रायपुर। ग्राम नकटी की शासकीय चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब इस पूरे विवाद से जुड़े सरकारी दस्तावेज सामने आए हैं, जिन्होंने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेज बताते हैं कि जिस भूमि पर आज अतिक्रमण हटाया जा रहा है, उस पर आवासीय योजना विकसित करने की प्रक्रिया वर्ष 2020 में ही तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू हो गई थी। वहीं वर्ष 2022 में चारागाह भूमि पर हो रहे अतिक्रमण की लिखित शिकायत भी प्रशासन को दी गई, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं होने से अगले वर्ष तक अतिक्रमण कई गुना बढ़ गया।
2020 में शुरू हुई आवासीय योजना
दस्तावेजों के अनुसार 1 सितंबर 2020 को छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल ने ग्राम नकटी के खसरा क्रमांक 420 की 15.479 हेक्टेयर शासकीय भूमि सामान्य आवासीय योजना के लिए आवंटित करने का प्रस्ताव कलेक्टर रायपुर को भेजा। इसके बाद भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू हुई और सार्वजनिक इश्तिहार जारी कर संबंधित विभागों से आपत्तियां भी मांगी गईं।
किसी विभाग ने नहीं जताई आपत्ति
जनवरी 2021 में स्वास्थ्य, शिक्षा समेत विभिन्न विभागों से प्रस्तावित भूमि के संबंध में राय मांगी गई, लेकिन किसी भी विभाग ने भूमि आवंटन पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। इसके बाद भी प्रक्रिया आगे बढ़ती रही।
2021 में सिर्फ 3 हेक्टेयर में था अतिक्रमण
26 जून 2021 के राजस्व सर्वे और बाद में गृह निर्माण मंडल की रिपोर्ट में उल्लेख है कि प्रस्तावित भूमि के केवल लगभग 3 हेक्टेयर हिस्से में कच्चे मकान और बाड़ी स्वरूप अतिक्रमण था। उसी समय राजस्व अभिलेखों में यह भी दर्ज किया गया कि उक्त भूमि गृह निर्माण मंडल की आवासीय योजना के लिए प्रस्तावित है।
2022 में शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
वर्ष 2022 में चारागाह भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर जिला प्रशासन से लिखित शिकायत की गई। शिकायत में अवैध कब्जों को रोकने और तत्काल कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
2023 तक 15 हेक्टेयर तक फैल गया कब्जा
दस्तावेजों के अनुसार अगले एक वर्ष में स्थिति पूरी तरह बदल गई। जहां वर्ष 2021 तक करीब 3 हेक्टेयर क्षेत्र में सीमित अतिक्रमण था, वहीं वर्ष 2023 तक लगभग 15 हेक्टेयर भूमि पर पक्के मकान और बड़े निर्माण खड़े हो गए। गृह निर्माण मंडल की रिपोर्ट में भी इस बदलाव का उल्लेख किया गया है।
आलीशान मकानों का भी उल्लेख
दस्तावेजों में अवैध निर्माण का विस्तृत ब्यौरा दर्ज है। इनमें 1000 वर्गफीट से लेकर 10000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल वाले कई बड़े मकानों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बड़ी संख्या में कब्जाधारियों के गांव या अन्य स्थानों पर पहले से मकान मौजूद हैं, जबकि सीमित संख्या में ऐसे परिवार मिले जिनके पास कोई अन्य आवास नहीं है।
अब प्रशासनिक जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
अब जब सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक हुए हैं तो सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि वर्ष 2022 में शिकायत मिलने के बावजूद समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यदि उसी समय अवैध निर्माण रोक दिए जाते, तो चारागाह भूमि पर इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और बाद में व्यापक बेदखली की स्थिति शायद नहीं बनती। यही कारण है कि अब यह मामला केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और शासकीय भूमि की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।







