0 दो बार निरस्ती के बाद तीसरी बार पुलिस ने फिर खात्मा खारिजी पेश किया न्यायालय में,बार-बार हो रही पुराने तथ्यों की अनदेखी
कोरबा। शासकीय दस्तावेजों में कूटरचना कर जमीन अफरा-तफरी करते हुए पाम मॉल को सदोष लाभ पहुंचाने के मामले में एफआईआर पर न्यायालय में फिर से खात्मा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोरबा को 4 हफ़्तो में खात्मा प्रतिवेदन पर निर्णय देने का आदेश दिया है।
जहाँ इस मामले में दिनांक 20 फरवरी 2026 को ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोरबा द्वारा अभियोग पत्र (चार्जशीट) 30 दिवस के भीतर (न्याययिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सत्यानंद प्रसाद द्वारा 10 नवम्बर 2025 को दिये गए आदेश में उल्लेखित 7 बिंदुओं पर जाँच करते हुए) प्रस्तुत करने दिया गया है लेकिन उसके विपरीत कोतवाली पुलिस द्वारा अधूरी जांच कर खात्मा पेश कर दिया है, जिससे कहीं न कहीं जाँच नहीं किया जाना स्पष्ट है।
इसमें गौर करने वाली बात यह है कि पुलिस द्वारा अपराध क्रमांक 1085/20 पर कोतवाली कोरबा में शासकीय दस्तावेजों में हेरफेर करने और कूटरचना करने की धाराओं में जुर्म दर्ज किया गया है लेकिन पुलिस की जाँच, ज़मीन की स्थिति का पता लगाने की तरफ है।
अब देखना यह भी है कि क्या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अपने 20 फरवरी 2026 को दिए गए आदेश को पलट कर खात्मा स्वीकार करती हैं या फिर पुलिस पर कोर्ट के आदेश के विपरीत जाँच करने के लिए अवमानना का नोटिस दिया जाता है…?
👉🏻विधिक जानकारों के मुताबिक चूंकि “सीआरपीसी की धारा 362 (Section 362 of the Code of Criminal Procedure) के अनुसार, जब कोई आपराधिक न्यायालय (Criminal Court) किसी मामले में अपना फैसला या अंतिम आदेश (judgment or final order) सुनाकर उस पर हस्ताक्षर कर देता है, तो वह उसे बदल या संशोधित नहीं कर सकता है। यह धारा निर्णय में केवल लिपिकीय या अंकगणितीय त्रुटियों (clerical or arithmetical errors) को सुधारने की अनुमति देती है, न कि गुण-दोष (merits) पर फैसले को बदलने की।”
तो माननीय न्यायालय के लिए अपने आदेश दिनांक 20/04/2026 को पलटना अब असंभव लगता है जिसमे पुलिस को स्पष्ट निर्देश थे कि पुलिस 30 दिनों में चार्जशीट यानी अभियोग पत्र दाखिल करे। इधर फरियादी अंकित सिंह ने हाईकोर्ट में पहले ही इस आदेश का हवाला दे कर कैवियेट दाखिल करके खुद का पक्ष पहले सुने जाने का रास्ता सुरक्षित कर लिया है।
👉🏻इस मामले में WPCR 221/2026 में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और रविंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता वाली डिवीज़न बेंच ने फिलहाल 4 हफ़्तो का समय निर्धारित कर अंकित सिंह की याचिका में दिनांक 22 अप्रैल 2026 को अपना अंतिम निर्णय दिया है। यह भी साफ कहा है कि कोर्ट सभी पक्षों को पूर्ण रूप से सुने और फैसला सुनाए ताकि कोई नये तथ्य हों तो वो भी सामने आ सके।
👉🏻इधर दूसरी तरफ कोतवाली पुलिस के द्वारा अपने ही ढर्रे पर जांच की जा रही है। इस जांच के दायरे में उन पक्षों को नहीं लाया जा रहा है जो तत्कालीन एसडीएम के द्वारा जांच में शामिल किए गए थे। अंकित सिंह के पास दस्तावेजी तौर पर साक्ष्य उपलब्ध हैं किंतु इसे भी अनदेखा किया जा रहा है।
👉🏻यह कहना गलत नहीं होगा कि पुलिस के द्वारा सभी पक्षों को सुने बगैर ही अपनी तरह से जांच पड़ताल किए जाने के कारण कहीं ना कहीं मॉल के संचालकों को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने का प्रयास हो रहा है। ऐसे में पीड़ित के साथ न्याय की अवधारणा सही साबित होती नहीं दिख रही है।








