कोरबा। दुष्कर्म के एक मामले में केस कमजोर करने के लिए विवेचना के दौरान आरोपी को लाभ पहुंचाने की मंशा से कार्य करना विवेचक को महंगा पड़ गया। पीड़ित पक्ष द्वारा दिए गए सबूत को जांच में संलग्न नहीं करने और लगातार फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पीड़ित से ही सौदेबाजी कर रुपए की मांग करने वाली विवेचक एएसआई को एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने निलंबित कर दिया है।
मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। पीड़िता ने आरोपी प्रवीण डहरिया के विरुद्ध शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और फिर शादी करने से इनकार कर फरार हो जाने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई है। अपराध दर्ज कर प्रकरण न्यायालय में विचारण हेतु प्रस्तुत किया जा चुका है। मामले की विवेचना के दौरान पीड़िता ने विवेचक एएसआई अनीता खेस को आरोपी के विरुद्ध कई प्रमाण, डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध कराए थे लेकिन विवेचक ने ऐसे महत्वपूर्ण सबूतो को नजरअंदाज कर दिया और जांच प्रतिवेदन में संलग्न नहीं किया। जब पीड़िता ने इस विषय में एएसआई से जानना चाहा तो उसे गाली देकर भगा दिया गया और दुर्व्यवहार किया गया। इतना ही नहीं फरार आरोपी की गिरफ्तारी की बात करने पर गिरफ्तार करने के एवज में 20000 की मांग पीड़िता से ही की गई। पीड़िता ने इस मामले की शिकायत जिला पुलिस अधीक्षक से की। एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने इसे गंभीरता से लिया। इस तरह के कृत्य को कदाचरण, स्वेच्छाचरिता करार देते हुए एएसआई अनिता खेस को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर निलंबन अवधि में रक्षित केंद्र मुख्यालय नियत किया गया है।

बताते चलें कि ऐसे कई अन्य तरह के भी मामले हैं जिनमें विवेचना के दौरान महत्वपूर्ण कड़ियों को छोड़कर कहीं ना कहीं आरोपी पक्ष को लाभ पहुंचाने का काम किया जाता है। विवेचना के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को नजर अंदाज/अनसुना करने के कारण पर्याप्त सबूत के अभाव में आरोपी न्यायालय से दोष मुक्त हो जाते हैं, उनकी सजा कम हो जाती है। इस तरह के मामलों में जबकि पीड़ित पक्ष को विवेचना के दौरान कुछ भी गड़बड़ियां लगे तो उन्हें मुखर होकर अपनी बात उच्च अधिकारियों के समक्ष रखने की आवश्यकता है ताकि दोषियों को न्यायालय से सबूत के अभाव में दोषमुक्ति का लाभ न मिल पाए।




