👉🏻 चोरों से कौन खरीद रहा कॉपर-एल्युमिनियम,मुखबिरों को भी पता नहीं,पुलिस बेबस
👉🏻अवैध कबाड़ियों के लिए नाबालिग व नशेड़ी काम कर रहे
👉🏻 नशे के सौदागरों, खासकर बोनफिक्स जैसा नशा बेचने वालों पर नहीं कार्रवाई
कोरबा। कोरबा जिले में व्यापारी सुरक्षित कारोबार करने में अब अपने आप को असहाय महसूस करने लगे हैं। एक तरफ तरह-तरह के टैक्स की मार वह झेल रहे हैं, ऊपर से कारोबार मंदा पड़ चुका है। किसी तरह से अपने व्यापार को जीवित रख कर आगे बढ़ा रहे हैं तो उस पर चोरों की कुदृष्टि उन्हें आर्थिक रूप से चोट पहुंचा रही है। विगत लगभग दो महीने से मुख्य क्षेत्र के अनेक दुकानदार एसी और केबल चोरी करने वालों से परेशान हैं। इन चोरों की वजह से व्यवसायी अपने बिगड़े हुए एसी को बनवाने के साथ-साथ उसे अब भविष्य के लिए सुरक्षित करने हेतु हजारों रुपए खर्च कर जाली भी लगवाने लगे हैं।
👉🏻 थाना-चौकी के नजदीक तक चुनौती दे रहे
सिटी कोतवाली के निकट निर्माणाधीन स्थल पर लगे बोर का केबल बेधड़क काटते हुए एक युवक सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ। अभी एक सप्ताह के भीतर ही सीएसईबी पुलिस सहायता केंद्र के निकट संचालित चश्मा घर प्रतिष्ठान के संचालक को दो बार चोरों ने एसी के कॉपर और अन्य कीमती सामान चोरी कर हजारों रुपए की चपत लगा दी। वह अपनी पुरानी दुकान को नया बनवाने के लिए खाली कर बगल में ही किराए की दुकान में शिफ्ट हो रहे हैं। पुराने दुकान की एसी को पार कर दिए तो नई दुकान के सामने फिटिंग कराए गए एसी को भी क्षति पहुंचाई गई। इसमें लगे तांबा और अन्य सामानों को चुरा कर बेचने पर कुछ रुपए ही चोर को हासिल होंगे लेकिन व्यवसायी को तो लंबी चपत लग गई।बनवाने का खर्च अलग, ऊपर से एसी को सुरक्षित करने के लिए चारों तरफ लोहे की जाली लगवानी पड़ गई। अब एसी को Z सिक्योरिटी जैसी सुविधा देने की नौबत आ गई है। कुछ दिन पहले ही मॉल के निकट एक संस्थान का भी एसी चोरी किया गया। इसके निकट टू ड्यूज के संचालक के यहां लगे एसी को भी चोरों ने नुकसान पहुंचाया। पावर हाउस रोड, दीनदयाल मार्केट के आसपास भी चोरों ने कहर बरपाया। चश्मा घर के संचालक नितिन गुप्ता ने बताया कि 2 माह के भीतर दर्जनों एसी चोरी के मामले हुए हैं जिनके कारण व्यापारी काफी भयभीत हैं। छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स, जिला चेंबर ऑफ कॉमर्स के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई जा रही है। आखिर चोरी किया गया सामान कौन खरीद रहा है, इसका पता लगाने में पुलिस क्यों असफल है? बहुत से ऐसे छोटे मामलों में तो रिपोर्ट ही नहीं लिखवाई जाती और जिनमें लिखाई जाती है,उनमें भी भरोसा नहीं रहता कि कुछ हो पाएगा।
👉🏻 नशेड़ी और बाल अपराधियों की मुख्य भूमिका
अवैध कबाड़ियों के लिए नशेड़ी बच्चे,किशोर और युवा सहयोगी की तरह काम कर रहे हैं। नाबालिग पर कोई खास सख्ती नहीं की जा सकती। नशेड़ियों पर भी शिकंजा नहीं कसा जा सकता,कानून के हाथ मजबूर हैं, यही बहाना भी है। इसी का पूरा-पूरा फायदा अवैध कबाड़ी भरपूर तरह से उठा रहे हैं। मोतीसागर पारा, इमलीडुग्गु, कुआभट्ठा, तुलसीनगर, राताखार, मुड़ापार, फोकटपारा जैसे इलाके के नशेड़ी चंद रूपयों के लालच व अपने नशा की लत को पूरा करने के लिए चोरी करते हैं। इन चोरों के द्वारा हजारों रुपए का नुकसान व्यापारियों से लेकर सरकारी तंत्र को भी पहुंचाया जा रहा है।
👉🏻 कप्तान सख्त, पुलिसिंग पर सवाल
महकमे में यह सर्वविदित है कि पुलिस कप्तान सिद्धार्थ तिवारी अवैध कारोबार संचालन के बिल्कुल विरुद्ध हैं और किसी भी तरह की सूचना मिलने पर तत्काल एक्शन लेते हैं।लेकिन इसके बाद भी आखिर व्यवस्था में कौन सा छेद हो गया है कि अवैध कबाड़ी उसमें से रास्ता निकालकर कप्तान को आंखें दिखाते हुए,पुलिसिंग पर सवाल उठाते हुए अपने अवैध कारोबार को निरंतर लगातार बढ़ाए हुए हैं और चोरियों के मामले में राहत नहीं मिल पा रही है। घरों और दुकानों से आम सामानों की चोरी तो हो ही रही है लेकिन तांबा और अल्युमिनियम की चोरी होने के बाद आखिर इसे कौन खरीद रहा है?कोई ना कोई तो खरीद रहा है,तभी तो चोरी हो रही है। ऐसे अवैध कबाड़ियों पर नकेल नहीँ कस पाना पुलिस के सुपरकॉप अधिकारियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं।





