👉🏻 कलेक्टर-सीईओ की सख्ती के आगे दाल नहीं गली संरक्षणकर्ता और दलालों की
कोरबा। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी, अति महत्वपूर्ण योजना में गरीबों के आवास पर डाका डालने और अपात्र लोगों सहित दिवंगत हो चुके लोगों के नाम पर आवास स्वीकृत कर राशि डकारने वालों पर आखिरकार कलेक्टर कुणाल दुदावत और जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन का शिकंजा कस ही गया।
जिला सीईओ प्रतीक जैन की पदस्थापना के बाद से ही यह माना जा रहा था कि वे अपने पूरे तेवर में कार्य करते हुए भ्रष्ट कार्य करने वालों पर शिकंजा कसेंगे। जिला सीईओ के द्वारा आवास घोटाला के संबंध में कराई गई जांच और इस जांच के आधार पर दर्ज कराई गई एफआईआर की चर्चा पूरे जिले भर में है। इस तरह की जांच और सख्त कार्रवाई के निर्णय को चौतरफा सराहना भी मिल रही है। CEO प्रतीक जैन के इस सख्त तेवर और भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कार्रवाई को देखते हुए उन लोगों के होश उड़ गए हैं जो अपने भ्रष्ट कारनामों का घड़ा भर चुके हैं। इसमें कुछ संदेह नहीं कि पुराने ऐसे मामले जिनकी फाइलों पर धूल की परत जमती जा रही है और अधीनस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों के द्वारा सांठगांठ पूर्वक इन फाइलों को जांच से दूर रखा गया है, कुछ फाइलें खुल सकती है। इनके जांच का दायरा बढ़ सकता है। इनमें मनरेगा व अन्य योजना से निर्मित तालाबों को पाटे जाने का मामला प्रमुख है।
👉🏻जिला स्तरीय टीम ने की जांच
आरटीआई कार्यकर्ता जितेन्द्र साहू की इस मामले में की गई शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन ने मामले की जांच के लिए जिला स्तरीय जांच दल का गठन किया था। जांच के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के क्रियान्वयन से जुड़े कई अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की जांच की गई। जांच प्रतिवेदन में ब्लॉक समन्वयक आवास, तकनीकी सहायक, डाटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर ऑपरेटर और आवास मित्र की भूमिका पाए जाने का उल्लेख किया गया। इसके बाद संबंधितों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। प्राप्त जवाबों का परीक्षण करने के बाद उन्हें संतोषजनक नहीं पाए जाने पर पांचों संविदा अधिकारी- कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई की गई। इस मामले में ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव के खिलाफ भी कार्रवाई की जा चुकी है। उन्हें पूर्व में ही निलंबित किया जा चुका है और उनके विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित की गई है।
👉🏻 दर्ज की गई एफआईआर
फिलहाल, बहुचर्चित मामले में एफआईआर हुई है। जिला पंचायत कोरबा में जिला समन्वयक प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण (PMAY- G) आशीष कुमार पिता बंशी लाल 32 वर्ष ने रिपोर्ट दर्ज कराया है कि दिनांक 14/02/2026 से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत ग्राम पंचायत तिलकेजा में 48 अपात्र हितग्राहियों का आवास, अन्य परिवार एवं मृतक के नाम पर किश्त की राशि जारी करने व राशि आहरण कर भ्रष्टाचार किया गया। कार्यालय जिला पंचायत का पत्र क्रं/1/388661/2026/शिका/कोरबा दिनांक 28.09.2026 का हवाला देते हुए आशीष कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत ग्राम पंचायत तिलकेजा में 48 अपात्र हितग्राहियों का आवास, अन्य परिवार एवं मृतक के नाम पर किश्त की राशि जारी करने व राशि आहरण कर भ्रष्टाचार किये जाने के संबंध में शिकायत प्राप्त हई है। जिसकी जांच हेतु गठित जिला स्तरीय जांच समिति द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर देवानंद श्रीवास (विकासखण्ड समन्वयक), अभिषेक चौरसिया (तकनीकी सहायक), ध्रुव कुमार साहू (डाटा एंट्री ऑपरेटर), धनंजय पटेल (कम्प्यूटर ऑपरेटर) जनपद पंचायत-कोरबा एवं सुश्री रामेश्वरी कँवर (आवास मित्र) व श्रीमती नमीता दुबे (पंचायत सचिव) के विरुद्ध गलत मंशे से असंबंद्ध व्यक्तियों के खातें में राशि हस्तांतरण करने का आरोप सिद्ध पाया गया है। इनके सहित व अन्य के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के आवेदन उपरांत अपराध क्रमांक
0536/26 पर इनके सहित अन्य पर धारा 3(5), 316(5), 318(4)-BNS का जुर्म दर्ज कर विवेचना की जा रही है।





