला, तो मेरी मृत्यु की जिम्मेदारी भारत गणराज्य की होगी।
मेरे साथ काम करने वाले एक आदिवासी व्यक्ति स्व. सोहन सिंह पोर्ते को आरोपी कंपनी द्वारा ही मारा गया है और अब मेरी बारी है, कृपया मेरे प्राण की रक्षा हेतु जल्द कदम उठाया जाए। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से आरोपी कंपनी के साथ मिली हुई है। प्रार्थी ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने कार्यवाही नहीं की तो वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
👉🏻 सचिवालय से मुख्य सचिव को
निर्देश जारी
22 मई 2026 को कांति कुमार प्रधान ने राष्ट्रपति, NHRC, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर अनुच्छेद 72 के तहत हस्तक्षेप की मांग की। इस पर 27 मई 2026 को राष्ट्रपति सचिवालय ने मामले को मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ को “उपयुक्त कार्यवाही” हेतु अग्रेषित कर दिया है और कार्रवाई की सूचना सीधे प्रार्थी को देने के निर्देश दिए हैं।
👉🏻 आदिवासी की आवाज दबाई जा रही…!
पीड़ित ने 2 वर्ष पूर्व रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, छत्तीसगढ़ में मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी लेन-देन और फर्जी निदेशक नियुक्ति के सभी दस्तावेजों के साथ शिकायत दी थी। कई बार ई-मेल और रजिस्टर्ड डाक से निवेदन किया, लेकिन ROC ने आज तक न तो जांच शुरू की और न ही कोई जवाब दिया। कंपनी के विरुद्ध आयकर विभाग की कार्यवाही भी लंबित है, जिसकी पुष्टि ITAT की ऑर्डर शीट से होती है। इसके बावजूद ROC की निष्क्रियता से साफ है कि एक गरीब आदिवासी की आवाज को दबाया जा रहा है।




