0 अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का आश्वासन,दो घण्टे बाद सड़क से हटे
कोरबा-छुरीकला। नगर पंचायत क्षेत्र में आदिवासी बच्चों को अच्छी शिक्षा देने हेतु एकलव्य आवासीय विद्यालय का संचालन किया जा रहा है परंतु विघालय में पदस्थ प्राचार्य डॉ अहमद खान और छात्रावास अधीक्षक द्वारा आदिवासी बालक-बालिकाओं को, आदिवासी समाज को गाली देने एवं शोषण करने का मामला गंभीर हो गया है। छात्र-छात्रा यहाँ पदस्थ प्राचार्य और अधीक्षक को हटाने की मांग को लेकर शनिवार को सुबह मुख्य सड़क पर धरने पर बैठे रहे जिससे मुख्य सड़क पर दो घंटे आवागमन बाधित रहा। एसडीएम कटघोरा , तहसीलदार और कटघोरा थाना प्रभारी द्वारा समझाईश व लिखित में आश्वासन दिए जाने के बाद धरना प्रदर्शन समाप्त किया गया। शिकायत पर कटघोरा एसडीएम द्वारा जांच शुरू कर दी गई है।
आदिवासी अंचल क्षेत्र के बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु शासन द्वारा एकलव्य आवासीय विद्यालय का संचालन किया जा रहा है, जहां अन्य राज्य के प्राचार्य सहित शिक्षकों की नियुक्ति की गई है जिनके द्वारा आदिवासी बच्चों का शोषण किया जा रहा है , बच्चों को आदिवासी कहकर उन्हें अपमानित किया जा रहा है। बताया जाता है कि पदस्थ प्राचार्य डॉ. अहमद खान और अधीक्षक जब से पदस्थ हुए हैं, तब से बच्चों को मेन्यू के हिसाब से भोजन नहीं दिया जा रहा है। नास्ते में एक्सपायरी बिस्किट, दूध और दवाई दिया जाता है। जो सुविधा बच्चों को मिलनी चाहिए वह सुविधा नहीं मिल पा रही है। 27 जूलाई को एक कार्यक्रम में शामिल होने आए विधायक प्रेमचंद पटेल के गाड़ी को रोककर उक्त प्राचार्य और अधीक्षक के खिलाफ शिकायत की गई थी। उसके उपरान्त भी प्राचार्य और अधीक्षक अपने कार्य शैली में बदलाव नहीं लाये और छात्र-छात्राओं को अपमानित व प्रताड़ित करते रहे । त्रस्त सभी बच्चे अपनी मांगों को लेकर शनिवार सुबह 7 बजे कोरबा-कटघोरा मुख्य सड़क पर धरने पर बैठे रहे। दो घंटे चले धरना प्रदर्शन स्थल पर कटघोरा एसडीएम और तहसीलदार पहुंच कर बच्चों को समझाइश देते रहे परंतु बच्चे जिला कलेक्टर से बात करने पर अडे रहे। इस दौरान लगभग दो घंटे तक मुख्य सड़क से आवागमन बाधित रहा। छोटे-बड़े गाड़ियों की लंबी लाइन लगी रही। इस संबंध में बच्चों ने बताया-कि विद्यालय की सारी व्यवस्था बिगड़ गई है। शुद्ध पेयजल व्यवस्था नहीं की जा रही है। गंदा पानी पिलाया जा रहा है, शौचालय की सफाई नहीं की जाती, भोजन की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। बच्चों ने कहां जब तक प्राचार्य और अधिक्षक को नहीं हटाया जाता, प्रदर्शन जारी रहेगा।
दूसरी तरफ, नगर के जनप्रतिनिधियों का कहना है पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों की पूछ परख नहीं किया जाता जिससे नगर के जनप्रतिनिधियों द्वारा भी उक्त प्राचार्य के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तत्काल प्राचार्य को हटाने की मांग उठने लगी है। अगर प्राचार्य को नहीं हटाया गया तो जनप्रतिनिधियों द्वारा जन आंदोलन किए जाने की बात उठने लगी है। बच्चों के भोजन सामग्री जिस दुकान से खरीदा जा रहा है, उक्त दुकन की सामग्री की जांच की जाये। संचालन व्यवस्था सुचारू बनाने हेतु शिक्षा समिति का गठन किया गया है जिसमें नगर के एक भी नगरवासी को समिति में स्थान नहीं दिया गया है। इसी तरह सांसद प्रतिनिधि भी सामान्य वर्ग से बनाया गया है जबकि आदिवासी आवासीय विद्यालय होने से आदिवासी महिला को प्राथमिकता देते हुए मौका देना था परंतु कांग्रेस नेता भी अपने चिर परिचित को आदिवासी विद्यालय का सांसद प्रतिनिधि बना दिए जो पद का निर्वाह नहीं कर पा रहे हैं । इस संबंध में नगर के जनप्रतिनिधियों ने कहा उक्त प्राचार्य को यहां से हटाया नहीं गया तो शिक्षा विभाग के खिलाफ जन आंदोलन किया जाएगा। इस संबंध में आदिवासी भाजपा नेता कुंवर राजवर्धन प्रताप सिंह ने कहा कि आदिवासी बच्चों के साथ प्राचार्य द्वारा शोषण किया जाना सबसे बड़ी विडंबना है। ऐसे प्राचार्य के उपर कड़ी कार्यवाही कर तत्काल हटा देना चाहिए । आदिवासी नेत्री भुवनेश्वरी सिंह ने कहा कि राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के उपरांत आदिवासी छात्र-छात्राओं को प्राचार्य द्वारा प्रताड़ित करना बड़ी दुर्भाग्य की बात है। ऐसे प्राचार्य को हटाने के बजाए निलंबित किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ प्राचार्य ने सभी आरोपों को खारिज किया है।




