👉🏻 इसी जमीन के अनाज से स्वामी को लगता है भोग, पुजारी को दान में मिली है भूमि
कोरबा। जमीन दलालों की बेशर्मी की हद है कि वे अपने गलत कर्मों से मिलने वाले फल की चिंता न कर अब भगवान जगन्नाथ की जमीन पर भी नजरें गड़ाए बैठे हैं। जमीन दलालों की नजर कोरबा जिले के प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर पर पड़ गई है। इनके अपवित्र प्रयासों से बचाने के लिए मंदिर के पुजारी ने शासन से गुहार लगाई है।
0 अपनी जमीन बता कर कब्जा का प्रयास
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब करीब एक माह पहले कुछ अन्य लोग जमीन के संबंध में आम मुख्तियारनामा के आधार पर इस जमीन को अपना बताते हुए काबिज होने के लिए पहुंचे थे। जब इस बात की जानकारी ग्रामीणों को हुई तो उनमें आक्रोश व्याप्त हो गया और उन्होंने मौके पर पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया कि यह भगवान जगन्नाथ की जमीन है। मंदिर के पुजारी रामेश्वर प्रसाद को यह जमीन दान में मिली है जब बात बढ़ी तो राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। पटवारी ने रिकॉर्ड की पड़ताल की तो ज्ञात हुआ कि यह जमीन वर्षों से रामेश्वर प्रसाद के पास है और वही काश्तकारी करते आ रहे हैं अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर वर्षों पुरानी यह जमीन इन दलालों के चंगुल में कैसे आ गई? इस बात में कोई संदेह नहीं कि मसाहती ग्राम दादर खुर्द के सर्वे के दौरान और सर्वे के बाद जमीनों के रकबा-खसरा में जमकर छेड़छाड़ हुई है और सरकारी जमीनों को निजी बताने का भी खेल हुआ है। इसकी वजह से कई निजी भूमि सरकारी और सरकारी भूमि निजी हो गई है। दादरखुर्द का सर्वे उपरांत नक्शा भी काफी विवादों में बताया जा रहा है।
0 पुराना नक्शा,रिकार्ड से छेड़छाड़ की आशंका बलवती
बता दें कि अभी भी उस भूमि पर मंदिर के पुजारी काश्तकारी करते आ रहे हैं और उसी भूमि के फसल से स्वामी जगन्नाथ को भोग लगता है 200 वर्ष पुराने मंदिर की इस परंपरा में खलल डालने की कोशिश हो रही है। पुराना नक्शा चौहद्दी सीमा में भी मंदिर पुजारी काश्तकारी के नाम से यह जमीन दर्ज है फिर भी दलाल लोग सीमांकन कर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। वर्ष 1928-29के मिसल बंदोबस्त में दान दी गई यह भूमि मुनीराम पिता घासीराम के नाम पर दर्ज है।
लगभग 100 साल पहले ग्राम-दादर खुर्द निवासी मुनीराम पिता घासीराम रावत द्वारा अपनी भूमि से से 1.75 एकड़ भूमि जिसका पुराना मसाहती खसरा नम्बर 180 (हर्रा टिकरा) मिसल में अंकित है. को दान स्वरूप स्वामी जगन्नाथ मंदिर मे भोग भंडारा हेतु मंदिर के पुजारी को दान की गई थी। उक्त भूमि सन् 1980 के दान पत्र में दानदाता द्वारा दी गई है। इस भूमि की सम्पूर्ण जानकारी गांव के बुजुर्ग एवं सभी ग्रामवासियों को है। इस दान स्वरूप प्राप्त भूमि में कृषि कार्य करके मुख्य पुजारी रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी स्वामी जगन्नाथ मंदिर में पूजन कर भोग प्रसाद लगाकर एवं अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। उक्त दान भूमि में भू-माफियाओं द्वारा राजस्व रिकार्ड में कुटरचना करके अन्य भूमि का खसरा नम्बर को यहां सेट कर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। वर्तमान में यह दान भूमि खसरा नम्बर 180 में से (हर्रा टिकरा) के नाम से राजस्व रिकार्ड में अंकित है। उक्त दान भूमि के राजस्व रिकार्डो का निरीक्षण कर भू-माफियाओं से इस दान भूमि को मुक्त कराने की गुहार लगाई गई है।







