👉🏻 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी श्रद्धांजलि, कहा-छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति
रायपुर। महाभारत की गाथा की छत्तीसगढ़ी बोली-भाषा में पिरोकर गीत के रूप में प्रस्तुत करने वाली महान पंडवानी गायिका तीजन बाई ने आज 70 वर्ष की आयु में एम्स रायपुर में अंतिम सांस ली। वे काफी लंबे समय से बीमार थीं,उनका उपचार एम्स में कराया जा रहा था।
पंडवानी जैसी पारंपरिक लोक कला को देश-विदेश तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाली पद्मभूषण सम्मान से विभूषित तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज़, प्रभावशाली अभिनय और तंबूरे के साथ महाभारत के पात्रों को जीवंत कर देने की अनूठी शैली से विश्वभर में पहचान बनाई। उन्होंने उस समय पंडवानी की ‘कपालिक’ शैली में मंच पर खड़े होकर प्रस्तुति देना शुरु किया, जब यह कला लगभग पूरी तरह पुरुष कलाकारों तक सीमित मानी जाती थी। उन्होंने सामाजिक परंपराओं को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए नई राह तैयार की।
🙏🏻अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा

निधन की खबर के पश्चात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर पहुंचकर पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई तथा छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।








