👉🏻कोरबा सहित पूरे प्रदेश के स्कूलों में ‘सेवा संकल्प अभियान’, 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक अलग-अलग कार्यक्रम
कोरबा। स्कूलों में पढ़ाई के बीच अब एक महीने तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलेगा। जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा की ओर से 11 सितंबर 2026 को जारी पत्र में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक स्कूलों में अलग-अलग कार्यक्रम कराने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में साफ है कि यह कार्यक्रम प्रदेश के स्कूलों में अलग-अलग स्तर पर आयोजित किए जाएंगे।
इसमें 17 सितंबर को दीप प्रज्ज्वलन, 18 सितंबर को ड्राइंग प्रतियोगिता, 19 सितंबर को ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिता सहित विकासखंड और जिला स्तर पर भी कई कार्यक्रम रखे गए हैं। 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक ‘नमो सेवा गाथा’ पर नुक्कड़ नाटक भी कराया जाना है। इसके अलावा स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, नशा मुक्ति, नया कश्मीर और नक्सलवाद जैसे विषयों पर भी प्रतियोगिताएं होंगी।
अब सवाल ‘नमो सेवा गाथा’ को लेकर है। स्कूल के बच्चे आखिर किस चीज पर ज्यादा फोकस करेंगे? पढ़ाई पर या सेवा गाथा लिखने और नुक्कड़ नाटक में उसका मंचन करने पर? एक महीने तक जब स्कूलों में अलग-अलग प्रतियोगिताएं और कार्यक्रम होंगे तो जाहिर है, बच्चों और शिक्षकों को इसकी तैयारी में समय देना ही पड़ेगा।
और यहीं से कटाक्ष के साथ सवाल भी निकलता है कि-
‘नमो सेवा गाथा’ लिखवाने/नुक्कड़ नाटक का काम आखिर स्कूली बच्चों से ही क्यों? अगर सेवा की गाथा लिखनी ही है, तो भाजपा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच प्रतियोगिता करा दी जाए। वे बताएं कि उन्होंने अपने क्षेत्र में क्या-क्या सेवा कार्य किए हैं। कौन कितना समय जनता के बीच रहा, कितने काम किए और कितनी सेवा की—नमो सेवा की गाथा भी उन्हीं से लिखवा ली जाए।
बच्चों से ‘नमो सेवा गाथा’ लिखवाने के बजाय नेताओं और कार्यकर्ताओं से विषयों पर निबंध और सेवा गाथा लिखवा ली जाए तो शायद ज्यादा मजा आए। इससे यह भी पता चल जाएगा कि सेवा सिर्फ भाषणों और कार्यक्रमों में है या जमीन पर भी।
इस पत्र के साथ विभागीय व राजनीतिक गलियारे में भी चर्चा है कि स्कूल के बच्चों के सामने लिखने के लिए विषयों की कोई कमी नहीं है। विज्ञान, पर्यावरण, संविधान, शिक्षा, स्वच्छता, जल संरक्षण, नशामुक्ति, स्थानीय समस्याएं और देश का भविष्य जैसे कितने ही विषय हैं, जिन पर बच्चे सोच सकते हैं, लिख सकते हैं और अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं।
लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ‘नमो सेवा गाथा’ लिखने और उसका मंचन करने के लिए लगाना निश्चित तौर पर चर्चा का विषय है।
सेवा का संकल्प लेना है तो जिनके नाम से सेवा की राजनीति होती है, पहले उन्हीं भाजपा नेताओं की परीक्षा ले लीजिए। लोग कह रहे हैं कि बच्चों को पढ़ने दीजिए साहब… उनकी कॉपी में भविष्य लिखने दीजिए, किसी की सेवा गाथा नहीं।




