कोरबा। कोरबा जिला पुलिस बल में जल्द ही एक नया थाना साइबर पुलिस थाना के रूप में खुलने जा रहा है इसकी विभागीय घोषणा हो चुकी है किंतु औपचारिक रूप से संसाधनों और भवन के साथ उद्घाटन होना शेष है। साइबर थाना का गठन की घोषणा होने के साथ ही जहां पिछले दिनों एक लिस्ट लीक होकर काफी तेजी से वायरल हुई तो महकमा में इस बात को लेकर हलचल और चर्चा तेजी से तैरने लगी है कि क्या थाना गठन के बाद चेहरे बदलेंगे, टीम और सशक्त होगी या फिर इसी ढर्रे पर सब कुछ चल पड़ेगा? तमाम कयासों और अटकलों के बीच यह चर्चा भी छिड़ी है कि साइबर थाना का पहला प्रभारी किस निरीक्षक को बनाया जाएगा? क्या साइबर थाना का प्रभारी कोई निरीक्षक होगा या फिर साइबर थाना में आईटी एक्ट के तहत अपराध की कायमी कर इसे विवेचना के लिए किसी दूसरे या संबंधित थाना के निरीक्षक की ओर धकेल दिया जाएगा?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक साइबर थाना पूर्ण रूप से आईटी एक्ट के अंतर्गत आने वाले अपराधों की समीक्षा और विवेचना के लिए होता है और तमाम तरह के तकनीकी कार्यों को अंजाम दिया जाता है। नियमतः आईटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले अपराधों की विवेचना के लिए निरीक्षक स्तर से कम के अधिकारी को शक्ति प्रदान की ही नहीं गई है, तब ऐसे में यह सवाल तो उठना लाजिमी है कि सूरत और सीरत बदलेगी या इसकी टोपी उसके सिर करने का काम चलेगा? वैसे भी जब साइबर सेल से आगे बढ़कर पूर्ण रूप से साइबर थाना खुलने जा रहा है, तब यह जरूरी है कि इसकी शुरुआत मजबूत ही होनी चाहिए। कहीं पर भी विवेचनागत किसी तरह से कोई शंका, कुशंका की बात भी ना हो। इसमें कोई संदेह नहीं कि मौजूदा टीम कप्तान सिद्धार्थ तिवारी के मार्गदर्शन में बेहतर काम कर रही है, लेकिन जब बात थाना और अधिनियम की आती है तो महकमे से ही बात उठती है कि अगला निरीक्षक कौन होगा और अन्य काबिल लोगों को कब मौका मिलेगा…?
👉🏻 यह कहता है अधिनियम
राजपत्रित स्तर के पुलिस अधिकारी ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 78 स्पष्ट करती है कि- अपराधों का अन्वेषण करने की शक्ति दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते भी, कोई ऐसा पुलिस अधिकारी, जो निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अन्वेषण करेगा।






