👉🏻 फरवरी में जारी तत्काल प्रभावशील आदेश पर 4 माह बाद भी कार्यमुक्ति नहीं
कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन के मुखिया विष्णु देव साय के बाद की पंक्ति में आने वाले उपमुख्यमंत्री अरूण साव के प्रभार जिला कोरबा में शासन के आदेश का पालन नहीं हो रहा है। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार अवर सचिव विरेन्द्र कुमार जायसवाल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मंत्रालय रायपुर द्वारा 20 फरवरी 2026 को जारी तबादला आदेश जो कि तत्काल प्रभावशील कहा गया था, और आदेश जारी होने के 10 दिवस के भीतर कार्यमुक्ति भी की जानी थी तथा आगामी माह का वेतन नवीन पदस्थापना कार्यालय से जारी होना था, बावजूद इसके जनपद सीईओ मोहनीश आनंद देवांगन कोरबा जिले में ही जमे हुए हैं।
शासन के आदेश का जिला प्रशासन के द्वारा पालन न करा पाना/पालन कराने में अरुचि गंभीर प्रशासनिक चिंता का विषय है।
पूर्व में कोरबा जिले के करतला जनपद पंचायत में पदस्थ सीईओ मोहनीश आनंद देवांगन का तबादला सहायक परियोजना अधिकारी बतौर सूरजपुर जिला के लिए छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा किया गया था। वे सूरजपुर के लिए कोरबा जिले से रिलीव नहीं किए गए बल्कि उन्हें करतला जनपद से हटाकर जिला पंचायत में सहायक परियोजना अधिकारी पदस्थ कर दिया गया। वह जिला पंचायत में ही सेवा देते रहे किंतु सूरजपुर नहीं गए। इसके पश्चात उन्हें तत्कालीन कलेक्टर के द्वारा 3 फरवरी 2026 को जारी आदेश के तहत पाली जनपद पंचायत के सीईओ भूपेंद्र कुमार सोनवानी के अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण व्यवस्था के तहत मोहनीश आनंद देवांगन को पाली में पदस्थ किया गया। इसके पश्चात 20 फरवरी 2026 को शासन के तबादला आदेश के तहत मोहनीश आनंद देवांगन के पूर्व तबादला में फेरबदल करते हुए सहायक परियोजना अधिकारी, जिला पंचायत सूरजपुर से मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सक्ती,जिला सक्ती के लिए स्थानांतरण कर दिया गया। जारी आदेश में निर्देश स्पष्ट रूप से लिखे गए लेकिन इन निर्देशों का कोई फर्क प्रभावित देवांगन पर नहीं पड़ा। वह 20 फरवरी को जारी आदेश के 10 दिवस के भीतर तो क्या, 3 महीने के बाद भी कोरबा जिला से कार्यमुक्त नहीं किए जा सके हैं। विश्वासी सूत्र बताते हैं कि मोहनीश आनंद देवांगन ने अपना तबादला सूरजपुर से सक्ती कराया लेकिन इस तबादला आदेश का भी पालन उनके द्वारा करने/कराने में कोई रुचि नहीं दिखाई जा रही है। संभवत: में कोरबा में ही बने रहना चाहते हैं। शासन के निर्देश/आदेश की इस तरह से अवहेलना कोरबा जिले में पदस्थ रहने के दौरान स्थानांतरित किए गए कई अधिकारियों- कर्मचारियों के लिए बड़ा आसान हो गया है। शासन के तबादला आदेश की अवहेलना का यह कोई पहला मामला नहीं है बल्कि ताजातरीन उदाहरण कटघोरा खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी बना हुआ है।






