👉🏻 पहली बार देख कर सिहर उठे गाँव वाले
कोरबा। जिले के रजगामार क्षेत्र के वन्य ग्राम केसला में 11 अगस्त की रात्रि 8 बजे उस समय हड़कंप मच गया, जब मगत राम के घर की बाड़ी में रखे खपरैल के ढेर में करीब 10 फीट लंबा किंग कोबरा (पहाड़चित्ती) घुसकर बैठा दिखा। जिस जगह वह बैठा था, वहां घर वालों का देव स्थल है। बड़ा सा साँप देखते ही परिवार में डर का माहौल निर्मित हो गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण साँप को देखने के लिए इकट्ठा हो गए।
घर के मालिक ने बिना कोई जोखिम उठाये तत्परता से तत्काल इसकी सूचना वन विभाग के कमलेश कुम्हार एवं सूरज सिदार को दिया। रेस्क्यु टीम प्रमुख नोवा नेचर सदस्य रेस्क्यूअर जितेंद्र सारथी को भी अवगत कराया। उसी वक्त पूरे गांव में बिजली नहीं थी, जिसके कारण खपरैल में छिपे विशालकाय किंग कोबरा को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण था। थोड़ी सी चूक रेस्क्यू टीम के लिए भी खतरा पैदा कर सकती थी।
वन मण्डलाधिकारी प्रेमलता यादव के निर्देशानुसार उपवनमंडल अधिकारी रामसिंह राठिया के मार्गदर्शन में वन विभाग के कर्मचारी एवं रेस्क्यू टीम के जितेंद्र सारथी व बॉबी श्रीवास ने सावधानी और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन करते हुए टॉर्च की रौशनी की मदद से काफी मशक्कत के बाद किंग कोबरा को सुरक्षित रेस्क्यू कर थैले में डाला। इस गाँव में सिहरन पैदा कर देने वाला ऐसा साँप किंग कोबरा पहली बार देखने की बात ग्रामीणों ने कही। पंचनामा पश्चात उसे सुरक्षित प्राकृतिक रहवास में छोड़ा गया।
👉🏻ग्रामीणों को दी गई जानकारी
रजगामार के प्रभारी कमलेश कुम्हार ने गांव वालों को किंग कोबरा के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि जब भी कोई वन्य जीव दिखे, तो उसको मारे नहीं बल्कि तत्काल वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी को सूचना दें ताकि उस जीव को रेस्क्यु कर पुनः जंगल में छोड़ा जा सके।
👉🏻किंग कोबरा की पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, किंग कोबरा पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सांपों की आबादी को नियंत्रित करने में भी योगदान देता है। ऐसे वन्यजीवों के घरों में पहुंचने पर उन्हें मारने की बजाय तत्काल वन विभाग या अधिकृत रेस्क्यू टीम को सूचना देना ही सुरक्षित और जिम्मेदार कदम है। इस सफल रेस्क्यु के दौरान सरपंच केसला, वन विभाग कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में आसपास के गांव वाले उपस्थित रहे।





