👉🏻 150 किमी दूर दो जगहों पर एक साथ मौजूदगी का असंभव खेल
👉🏻 सुबह पीजी कॉलेज में पढ़ाई और उसी वक्त बिलाईगढ़ के स्कूल में हाजिरी
👉🏻मूल रजिस्टर से गायब है नाम फिर भी 18 साल से मिल रहा वेतन, चयन समिति की भूमिका पर सवाल
कोरबा। विज्ञान कहता है कि एक इंसान एक ही समय पर दो अलग-अलग जगहों पर नहीं हो सकता लेकिन कोरबा के शिक्षा विभाग में यह चमत्कार पिछले 18 साल से कागजों पर चल रहा है। कोरबा ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोरकोमा में पदस्थ शिक्षिका रामकुमारी साहू पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी हथियाने और सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाने का बेहद संगीन मामला सामने आया है।
आरटीआई कार्यकर्ता और पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू द्वारा कलेक्टर जनदर्शन और सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपे गए सरकारी दस्तावेज इस महाघोटाले की पूरी कहानी बयां कर रहे हैं।
👉🏻कागजों पर जादुई खेल, एक साथ कॉलेज और स्कूल
नियमित पढ़ाई
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, रामकुमारी साहू वर्ष 2004 से 2006 तक शासकीय पी.जी. कॉलेज कोरबा में बी.एससी. की नियमित छात्रा थीं।उसी वक्त नौकरी का दावा इसी समान समयावधि 2003 से 2006 के दौरान उन्होंने कोरबा से 150 किलोमीटर दूर बिलाईगढ़ के धनगांव स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का अनुभव प्रमाण पत्र भी बनवा लिया। इसी फर्जी अनुभव के 12 बोनस अंकों के दम पर उन्होंने 2007 में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की सरकारी नौकरी हासिल कर ली।
👉🏻जांच में खुलासा हुआ है कि बिलाईगढ़ के धनगांव स्कूल की मूल शासकीय उपस्थिति पंजी अटेंडेंस रजिस्टर में रामकुमारी साहू का नाम तक दर्ज नहीं है। आरोप है कि इस जालसाजी को छुपाने के लिए बाद में 20 रुपए के स्टांप पेपर और एक स्थानीय पंचनामे का सहारा लेकर फर्जीवाड़े को सच साबित करने का खेल खेला गया।
योग्य बेरोजगारों के हक पर डाका डालने वाले इस मामले में अब बिलासपुर संभाग से लेकर रायपुर मंत्रालय तक शिकायत दर्ज कराई गई है। अब देखना यह है कि इस वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित धोखाधड़ी पर कोरबा जिला प्रशासन कड़ी कानूनी कार्रवाई करता है या दोषियों को संरक्षण देना जारी रखता है।







