कोरबा। देश की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से एक, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की गेवरा परियोजना (कोरबा) से भ्रष्टाचार का एक ऐसा संस्थागत और संगठित ढांचा सामने आया है, जिसने देश के राजकोष को हिलाकर रख दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता और पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू द्वारा SECL मुख्यालय बिलासपुर और गेवरा क्षेत्र से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत निकाले गए आधिकारिक और विधिक दस्तावेजों ने इस महाघोटाले की कलई खोल दी है।
इस मामले की सीधी शिकायत **माननीय सर्वोच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, प्रधानमंत्री कार्यालय , प्रवर्तन निदेशालय , और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ** समेत देश की 10 बड़ी विधिक और जांच एजेंसियों को सौंप दी गई है। सरकारी फाइलों में दर्ज सबूत इतने पुख्ता हैं कि अब जिम्मेदार अधिकारियों के लिए कार्रवाई से बचना नामुमकिन होगा।
घोटाले का पूरा गणित: दो स्तरों पर खेला गया अरबों का खेल
RTI से प्राप्त विधिक और तकनीकी दस्तावेजों के विश्लेषण से साफ है कि गेवरा ओसीपी में दो स्तरों पर महाघोटाला चल रहा था:
1. भौतिक सत्यापन में पकड़ा गया ‘कागजी कोयला’
SECL की आधिकारिक कोयला सूची टीम की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट (Form-H और Form-F III) चीख-चीखकर गवाही दे रही है कि कागजी स्टॉक और वास्तविक स्टॉक में निरंतर -3% से अधिक की भारी कमी दर्ज है। हर तिमाही औसतन 1 से 1.5 लाख टन कोयला गायब होना कोई सामान्य ‘Handling Loss’ नहीं बल्कि अधिकारियों और कोयला माफिया की मिलीभगत का जीता-जागता सबूत है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में दर्ज कोयला शॉर्टेज की हकीकत:
| तिमाही / अवधि | कागजी स्टॉक (टन में) | वास्तविक स्टॉक (टन में) | कमी का प्रतिशत | कुल कमी (टन में) |
|---|---|---|---|---|
| QE June-24 | 5,181,416.12 | 5,021,068.08 | (-) 3.09% | -150,348.04 |
| QE Sep-24 | 3,473,165.91 | 3,347,482.54 | (-) 3.62% | -125,683.37 |
| QE Dec-24 | 3,007,301.99 | 2,890,058.05 | (-) 3.90% | -117,243.94 |
| वित्तीय वर्ष 2025-26 में दर्ज कोयला शॉर्टेज की हकीकत: | ||||
| तिमाही / अवधि | कागजी स्टॉक (टन में) | वास्तविक स्टॉक (टन में) | कमी का प्रतिशत | कुल कमी (टन में) |
| — | — | — | — | — |
| QE June-25 | 8,121,852.90 | 4,366,593.41 | (-) 3.03% | -166,259.49 |
| QE Sep-25 | 3,722,111.28 | 3,600,620.08 | (-) 3.26% | -121,491.20 |
| QE Dec-25 | 4,081,211.80 | 4,004,370.53 | (-) 1.88% | -76,641.27 |
नोट: कागजी रिकॉर्ड की तुलना में जमीन से गायब पाए गए कोयले की कुल मात्रा 7,57,577.14 टन (लगभग 7.57 लाख टन) है। ग्रेड G-11 कोयले की बाजार दर के अनुसार, गायब किए गए इस कोयले का वास्तविक बाजार मूल्य ₹150 करोड़ से ₹200 करोड़ है, जिसे खुले बाजार में अवैध रूप से बेचकर ब्लैक मनी ठिकाने लगाई गई।
2. बिना विधिक ट्रांजिट पास के 4.84 करोड़ टन कोयले की रवानगी!
घोटाले का सबसे अचूक और लिखित विधिक प्रमाण खुद SECL के क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक (गेवरा क्षेत्र) के पत्र क्रमांक एसईसीएल/मप्र/गे.क्षे./विक्रय/लोस् अ/26/ASM/250 तथा पत्र क्रमांक 249 से मिलता है।
- वर्ष 2024-25: विभाग ने स्वयं लिखित में स्वीकार किया है कि इस अवधि में रेलवे ट्रांजिट पास काटने की प्रक्रिया ही प्रारंभ नहीं हुई थी। इसके बावजूद बिना पास के रेलवे के माध्यम से 3,24,41,232.87 टन (3.24 करोड़ टन) कोयला प्रेषित कर दिया गया!
