👉🏻 सड़कों को खोदकर सामान्य आवागमन को दुष्कर बनाया जा रहा
👉🏻 सीवरेज लाईन के वर्तमान कार्य से भविष्य में समस्या तय मानी जा सही
कोरबा। कोरबा निगम क्षेत्र के पॉश कलोनी शिवाजी नगर और एमपी नगर में सीवरेज लाईन के नए सिरे से निर्माण में पाईप की उपयोगिता व कार्यशैली को लेकर प्रश्रचिन्ह खड़े हो रहे हैं। आशंका जतायी जा रही है कि 14 करोड़ से अधिक के इन कार्यो को अंजाम देने के तौर तरीकों से से आने वाले समय में फिर लोगों के सामने चुनौतियां होना निश्चित है। हालांकि जिला व निगम प्रशासन के संज्ञान में यह मामला लाया जा चुका है, किंतु परिणाम शून्य है।
हम बात कर रहे हैं कोरबा निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 25 और 26 में करीब 14.34 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे सीवरेज लाइन निर्माण कार्य की। सीवरेज लाइन के प्रस्ताव को राज्य सरकार ने पिछले वर्ष मंजूरी दी। कालोनी क्षेत्र में यह कार्य राहत से पहले परेशानी का कारण बनता जा रहा है। मुख्य सड़कों को किनारे-किनारे और आंतरिक सड़कों को बीच से करीब 1 मीटर गहरा खोद कर 6 इंची पाईप बिछाई जा रही है। पाईप बिछाने से पहले नीचे किसी तरह की कांक्रीट तैयार नहीं की जा रही है। कच्चे धरातल पर पाईप बिछाकर ऊपर मिट्टी पाटी जा रही है।
👉🏻 पाईप का साइज छोटा, बड़ा होना चाहिए

स्थानीय लोगों सहित इस तरह के काम के जानकार लोगों और भाजपा से जुड़े लोग भी, जो इस काम को होते देख रहे हैं,उनका भी कहना है कि बिछाई जा रही 6 इंची पाईप की बजाय कम से कम 10 इंच की पाईप बिछानी चाहिए। यह कालोनी जब बसी थी, तब भी 6 इंच का पाईप सीवरेज लाइन के लिए बिछाया गया था। वर्तमान में पुराने मकानों के ऊपर दो मंजिला-तीन मंजिला मकान बन गए हैं। परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ने के साथ आबादी बढ़ गई है और निस्तार का दबाव भी पाइप लाईनों पर बढ़ रहा है। इस लिहाज से सीवरेज में बहने वाले पानी का बहाव झेलने के लिए बड़ी साईज की पाईप लगनी चाहिए। पाईप की क्वालिटी को लेकर भी जानकार लोग सवाल उठा रहे हैं।
👉🏻 ऊपरी सतह दलदल,गड्ढे-धूल

पाइप लाईन को बिछाने के लिए मुख्य सड़क से लेकर भीतर के सड़कों की जेसीबी से खुदाई करने के साथ पाईप बिछाने के बाद उसे कवर्ड करने के बाद की स्थिति को लेकर लोग परेशान हो रहे हैं। एक तो निर्माण में ना मानक का अता-पता है और ना ही तकनीकी स्तर पर निगरानी हो रही है। गड्ढों को खोदी गई मिट्टी से ही पाट
कर बराबर किया जा रहा है, जो वाहनों और आवागमन के कारण तथा घरों से निकलने वाले पानी की वजह से गीला हो कर कीचड़ में तब्दील हो कर दलदल बनने के साथ गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते में बदल चुका है। सुगम आवागमन में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। पटाई की मिट्टी जगह-जगह धंसने के कारण और बीच-बीच में ठोस अपशिष्ट डालने की वजह से समस्या बढ़ रही है।

लोग सवाल कर रहे हैं कि गड्ढा पाटने के बाद ऊपरी परत को पक्का क्यों नहीं कराया जा रहा है? अभी खोदी गई सड़क को बनाने के लिए फिर करोड़ों रुपये खर्च किये जाएंगे।
👉🏻 चेम्बर की गुणवत्ता पर सवाल
सीवरेज पाइप कनेक्शन के लिए बनाए जा रहे चेम्बर फ्लाई ऐश ईंटों से तैयार किए जा रहे हैं, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार आरसीसी/ सीसी चेम्बर अधिक मजबूत और टिकाऊ माने जाते हैं। लोगों का कहना है कि इस निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए,डीपीआर और स्वीकृत डिज़ाइन की समीक्षा की जाए तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाइपलाइन की क्षमता का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। साथ ही घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर जवाबदेती तय हो।
👉🏻 सामुदायिक भवन का निजी इस्तेमाल
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि वार्ड के पार्षद के द्वारा सामुदायिक भवन का निजी इस्तेमाल कराया जा रहा है। पाइप लाइन बिछाने का काम निजी ठेका कंपनी द्वारा किया जा रहा है और इसके कर्मचारी को ठहरने के लिए इनके द्वारा किसी किराए के मकान आदि का इस्तेमाल करने की बजाय सामुदायिक भवन का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने इसे अनुचित करार देते हुए कहा है कि यह सामुदायिक भवन सरकारी संपत्ति है और भवन का उपयोग के लिए अनुमति प्राप्त करने हेतु आवश्यक शुल्क के साथ आवेदन दिया जाता है। लेकिन यहां लंबे समय से सामुदायिक भवन को इंगेज करके रखा गया है। ठेकेदार को कर्मचारियों के रहने के लिए स्वयं की व्यवस्था करनी चाहिए।
👉🏻 पार्षद अनुज जायसवाल की शिकायत कहाँ दबी..?

शिवाजी नगर वार्ड के पार्षद अनुज कुमार जायसवाल ने पिछले दिनों कलेक्टर को पत्र लिखकर निर्माण कार्य में तकनीकी अनियमितताओं, घटिया गुणवत्ता और DPR के अनुरूप काम नहीं होने की शिकायत की है। हालांकि यह पत्र किस कोने में दब गया है, इसका पता नहीं।
पार्षद ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही सीवरेज और जल निकासी की समस्या का समाधान करना है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। स्थानीय निरीक्षण और नागरिकों से मिली जानकारी के आधार पर कार्य में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। पत्र में उठाए गए मुख्य मुद्दों के अनुसार, क्षेत्र में केवल 200 मिमी क्षमता की HDPE पाइपलाइन डाली जा रही है, जो भविष्य की बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से अपर्याप्त बताई गई है। इसके अलावा, पाइप कनेक्शन के लिए बनाए जा रहे चैंबर फ्लाई ऐश ईंटों से तैयार किए जा रहे हैं, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार RCC/CC चैंबर अधिक मजबूत और टिकाऊ माने जाते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह बताई गई है कि निर्माण स्थल पर निगम के जिम्मेदार अधिकारी या तकनीकी विशेषज्ञों की नियमित निगरानी नहीं हो रही है, जिससे ठेकेदार मनमाने तरीके से काम कर रहा है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि निगम प्रशासन केवल औपचारिकता निभा रहा है और वास्तविक समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। पार्षद ने कलेक्टर से मांग की है कि इस निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, DPR और स्वीकृत डिज़ाइन की समीक्षा की जाए तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाइपलाइन की क्षमता का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। साथ ही घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की गई है।
पार्षद ने चेतावनी दी है कि यदि वर्तमान स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो करोड़ों रुपये की सरकारी राशि व्यर्थ चली जाएगी और आम जनता को फिर से जलभराव और सीवरेज की समस्या झेलनी पड़ेगी।





