कोरबा-गेवरा। एसईसीएल गेवरा क्षेत्र द्वारा भू-विस्थापितों की जायज मांगों की अनदेखी और पूर्व में हुए समझौतों पर वादाखिलाफी के विरोध में ग्राम नरईबोध के प्रभावित किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है इस संबंध में अमिला राकेश पटेल पार्षद वार्ड क्र. 29 नरईबोध के नेतृत्व में भू-विस्थापितों की चर्चा-परिचर्चा आयोजित की गई जिसमें प्रबंधन के अड़ियल रवैये के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर एसईसीएल प्रबंधन को अल्टीमेटम नोटिस सौंपा गया है l
प्रबंधन की मनमानी से बढ़ा असंतोष
ग्रामवासियों ने बताया कि दिनांक 17 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन एसईसीएल प्रबंधन एवं ग्रामीणों के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक संदर्भ पत्र क्रमांक 2843 दिनांक 18/04/2026 में कई महत्वपूर्ण सहमतियां बनी थीं लेकिन बड़े ही दुख की बात है कि आज तक प्रबंधन द्वारा उन निर्णयों पर कोई ठोस और सार्थक कार्यवाही नहीं की गई l

पुराने अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद नए अधिकारी अपनी मनमर्जी से नए नियम-कायदे बनाकर नौकरी मुआवजा प्लॉट आवंटन और बसाहट के मामलों को जानबूझकर उलझा रहे हैं इसके कारण प्रभावित किसानों और भूमिहीन परिवारों को अत्यधिक मानसिक आर्थिक और सामाजिक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है ।
ठंडे बस्ते में डाली गई प्रमुख मांगें
- जरहाजेल बसाहट स्थल:- स्थल का त्वरित विकास समतलीकरण प्लॉट का चिह्नांकन एवं आवंटन ।
- रोजगार एवं मुआवजा:- एकमुश्त मुआवजा राशि जारी करना तथा पात्रता सूची का पारदर्शी प्रकाशन ।
- छोटे खातेदार एवं भूमिहीन:- छोटे खातेदारों व भूमिहीन परिवारों को पुनर्वास राशि और नौकरी देने की मांग पर कोई प्रगति नहीं ।
आंदोलन की रूपरेखा, दो चरणों में प्रदर्शन
ग्रामवासियों एवं किसानों ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए दो चरणों में उग्र आंदोलन का ऐलान किया है प्रथम चरण 12 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन घेराव यदि 17/04/2026 के समझौते पर तत्काल लिखित व पारदर्शी कार्यवाही शुरू नहीं होती है तो 12 अक्टूबर 2026 से समस्त ग्रामवासी मुख्य महाप्रबंधक (CGM) कार्यालय गेवरा का अनिश्चितकालीन घेराव एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे द्वितीय चरण गेवरा खदान बंदी प्रथम चरण के बाद भी यदि प्रबंधन कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाता है तो ग्रामवासी विवश होकर गेवरा कोयला खदान का संपूर्ण काम-काज पूरी तरह ठप्प खदान बंद कर देंगे ।
प्रबंधन एवं प्रशासन होगा जिम्मेदार
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि खदान बंद होने तथा आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना कानून-व्यवस्था की स्थिति या वित्तीय नुकसान की संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन एवं स्थानीय प्रशासन की होगी ।





