👉🏻 विभागीय उदासीनता से सरकार को चपत और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
कोरबा/बिलासपुर। कोरबा जिले में डीजल-कोयला और कबाड़ का अवैध कारोबार की तरह ही घातक और खतरनाक केमिकल युक्त बैटरियों के स्क्रैप का अवैध कारोबार असुरक्षित तरीके से, पर्यावरणीय नियमों और अनुमति की अनिवार्यता को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चल रहा है। कोरबा शहर,उपनगरीय इलाकों से लेकर विभिन्न जिलों से होते हुए छत्तीसगढ़ से बाहर किए जा रहे परिवहन का मामला कोरबा में संभवत: पहली बार पकड़ में आया। पहली बार पकड़ा गया यह गंभीर मामला 13 जून से लेकर अब तक कार्रवाई की बाट जोह रहा है।सीएसईबी पुलिस सहायता केंद्र अंतर्गत डीडीएम स्कूल मार्ग में हरिमंगलम के पास राजस्थान पासिंग की एक गाड़ी को पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने सूचना पर पकड़ा। इसमें बिना पर्यावरणीय अनुमति प्राप्त किए, संदेहास्पद जीएसटी बिल के सहारे बैटरियों का स्क्रैप परिवहन करने की तैयारी थी। 13 और 14 जून को शासकीय अवकाश होने के कारण माना जा रहा था कि सोमवार को मामले में कठोर कार्रवाई होगी, लेकिन विभागीय और प्रशासनिक तौर पर किसी भी तरह की अधिकृत सूचना/ कार्रवाई की पुष्टि नहीं की जा सकी है। आज मंगलवार का भी कार्यालयीन समय समाप्त हो चुका है किंतु इस पूरे मामले में विभागीय कार्रवाई का कुछ आता-पता नहीं है।
इस बीच मिली खबरों के मुताबिक बिलासपुर जिले में भी सिरगिट्टी ओवरब्रिज सर्विस सेंटर के बगल में स्थित कबाड़ गोदाम से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा था। कोरबा के रसूखदार कारोबारी अशोक अग्रवाल द्वारा यहां भी संचालित गोदाम में अवैध तरीके से भारी मात्रा में कबाड़ की बैटरियां खरीदी जा रही हैं, जिन्हें बिना किसी सुरक्षा मानक के अवैध रूप से लोड कर हैदराबाद भेजा जा रहा है। इसके खिलाफ पर्यावरण विभाग की टीम ने कार्रवाई की है।
बैटरी के अवैध काले कारोबार में सबसे खतरनाक पहलू यह है कि खरीदी गई इन बैटरियों का तेजाब – युक्त दूषित पानी खुले में कहीं भी फेंक दिया जाता है। रिसाइकलिंग के लिए जा रही बैटरियों से हवा में खतरनाक केमिकल घुल रहे हैं जिससे आसपास के इलाकों में कैंसर, सांस और त्वचा जैसी अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। संवेदनशील कबाड़ और रिसाइकलिंग कार्य के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रायपुर मुख्यालय या बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय से अनिवार्य रूप से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना पड़ता है, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले अवैध काम जारी है।
👉🏻कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को खुला न्यौता
गोदाम में बैटरियों को कबाड़ के भाव खरीदकर उनका केमिकल युक्त पानी खुले मैदानों और नालियों में बहाया जा रहा है। रिसाइकलिंग प्रक्रिया के दौरान हवा में उड़ने वाले घातक टाक्सिक तत्व पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं, जो स्थानीय नागरिकों को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की ओर धकेल रहे हैं।
👉🏻अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
सूत्रों की मानें तो जब्त किए गए माल की मात्रा लगभग 35 टन है, लेकिन मौके पर पहुंची पर्यावरण विभाग की टीम ने मामले को हल्का करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कागजों में इसे महज 15 टन बता रहे हैं। इतनी बड़ी मात्रा में बिना कागजात के केमिकल युक्त माल का परिवहन और विभागीय सांठगांठ के चलते ही शहर के बीचों-बीच यह जानलेवा खेल चल रहा है।
👉🏻अब जीएसटी टीम करेगी टैक्स चोरी और हेराफेरी की जांच
बड़े सिंडिकेट और कागजी हेराफेरी का पर्दाफाश करने के लिए पर्यावरण विभाग ने, पूरे मामले की आगे की सघन कार्रवाई और टैक्स चोरी की कड़ियों को जोड़ने का जिम्मा, जीएसटी विभाग की टीम को सौंप दिया है, जिससे अब अवैध कारोबार के वित्तीय गड़बड़ियों के उजागर होने की संभावना है। देखना है कि कोरबा और बिलासपुर के दोनों मामले में किस स्तर तक खुलासा और कितनी सख्त कार्रवाई संभव हो पाएगी..?





