0 राज्य प्रशासनिक सेवा के पंचभाई सहित 7 अधिकारियों को मिला आईएएस अवार्ड
रायपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के 07 अधिकारियों का 17 फरवरी 2026 को IAS अवार्ड हुआ है, तथा उपरोक्त अवार्ड गजट नोटिफिकेशन के बाद किया गया है। इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (रिक्रूटमेंट) रूल्स, 1954 के रूल 8(1) और इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (प्रोबेशन) रूल्स, 1954 के रूल 3 के रेगुलेशन 9(1) द्वारा दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, प्रेसिडेंट इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (अपॉइंटमेंट बाय प्रमोशन) रेगुलेशन, 1955 को मानते हैं और छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सर्विस के निम्नलिखित सदस्यों को इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में राज्य सरकार के साथ सलाह करके 2024 की सेलेक्ट लिस्ट के लिए तय की गई खाली जगहों पर अगले ऑर्डर तक प्रोबेशन पर नियुक्त करते हैं और उन्हें इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के रूल 5 (1) के तहत छत्तीसगढ़ कैडर में अलॉट करते हैं। एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (कैडर) रूल्स, 1954,1.1.2024 से 31.12.2024 के बीच निकली वैकेंसी के लिए) हुआ है। इन अधिकारियों में – 01- तीर्थराज अग्रवाल (29.08.1980), 02- लीना कोसम (24.07.1979), 03- सौमिल रंजन चौबे (05.12.1988), 04- बीरेंद्र बहादुर पंचभाई (07.11.1968), 05- सुमित अग्रवाल (03.02.1987), 06- संदीप कुमार अग्रवाल(20.05.1980), 07- आशीष कुमार टिकरिहा (04.06.1985) शामिल हैं।
🫵🏻छत्तीसगढ़ में नायब तहसीलदार से IAS बनने वाले पहले अधिकारी, कोरबा में भी पदस्थ रहे
वीरेंद्र बहादुर पंचभाई छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के रहने वाले हैं। उनका जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। मध्य प्रदेश के समय 1993 में नायब तहसीलदार के पद पर चयनित हुए थे। वे कई साल तक अभनपुर में नायब तहसीदार और तहसीलदार रहे। इसके बाद 2010 वे राज्य प्रशासनिक सेवा में प्रमोट हुए। वे कोरबा जिले में एसडीएम के पद पर भी सेवारत रहे। अभी नारायणपुर में अपर कलेक्टर हैं।
विभागीय पदोन्नति में पंचभाई राज्य प्रशासनिक सेवा में आए और इसके बाद अब उन्हें आईएएस कैडर अवार्ड किया गया है। राज्य बनने के बाद पहली बार कोई नायब तहसीलदार रैंक का अधिकारी आईएएस तक पहुंचा है। अविभाजित मध्य प्रदेश में भी अभी तक सिर्फ एक नायब तहसीलदार पद पर नियुक्त अधिकारी को आईएएस अवार्ड हुआ था। गौरतलब है कि पहले कोई अभ्यर्थी छोटी उम्र में नायब तहसीलदार बना हो प्रमोशन पाकर ज़्यादा से ज़्यादा अपर कलेक्टर तक पहुंच कर रिटायर हुए है। अधिकांश डिप्टी कलेक्टर तक पहुंच कर सेवानिवृत्त हो जाते हैं।







