कोरबा। ऊर्जा की नगरी कोरबा में रंगों का पर्व होली धूमधाम से मनाया जा रहा है। रंगों की बौछार के साथ राजनीति के रंग भी लोगों को सराबोर कर रहे हैं। इन दिनों शहर में होली से ज्यादा चर्चा होली मिलन समारोह को लेकर चारों तरफ व्याप्त है।
निःसंदेह त्योहारों का अवसर राजनीतिज्ञों के लिए जन जुड़ाव का एक बेहतर माध्यम होता है जब वह इसी बहाने लोगों से मेल मिलाप को और प्रगाढ़ करते हैं। छत्तीसगढ़ के पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने अपने चिर परिचित अंदाज में होली मिलन समारोह का आयोजन नए निवास स्वर्ण सिटी में रखा है तो वहीं कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन भी अपने निवास पर कोहड़िया में होली में समारोह में लोगों से मेल मुलाकात कर रहे हैं। पूर्व महापौर जोगेश लांबा का होली मिलन समारोह और नए साल के अवसर पर झोरा घाट में पिकनिक पूर्व से प्रचलित है। अब इसमें नया तड़का महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत और भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी ने लगाया है। भाजपा जिला अध्यक्ष के तौर पर यह किसी अध्यक्ष का पहला होली मिलन समारोह है जो उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर आयोजित किया है। इसी तरह महापौर के तौर पर भी होली मिलन का आयोजन नई परंपरा को जन्म देने वाला है। कैबिनेट मंत्री, महापौर और भाजपा अध्यक्ष का होली मिलन समारोह इसलिए चर्चा में है कि यह तीनों ही एक ही दल से वास्ता रखते हैं और पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए जोर-शोर से काम कर रहे हैं लेकिन बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने एक साथ होने वाले कार्यक्रम को तीन अलग-अलग मंच पर ला दिया है।
इस तरह आयोजन को लेकर चर्चा तेज है कि क्या भीतर ही भीतर गुटबाजी हिलोरें मार रही हैं जो समय-असमय सतह पर नजर आ जाती है। आखिर होली मिलन का यह कार्यक्रम एक ही मंच पर क्यों नहीं हो सकता था? जानकार लोग इसे आगामी चुनाव से भी जोड़कर देखने लगे हैं क्योंकि विधानसभा लड़ने के लिए तैयारी और दावेदारी के भी चर्च तेज होने लगे हैं। राजनीतिक चर्चा है गोपाल मोदी अगला महापौर बनने के हिसाब से काम कर रहे तो विधायकी के भी ख्वाब बुन रहे हैं। महापौर भी परिसीमन के बाद नई गठित होने वाली विधानसभा की तैयारी के मध्य अपनी जमीन मजबूती से तैयार कर रही हैं और उन पर पार्टी की निगाह भी है। कोई बड़ी बात नहीं कि मंत्री लखन लाल देवांगन अगला सांसद चुनाव लड़ लें। ऐसे में यह बात उठना लाजिमी है कि होली मिलन के बहाने सही, यह एक तरह का शक्ति प्रदर्शन ही है। इस शक्ति प्रदर्शन में भाजपा के कार्यकर्ता और सदस्यगण शहर से लेकर और कोहड़िया तक चक्कर लगा रहे हैं। आखिर उन्हें भी तो इन चारों की नजर में खुद को दिखाना है। भाजपा के सदस्य और कार्यकर्ता सहित समर्थक, ठेकेदार, अधिकारी चकरघिन्नी की तरह अपने परिवार संग होली छोड़कर इनके इर्द-गिर्द नजर आ रहे हैं। अंत में बड़ा सवाल- होली मिलन का खर्च निजी होगा या अप्रत्यक्ष तौर पर सरकारी…?(बुरा न मानो, होली है)
KORBA:रंगों में रंगी राजनीति…गुटबाजी या विधायकी की तैयारी…!




