👉🏻 कभी सोचा नहीं था परिवार ने,वो कर दिया पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने
कोरबा। कोरबा की धरती पर पहली बार कदम रखने वाले बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का कुछ ही पल के लिए सही हर कोई सानिध्य पाने के लिए तत्पर दिखा। कथा स्थल हो या उनके विश्राम स्थल अग्रसेन भवन कटघोरा में, लोगों की एक ही इच्छा रही कि किसी तरह से बाबा को नजदीक से देख लें। उनके चरण छू लें, उनसे दो बातें कर लें, बाबा उनके सिर पर अपना हाथ रख दें….।
कुछ ऐसी ही लालसा कथा स्थल ग्राम ढपढप की एक वृद्ध महिला की भी थी। रास्ते से गुजरते वक्त बाबा की नजर घर के दरवाजे पर इस वृद्धा पर पड़ी तो उन्होंने उनके घर आकर चाय पीने का वादा किया। कथा आयोजन के चौथे दिन जब दोपहर 1 बजे कथा प्रारंभ करने का उन्होंने ऐलान किया तो उसे दिन वे करीब आधे घंटे देर से पहुंचे। इसके पहले उन्होंने उक्त वृद्ध महिला के घर पर दस्तक दी। बाबा का काफिला जब इस महिला के घर के सामने रुका तो गांव वाले उमड़ पड़े। वृद्ध महिला के परिजनों को इस बात का तनिक भी आभास न था कि बाबा उनके घर आएंगे, लेकिन वृद्ध दादी को यह जरूर भरोसा था कि बाबा ने कहा है तो उसके घर जरूर आएंगे।
बड़ी ही आत्मीयता के साथ पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दादी के घर जाकर, उनकी खाट पर बैठकर पूरे परिवार के साथ आत्मीयता से चर्चा की। हंसी-ठहाके के बीच उनके साथ फोटो खिंचवाई और बागेश्वर धाम आने का न्योता भी दिया। बाबा ने यहां चाय भी पी।

दादी का पूरा परिवार गदगद नजर आया। बाबा ने ऊंच-नीच, भेदभाव, जाति-पाति से परे हट कर सबको एक समान आदर प्रदान किया जिससे यह परिवार अपने आप को धन्य मान रहा है।






