👉🏻 खेत से लेकर तालाब तक राख की चादर, सांस लेना भी दूभर
👉🏻 जीते-जी लोगों की जिंदगी ‘राखमय’, फिर भी जिम्मेदारों की चुप्पी बरकरार
कोरबा। कहते हैं इंसान मरने के बाद राख होता है, लेकिन कोरबा के कई इलाकों में लोग जीते-जी राख में जिंदगी काटने को मजबूर हैं। फ्लाई ऐश का ऐसा जाल फैलता जा रहा है कि सड़क किनारे, खेत, जलस्रोत, गांव और बस्तियां…शायद ही कोई जगह बची हो जहां राख की मार न पहुंची हो। सवाल यह है कि आखिर इस राख के साम्राज्य पर लगाम लगाएगा कौन?
लगातार आरोप लग रहे हैं कि कई स्थानों पर फ्लाई ऐश का मनमाना डंपिंग किया जा रहा है। सड़क किनारे राख उड़ रही है, खेतों में राख की परतें जम रही हैं और तालाबों व नालों तक पर इसका असर दिखाई देने लगा है।
👉🏻 तालाब में भी राखड़ पाट दिए
कई मामले सामने भी लाए गए जिसमें कोरबा व करतला जनपद क्षेत्र के ग्राम बरीडीह में मनरेगा निर्मित व नोनबिर्रा के सरकारी खर्च से विस्तारित डोड़की तालाब को फ्लाई ऐश डालकर पाटने जैसी गतिविधियां हुई हैं, जिससे सरकारी धन के उपयोग और पर्यावरणीय प्रभावों पर सवाल उठे। जांच के बाद इनके दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई/रिकवरी का आज तक अधिकृत तौर पर कुछ भी पता नहीं चल सका है जबकि इस बीच कई कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ बदल गए हैं।
👉🏻 राख का गुबार में सराबोर
सबसे ज्यादा परेशानी उन गांवों और बस्तियों की है जो राखड़ डेम और फ्लाई ऐश परिवहन मार्गों के आसपास बसे हैं। तेज हवा चलने पर राख का गुबार घरों में घुस जाता है। लोग उसी हवा में सांस लेते हैं, उसी धूल के बीच खाना खाते हैं और उसी वातावरण में बच्चों का बचपन बीत रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात हो या गर्मी, राख से राहत नहीं मिलती।
👉🏻 किसानों की भी चिन्ता
किसानों की चिंता भी कम नहीं है। उनका कहना है कि राख खेतों की उर्वरता को प्रभावित कर रही है, जबकि जलस्रोतों में राख पहुंचने से पानी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी रोकथाम नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।
👉🏻 आखिर जिम्मेदारी किसकी..?
सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदारी का है। जनप्रतिनिधियों के आश्वासन समय-समय पर सुनाई देते हैं, लेकिन जमीनी हालात में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आता। प्रशासन की कार्रवाई भी लोगों को पर्याप्त दिखाई नहीं देती। नतीजा यह है कि राख की समस्या हर साल बढ़ती जा रही है और आम आदमी खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
👉🏻 गंभीर चिंता का विषय
कोरबा ऊर्जा उत्पादन के लिए देशभर में जाना जाता है, लेकिन विकास की कीमत यदि लोगों को प्रदूषित हवा, खराब होते खेत, दूषित जलस्रोत और राख से भरी जिंदगी के रूप में चुकानी पड़े, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। जरूरत केवल बैठकों और दावों की नहीं, बल्कि ऐसी ठोस कार्रवाई की है जिससे फ्लाई ऐश का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित हो, अवैध या लापरवाह डंपिंग पर रोक लगे और लोगों को स्वच्छ वातावरण में जीने का अधिकार वास्तव में मिल सके।क्योंकि, सवाल सिर्फ राख का नहीं, लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों का है।







