👉🏻 CMO को पता ही रहता,भूमिपूजन करा लिए जाते हैं,ठेकेदार को नोटिस
👉🏻 शिला पट्टिका में मण्डल अध्यक्ष की महिमा,बाकी दरकिनार
कोरबा-बाँकीमोंगरा। नगर पालिका परिषद बाँकी मोंगरा का गठन और यहां का चुनाव संपन्न होने के बाद से ही राजनीतिक और प्रशासनिक दखल को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा है। कई ऐसे मौके आए हैं जब उनके बीच तालमेल के अभाव ने विषम हालात पैदा किए हैं। यहां काबिज सत्ता और संगठन की आपसी साँठगाँठ से पालिका के कामकाज में बढ़ती दखलअंदाजी ने प्रशासनिक कामकाज की चाल को लड़खड़ा कर रख दिया है। कभी पालिका अध्यक्ष का प्रतिनिधि होने के नाते तो कभी पार्टी का पूर्व पदाधिकारी और कभी मंडल अध्यक्ष की हैसियत से सत्ता और संगठन की दखलअंदाजी ने एक बार फिर नगरपालिका की व्यवस्था को सुर्खियों में ला दिया है।
यह मौका नगर पालिका क्षेत्र के वार्डों में विभिन्न विकास और निर्माण कार्यों का भूमि पूजन को लेकर उत्पन्न हुआ है। दरअसल 7 अक्टूबर और उसके आसपास वार्डों में जो भूमिपूजन के कार्यक्रम संपन्न कराए गए, जिसमें नगर पालिका अध्यक्ष के साथ-साथ उनके पति की बतौर अध्यक्ष प्रतिनिधि तथा पूर्व भाजयुमो प्रदेश कोषाध्यक्ष की हैसियत से और उपस्थित मंडल अध्यक्ष उदय शर्मा की मौजूदगी तो खासतौर पर दिखती है लेकिन नगर पालिका सीएमओ से लेकर प्रशासनिक अधिकारी जैसे इंजीनियर-सब इंजीनियर मौके से गायब मिलते हैं।

मामला यहीं पर पेचीदा और उपेक्षा का हो जाता है, जब सत्ता और संगठन की जुगलबंदी से पालिका की शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी सीएमओ (मुख्य नगर पालिका अधिकारी) ज्योत्स्ना टोप्पो को इन कार्यक्रमों की भनक तक नहीं लगती। बताए अनुसार ना तो उनकी जानकारी में कोई शेड्यूल तय हुआ और ना ही उन्हें ऐसे कार्यक्रम की जानकारी दी गई। उनकी जानकारी के बगैर ही भूमि पूजन का कार्यक्रम संपन्न हो जाता है, ना तो इंजीनियर को पता रहता है और ना ही अधिकारी को।
👉🏻 ठेकेदार को नोटिस दिया है
सत्यसंवाद से चर्चा के वक्त इस बात पर पालिका सीएमओ ज्योत्स्ना टोप्पो भी काफी हैरत में रहीं। उन्होंने 7 अक्टूबर वर्किंग-डे में हुए भूमि पूजन के कार्यक्रम के शेड्यूल से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें कुछ भी नहीं बताया गया और ना ही उनकी जानकारी में कुछ हुआ है और न ही वे उपस्थित रहीं। सीएमओ ने यह भी बताया कि लेखन के संबंध में भी उन्हें कोई जानकारी नहीं है और ना ही उनसे पूछ कर नाम डाले जा रहे हैं। उनकी जानकारी बिना कार्यक्रम को लेकर उनके द्वारा ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है।
🫵🏻 शिलापट्ट में पार्षद नीचे, एल्डरमैन गायब

इसी तरह भूमिपूजन-लोकार्पण कार्यक्रमों की शिला पट्टिकाओं को लेकर भी विवाद गहराया है। शिलापट्टिका में ऊपर के प्रोटोकॉल तक तो सब ठीक है लेकिन जब निर्माण समिति अध्यक्ष के बाद निर्वाचित पार्षद के नाम की बारी आती है तो कई पट्टिका में वहां राजनीतिक दल भाजपा के मंडल अध्यक्ष उदय शर्मा को तवज्जो मिलती है और उसके बाद वार्ड के निर्वाचित पार्षद का नाम लिखा जाता है। बाँकीमोगरा नगर पालिका क्षेत्र में चार एल्डरमैन शासन ने मनोनीत किए हैं जिनमें से एक गेवरा बस्ती से तो तीन का वास्ता बाँकीमोगरा क्षेत्र से है। बाँकीमोगरा व उसके आसपास के वार्डों में एल्डरमैन जितेंद्र सिंह, राखी अग्रवाल, निराकार नाहक की शिला पट्टिकाओं में उपेक्षा लगातार बनी हुई है। गेवराबस्ती क्षेत्र की शिलापट्टी में एल्डरमैन श्री यादव उपेक्षित किया जा रहे हैं। बाँकीमोंगरा में स्थानीय सत्ता और संगठन की जुगलबंदी ने जहां पार्टीगत गुटबाजी को हवा दी है वहीं अब प्रशासनिक कार्य क्षमताओं में दखलअंदाजी करना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
👉🏻 आंतरिक कलह बढ़ने के आसार
प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन में सत्ता और संगठन को आपसी समन्वय स्थापित करने – कराने की भूमिका में होना चाहिए तीनों का समन्वय बेहतर हो तो कार्य भी सुचारू रूप से संपन्न होते हैं लेकिन जिस तरह के हालात बाकी मोगरा पालिका में सत्ता और संगठन ने मिलकर निर्मित किए हैं,उससे प्रशासनिक टकराव लाजमी क्षेत्र के राजनीतिक जानकार और विश्लेषक ऐसी प्रवृत्ति को अनुचित ठहरा रहे हैं। इनका मानना है कि समय रहते इस तरह की परंपरा को यदि नहीं रोका गया तो आने वाले समय में आंतरिक कलह बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वैसे, यह भी संगठन के तौर पर चर्चा का विषय रहा है कि जिला पदाधिकारियों के द्वारा भी बाँकीमोंगरा क्षेत्र में हो रही अवांछित और अकल्पनीय राजनीतिक गतिरोधों को दूर करने में रुचि नहीं दिखाई जा रही बल्कि गुट विशेष का अप्रत्यक्ष सहयोग किया जा रहा है।





