👉🏻 मूल निवासी किसान संघ ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
👉🏻 स्थानीय प्रशासन की अनदेखी से बाजार वाले सड़क पर आए
👉🏻दशकों पुराने बाजार की सरकारी जमीन पर बन गए पक्के मकान-दुकान और कॉम्प्लेक्स
कोरबा-कटघोरा। कटघोरा नगर के हृदय स्थल बाजार मोहल्ला में स्थित 6.76 एकड़ बाजार की सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण ने बाजार के दुकानदारों को सड़क पर ला दिया है।
आरोप है कि नगर के कुछ रसूखदारों और प्रभावशाली लोगों ने मिलीभगत कर बाजार की लगभग पूरी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर मकान, दुकान और आलीशान मकान खड़े कर लिए हैं।
👉🏻6.76 एकड़ का है पूरा खेल
राजस्व विभाग के सूत्र बताते हैं कि सरकारी रिकॉर्ड में 6.76 एकड़ जमीन आज भी बाजार / सार्वजनिक उपयोग के नाम पर दर्ज है। यह जमीन कभी साप्ताहिक बाजार, किसानों की उपज बिक्री और आम जनता के उपयोग के लिए आरक्षित थी। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कई वर्षों में टुकड़ों-टुकड़ों में इस जमीन पर कब्जा किया गया। पहले अस्थायी टपरा, फिर दुकानऔर अब पक्के मकान और दो-मंजिला भवन बना लिए गए हैं। वर्षों से इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के बाद भी नगर पंचायत कटघोरा और राजस्व विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करना कई सवाल खड़े करता है। लोगों का आरोप है कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा कब्जा संभव नहीं।
👉🏻किसान और व्यापारी परेशान
बाजार की जमीन पर कब्जा होने से साप्ताहिक बाजार लगाने की जगह नहीं बची है। किसानों को अपनी फसल और सब्जी बेचने के लिए सड़क के किनारे बैठना पड़ रहा है। वहीं छोटे व्यापारी भी जगह के अभाव में परेशान हैं। सड़क पर बाजार लगने के कारण यातायात सहित कई तरह की समस्याएं हर दिन उत्पन्न होती है।
👉🏻 भूमि का सीमांकन कर नियमानुसार कार्रवाई करें : कोर्राम
कटघोरा नगर के बाजार मोहल्ला स्थित लगभग 6.76 एकड़ बाजार / सार्वजनिक उपयोग की भूमि का सीमांकन कर कथित अतिक्रमण की जांच एवं नियमानुसार कार्यवाई किए जाने के संबंध में मूल निवासी किसान संघ छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष लाल बहादुर कोर्राम ने कटघोरा एसडीएम सहित तहसीलदार व नगर पालिका सीएमओ को पत्र लिखा है।
उन्होंने कहा है कि उक्त भूमि का एक बड़ा हिस्सा वर्तमान में विभिन्न व्यक्तियों के कब्जे में होने तथा वहां मकान, दुकान एवं अन्य पक्के निर्माण किए जाने से इस भूमि के वास्तविक स्वामित्व, राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि-स्वरूप तथा वर्तमान उपयोग की निष्पक्ष राजस्व जांच एवं स्थल सीमांकन कराया जाना आवश्यक है।
👉🏻 किसान संघ की प्रमुख मांगें
- 6.76 एकड़ संबंधित भूमि के मूल राजस्व अभिलेखों की जांच कर भूमि का वर्तमान दर्ज स्वरूप एवं स्वामित्व स्पष्ट किया जाए।
- उक्त भूमि का राजस्व विभाग द्वारा तत्काल विधिवत सीमांकन एवं स्थल निरीक्षण कराया जाए।
- सीमांकन के आधार पर भूमि पर वर्तमान में स्थित सभी निर्माण एवं कब्जों का पंचनामा / सूची तैयार की जाए।
- प्रत्येक कब्जाधारी / निर्माणकर्ता के संबंध में यह जांच की जाए कि उसके पास पट्टा, स्वामित्व दस्तावेज, भवन निर्माण अनुमति अथवा अन्य वैध शासकीय अनुमति उपलब्ध है या नहीं।
- जांच में यदि किसी व्यक्ति का अवैध अतिक्रमण प्रमाणित होता है तो संबंधित कानून एवं राजस्व नियमों के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए।
- यदि राजस्व अभिलेखों में किसी प्रकार का अनाधिकृत परिवर्तन, नामांतरण अथवा रिकॉर्ड संबंधी अनियमितता पाई जाती है तो उसकी भी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाय।
- अतिक्रमण की अनुमति अथवा संरक्षण में किसी शासकीय अधिकारी / कर्मचारी की भूमिका जांच में सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
- बाजार / सार्वजनिक उपयोग की भूमि को भविष्य में पुनः अतिक्रमण से बचाने के लिए स्पष्ट सीमांकन एवं आवश्यक सूचना पट्ट लगाया जाए।
- बाजार मोहल्ला में अतिक्रमण की वजह से किसानों के फसल एवं अन्य उत्पाद की खरीदी बिक्री के लिए जगह कम पड़ जाने के कारण कटघोरा शहर में तीन अलग-अलग जगह पर बाजार बैठने और सड़क के किनारे बाजार लगने के कारण दुर्घटनाओं की संभावनाएँ लगातार बनी रहती है, इसलिए किसानों, व्यापारियों, ग्राहकों एवं आम जनता के जानमाल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिक्रमण कि जाँच कर वैधानिक कार्यवाही करने की अत्यंत आवश्यकता है।
- जांच एवं सीमांकन की कार्रवाई की प्रगति से संगठन एवं स्थानीय नागरिकों को लिखित रूप से अवगत कराया जाए।
श्री कोर्राम ने कहा है कि यह मामला सार्वजनिक उपयोग की भूमि, किसानों, छोटे व्यापारियों एवं आम नागरिकों के हितों से जुड़ा हुआ है, किसी भी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध पूर्वाग्रह के बिना निष्पक्ष राजस्व जांच, दस्तावेजों का सत्यापन एवं मौके का सीमांकन कराया जाना आवश्यक है। उपरोक्त मांगों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश प्रदान करने की कृपा करें। यदि निर्धारित अवधि में जांच एवं सीमांकन की कार्रवाई प्रारंभ नहीं होती है, तो मूल निवासी किसान संघ के द्वारा लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आगामी आंदोलन / ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी।





