👉🏻कोरबा में व्यापारियों पर सीधे FIR की बजाय पहले नोटिस और पक्ष रखने का मौका देने निगम आयुक्त को पत्र लिखा
कोरबा। शहर में पौधारोपण और स्वच्छता को लेकर चल रहे अभियान के दौरान पौधा काटने व कचरा फेंकने पर जुर्माना न पटा कर आयुक्त को नेताओं से पहचान बताकर धमकाने के मामले में शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने की एफआईआर के कारण नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों और व्यापारियों के बढ़ते तनाव के मध्य जिला चेम्बर ने अपनी भूमिका निभाई है।
निगम और व्यापारियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका में आए चेम्बर की ओर से महामंत्री नरेंद्र अग्रवाल ने निगम आयुक्त को पत्र भेजकर व्यापारियों के विरुद्ध छोटी-छोटी घटनाओं में सीधे एफआईआर दर्ज किए जाने पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। चेम्बर ने स्पष्ट किया है कि शहर की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता के अभियानों में व्यापारी वर्ग निगम के साथ सहयोग करता आया है और आगे भी करता रहेगा।
👉🏻‘एफआईआर से पहले नोटिस देकर पक्ष सुनें’
आयुक्त को भेजे गए पत्र में चेम्बर ने कहा है कि पिछले कुछ समय से व्यापारियों के विरुद्ध अपेक्षाकृत छोटे-छोटे मामलों में भी नगर निगम द्वारा सीधे एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। इससे व्यापारियों में चिंता और तनाव का वातावरण निर्मित हो रहा है।
चेम्बर ने आयुक्त से आग्रह किया है कि भविष्य में किसी व्यापारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने से पूर्व संबंधित व्यापारी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने तथा हुई त्रुटि को सुधारने का उचित अवसर दिया जाए। चेम्बर का मानना है कि इससे अनावश्यक विवादों से बचा जा सकेगा तथा निगम और व्यापारी वर्ग के बीच सहयोग एवं विश्वास की परंपरा और मजबूत होगी।
👉🏻स्वच्छता अभियान में व्यापारी भी भागीदार
पत्र में चेम्बर ने निगम के स्वच्छता, वृक्षारोपण और जनजागरूकता अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा है कि व्यापारी वर्ग शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने के उद्देश्य से निगम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करता आया है। चेम्बर ने यह भी कहा है कि कोरबा के इतिहास में व्यापारी वर्ग और नगर पालिक निगम के बीच सदैव सौहार्दपूर्ण एवं सहयोगात्मक संबंध रहे हैं तथा किसी प्रकार के टकराव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है।
कानून भी रहे, संवाद भी कायम रहे
👉🏻 संवाद के साथ सुधार पर जोर
चेम्बर का मानना है कि निगम द्वारा शहर की व्यवस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए नियमों का पालन कराया जाना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया में संवाद और सुधार का अवसर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वहीं, दूसरी ओर व्यापारियों द्वारा भी नियमों के पालन और निगम के अभियानों में सहयोग की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए। किसी अधिकारी-कर्मचारी के साथ कथित तौर पर दबाव या राजनीतिक पहचान का इस्तेमाल कर विवाद को बढ़ाने की स्थिति भी व्यवस्था के हित में नहीं है।
ऐसे माहौल में जिला चेम्बर का यह पत्र कार्रवाई रोकने से अधिक कार्रवाई की प्रक्रिया को संवादपूर्ण बनाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। यदि गलती छोटी है तो पहले समझाइश, नोटिस और सुधार का अवसर तथा गंभीर अथवा जानबूझकर किए गए उल्लंघन में नियमानुसार सख्त कार्रवाई, इस संतुलन से निगम और व्यापारियों के बीच टकराव की स्थिति को काफी हद तक टाला जा सकता है। चेम्बर ने पत्र के अंत में उम्मीद जताई है कि निगम आयुक्त उसके अनुरोध पर सकारात्मक एवं सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे।