- वर्ष 2025-26 (अप्रैल से अक्टूबर 2025): इस दौरान भी कोई ट्रांजिट पास नहीं काटा गया, लेकिन 1,60,18,218.94 टन (1.60 करोड़ टन) कोयला बेधड़क रेलवे के माध्यम से बाहर भेज दिया गया।
कुल मिलाकर 4,84,59,451.81 टन (लगभग 4.84 करोड़ टन) कोयला बिना किसी विधिक खनिज ट्रांजिट पास के खपा दिया गया। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा देय 14% रॉयल्टी, 30% DMF शुल्क, 2% NMET शुल्क, 5% GST, तथा प्रति टन ₹400 के कोयला उपकर की गणना करें, तो यह सीधे तौर पर ₹3,500 करोड़ से ₹5,000 करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व का गबन है।
महाघोटाले का ‘सिंडिकेट’: ये नामजद अधिकारी सीधे रडार पर
शिकायतकर्ता ने दस्तावेजों में मौजूद हस्ताक्षरों और पदनामों के आधार पर निम्नलिखित अधिकारियों को इस संगठित आर्थिक अपराध का मुख्य जिम्मेदार ठहराया है:
- शीर्ष प्रबंधन एवं नीति-निर्धारक: श्री ए. के. त्यागी (महाप्रबंधक, SECL गेवरा क्षेत्र), श्री अशोक कुमार (महाप्रबंधक/एजेंट, गेवरा परियोजना), श्री एस. के. मोहंटी (एरिया जीएम), श्री एन. के. साहू (महाप्रबंधक-संचालन), और श्री आर. बी. सिंधुर (महाप्रबंधक-संचालन/स्टाफ ऑफिसर खनन)।
- विक्रय एवं वित्तीय नियंत्रण: क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक (जिन्होंने बिना पास कोयला प्रेषित होने दिया) और महाप्रबंधक (वित्त), जो बिना रॉयल्टी पास के जा रहे कोयले के वित्तीय लेनदेन, ई-वे बिल और इनवॉइस को बिना विधिक आपत्ति के क्लियर करते रहे।
- खदान प्रबंधक एवं क्षेत्रीय कोयला मापन समिति: श्री मयंक वर्मा (उप महाप्रबंधक/खदान प्रबंधक), श्री राकेश कुमार (उप महाप्रबंधक), श्री आर. एन. सिंह (खदान सर्वेक्षक), श्री ए. के. सिंह (एरिया सर्वे ऑफिसर), और इन्वेंट्री टीम के लीडर्स व सदस्य (श्री संजय कुमार चौधरी, श्री भानु प्रताप सिंह, श्री सतीश कश्यप, श्री वीरेंद्र प्रसाद यादव, श्री शुभम मोंडल, श्री राजेश कुमार यादव, श्री सत्यपाल सिंह, श्री अनिकेत श्रीवास्तव, श्री राजीव कुमार केवट, श्री ज्ञानेश तिवारी, श्री सत्यंत शुक्ला और श्री अवि नागदेवे)। इन सबने आंखों के सामने लाखों टन कोयले की चोरी होते देखने के बावजूद मामले को दबाए रखा।
जांच एजेंसियों से की गई तीखी मांगें, अब पीछे हटना नामुमकिन
RTI कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने देश की शीर्ष अदालतों और केंद्रीय जांच एजेंसियों से निम्नलिखित कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जिसके बाद अब शीर्ष अधिकारियों पर तुरंत एक्शन लेने का दबाव बन गया है:
- तत्काल निलंबन और बर्खास्तगी: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत इन सभी नामजद अधिकारियों को साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने से रोकने के लिए तुरंत निलंबित कर सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू हो।
- गैर-जमानती धाराओं में गिरफ्तारी: भारतीय न्याय संहिता के तहत धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, सरकारी संपत्ति का गबन और आपराधिक षड्यंत्र के तहत मामला दर्ज कर इन्हें तत्काल जेल भेजा जाए।
- ED की PMLA कार्रवाई: प्रवर्तन निदेशालय के माध्यम से इन अधिकारियों और इनके परिजनों के नाम पर मौजूद चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और बेनामी निवेशों की जांच कर संपत्तियों को कुर्क किया जाए।
- कोर्ट की सीधी निगरानी: चूंकि इसमें बेहद उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल हैं, इसलिए मामले की प्रगति रिपोर्ट सीधे माननीय सर्वोच्च न्यायालय या बिलासपुर उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करवाई जाए।
इस खुलासे ने साबित कर दिया है कि ‘काले सोने’ की आड़ में भ्रष्टाचार का कितना काला खेल खेला जा रहा था। अब देखना यह है कि देश के प्रधान न्यायाधीश और प्रधानमंत्री कार्यालय इस पर कितनी तेजी से हंटर चलाते हैं!







