कोरबा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस के उपलक्ष में राज्य सरकार द्वारा सेवा संकल्प अभियान के तहत विविध कार्यक्रमों का आयोजन अभियान के रूप में कराया जा रहा है। इसके माध्यम से लोगों की खासकर जरूरतमंदों की सेवा करने का संकल्प लेना शामिल है। विभिन्न विभागों में इसे मूर्त रूप दिया जा रहा है जिसमें शिक्षा विभाग भी शामिल है। शिक्षा विभाग के द्वारा कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में शिक्षा रथ भी गुरुवार को जिला मुख्यालय सहित सभी विकासखंड शिक्षा मुख्यालय में से भी रवाना किया गया। इसके तहत शिक्षा रथ घूम-घूम कर लोगों से पुस्तकों का दान प्राप्त करेगा। दानदाताओं से प्राप्त पुस्तक जरूरतमंदों को प्रदान की जाएगी। यह एक अच्छा अभियान है जिसकी सराहना भी हो रही है।
दूसरी तरफ जिला शिक्षा अधिकारी टीपी उपाध्याय एक बार फिर “अभियान के नाम पर वसूली” को लेकर चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, संकुल केंद्रों में उनका वह फरमान बड़ी तेजी से घूम रहा है जिसमें उनके द्वारा शिक्षा दान के रूप में संस्था के शिक्षकों से 200 रुपये लेने का निर्देश जारी किया गया है। हालांकि यह निर्देश मौखिक है, लेकिन सोशल मीडिया में इसे दूसरे शिक्षकों तक पहुंचाने के लिए जो रास्ता अपनाया गया है,उसने वसूली अभियान को पुष्ट कर दिया है। संकुल केंद्र के शिक्षकों के लिए जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी फरमान का एक ऐसा ही मैसेज हम तक भी पहुंचा जो संकुल केंद्र नुनेरा विकासखंड पाली का है। इस तरह का निर्देश जिले के सभी विकासखण्ड के संकुल प्रभारी के लिए जारी किये जाने की अभी पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन नुनेरा संकुल की पुष्टि वायरल मैसेज से होती है।
शिक्षा दान के रूप में नगदी रकम की वसूली को शिक्षकों ने सही नहीं ठहराया है। इनका मानना है कि जिला शिक्षा विभाग को यदि स्वयं से किसी नगदी रकम की व्यवस्था करनी है तो वह स्वयं सक्षम है, डीएमएफ का भारी-भरकम मद भी कोरबा जिले को प्राप्त होता है, आकांक्षी जिला भी है, इसलिए कोरबा पर विशेष कृपा रहती है। ऐसे में किसी अभियान के नाम पर उसे शिक्षा दान से जोड़कर 200- 200 रुपए की मांग करना किसी भी सूरत में उचित नहीं कहा जा सकता। लोग इसे शिक्षा दान की आड़ में वसूली अभियान के रूप में जोड़कर देख रहे हैं। इस माध्यम से अभियान के बहाने लाखों रुपए की वसूली की योजना बताई जा रही है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि जिला शिक्षा अधिकारी इस अभियान का विरोध करने वालों को टारगेट में ले सकते हैं, उनके ऊपर विभागीय चाबुक भी चला सकते हैं क्योंकि कई मामलों में ऐसा होता आया है। जिन्होंने उनके निर्देश अथवा किसी मामले में अवहेलना की है, तो वह किसी न किसी तरह से विभागीय दंड का भागी बना है जिसमें युक्तियुक्तकरण जैसा दंश भी शामिल है।





