👉🏻 ठेकेदारों ने कलेक्टर से लगाई गुहार, निगम आयुक्त को भेजा अंतिम नोटिस
👉🏻बिना कारण बताए दो बड़ी निविदाएं खारिज करने का आरोप, ई-टेंडरिंग प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
कोरबा। नगर पालिक निगम, कोरबा की करोड़ों रुपये की दो महत्वपूर्ण निविदाओं को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। टेण्डर में भाग लेने वाले ठेकेदारों ने नगर निगम प्रशासन पर बिना कारण बताए उनकी निविदाएं निरस्त करने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को शिकायत भेजी है। वहीं निगम आयुक्त को भी अंतिम पत्र लिखकर बिड रिजेक्ट किए जाने के कारणों की जानकारी मांगी गई है।
ठेकेदारों ने कलेक्टर को भेजे गए विस्तृत आवेदन में कहा है कि उनकी फर्म ने नगर निगम द्वारा जारी गौरव पथ फोर लेन बी.टी. रोड निर्माण कार्य (टेंडर सिस्टम नं. 188571, द्वितीय कॉल) तथा बाल्को कूलिंग टावर से ढेंगुरनाला तक आरसीसी नाला निर्माण कार्य (टेंडर सिस्टम नं. 187511) में भाग लिया था। लेकिन दोनों निविदाओं को बिना किसी पूर्व सूचना, स्पष्टीकरण अथवा कारण बताए निरस्त कर दिया गया।
👉🏻दो बार पत्र, फिर भी नहीं मिला जवाब
आवेदकों के अनुसार उन्होंने 2 जून एवं 3 जून 2026 को निगम आयुक्त को अलग-अलग पत्र लिखकर बिड की स्थिति तथा निरस्तीकरण के कारण पूछे थे। इसके बावजूद निगम प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। ठेकेदारों का कहना है कि ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए। किसी भी बोलीदाता की निविदा को खारिज करने पर उसके कारणों की जानकारी देना विभाग का दायित्व है।
👉🏻फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद भी नहीं दिखी जानकारी
शिकायत में एक और गंभीर मुद्दा उठाया गया है। ठेकेदारों का दावा है कि गौरव पथ फोर लेन सड़क निर्माण कार्य की फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद भी ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर योग्य बोलीदाताओं तथा एल-1 (L-1) ठेकेदार की जानकारी प्रदर्शित नहीं हो रही है।
आमतौर पर वित्तीय निविदा खुलने के बाद संबंधित जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध हो जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं होने से प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह पैदा हो रहा है।
👉🏻 निष्पक्ष जांच की मांग
अपने आवेदन में ठेकेदारों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा टेंडर मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि उनकी निविदाओं को किन आधारों पर गैर-उत्तरदायी (Non-Responsive) घोषित किया गया, इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
👉🏻निगम आयुक्त को अंतिम चेतावनी
इधर निगम आयुक्त को भेजे गए ताजा पत्र में ने इसे “स्पष्टीकरण के लिए अंतिम अनुरोध” बताया गया है। उन्होंने कहा है कि ऑनलाइन पोर्टल पर उनकी बिड को “रिजेक्टेड” दिखाया जा रहा है, लेकिन कारणों का कहीं उल्लेख नहीं है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वे कानूनी उपाय अपनाने के साथ ही मामले को सक्षम अधिकारियों के समक्ष उठाने के लिए बाध्य होंगे।
👉🏻 ठेकेदारों ने उठाए ये प्रमुख सवाल
🫵🏻 दो निविदाओं को किस आधार पर रिजेक्ट किया गया?
🫵🏻 रिजेक्शन से पहले कोई सूचना या स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया गया?
🫵🏻 फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद भी एल-1 और योग्य बोलीदाताओं की जानकारी पोर्टल पर क्यों नहीं दिखाई गई?
🫵🏻 क्या टेंडर मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हुई?
🫵🏻 बार-बार पत्राचार के बावजूद निगम प्रशासन ने जवाब क्यों नहीं दिया?
यह भी गम्भीर आरोप है कि चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए उसकी टेण्डर में दर्ज गम्भीर गलतियों को भी नजरअंदाज कर दिया गया है, जो उसके निविदा प्रपत्र को निरस्त करने का कारण हो सकता था। अब निगाहें नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की जांच होती है तो यह मामला नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़ा मुद्दा बन सकता है।





