👉🏻बिलासपुर GRP ने 4 किलो की कीमत 3.50 लाख लगाई, कोरबा पुलिस ने 7 किलो गांजा महज 84 हजार का बताया!
कोरबा। गांजा तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर अब एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है, जिसका जवाब सिर्फ कार्रवाई की कहानी से नहीं मिल सकता। एक ही तरह के मादक पदार्थ गांजे की जब्ती में किलो के हिसाब से कीमत लगाने का पैमाना ही अलग-अलग नजर आ रहा है। बिलासपुर GRP के एक प्रकरण में 4 किलो गांजे की कीमत 3.50 लाख रुपए बताई गई, जबकि कोरबा सिटी कोतवाली के दूसरे मामले में 7 किलो गांजे की कीमत महज 84 हजार रुपए दर्ज की गई।
दोनों मामले रेलवे स्टेशन से जुड़े हैं और दोनों में धारा 20(B) NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई हुई है।
👉🏻बिलासपुर का मामला
24 अगस्त को चांपा GRP की सूचना पर रायगढ़ छोर, प्लेटफार्म नंबर 2-3 में कार्रवाई करते हुए सागर निवासी विजेन्द्र सिंह लोधी को पकड़ा गया। उसके काले रंग के पिट्ठू बैग से चार पैकेट में कुल 4 किलो गांजा बरामद होना बताया गया। जब्ती पत्रक में इसकी कीमत 3 लाख 50 हजार रुपए दर्ज की गई। यानी पुलिस के दस्तावेज में गांजे की कीमत करीब 87,500 रुपए प्रति किलो बैठती है।
👉🏻कोरबा का मामला
इसके ठीक विपरीत 23 अगस्त को कोरबा रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में दो लावारिस बैग से कुल 7 किलो गांजा बरामद हुआ। इसमें एक बैग से 5 किलो और दूसरे से 2 किलो गांजा बताया गया। पुलिस ने इसकी कुल कीमत 84 हजार रुपए दर्ज की। यानी यहां गांजे की कीमत महज 12 हजार रुपए प्रति किलो लगाई गई। गांजा की कीमत में पांच गुना से ज्यादा का फर्क सवाल तो उठाता है।
👉🏻 यहां भी चौंकाने वाली कीमत
जब हमने अन्य थाने की कुछ एफआईआर खंगाली तो बिलासपुर जिले के सरकंडा थाना में 14 अगस्त 2026 को दर्ज अपराध क्रमांक 1162/ 26 में आरोपी जाहिरा बेगम निवासी चांटीडीह से 1 किलो 100 ग्राम गांजा बरामद किया गया जिसकी कीमत 50000 रुपए आंकी गई। इसी प्रकार रायगढ़ जिला के कोतवाली थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 443/ 26 दिनांक 19 अगस्त 2026 में आरोपी त्रिनाथ मलिक, ओमप्रकाश राउत, सत्यव्रत मोहंती से कुल 15 किलो 362 ग्राम गांजा जप्त किया गया।पूरे जप्त गंज की कीमत डेढ़ लाख रुपए आंकी गई है।
👉🏻 नई कीमत 50 हजार रु.प्रति किलो
जानकारी चाहने पर एक पुलिस अधिकारी ने सत्यसंवाद को बताया कि NCB की अक्टूबर 2025 की संशोधित अनुमानित स्ट्रीट वैल्यू के संबंध में प्रकाशित जानकारी के अनुसार गांजे का मूल्य 50,000 प्रति किलो किया गया है। अलग-अलग तरह के मादक पदार्थ की कीमत अलग-अलग निर्धारित की गई है लेकिन गांजा के संबंध में 50000 रुपये प्रति किलो की कीमत में दर्ज करने का सर्कुलर है।
ऐसे में 4 किलो गांजा का अनुमानित मूल्य 2 लाख और 7 किलो का 3.50 लाख रुपए बैठता है। लेकिन बिलासपुर के मामले में इससे भी काफी अधिक कीमत और कोरबा के मामले में इससे बहुत कम कीमत दर्ज की गई।
👉🏻अब, सवाल सिर्फ कीमत का नहीं बल्कि पैमाने का है
यहां सवाल यह नहीं है कि गांजे का बाजार भाव क्या है। सवाल यह है कि सरकारी कार्रवाई के दस्तावेजों में जब्त गांजे की कीमत तय करने का आखिर पैमाना क्या है? क्या अलग-अलग थाना और जांच एजेंसियां अपने-अपने हिसाब से कीमत निर्धारित कर रही हैं?नक्या इसके लिए कोई विभागीय दिशा-निर्देश है?
यदि NCB की संशोधित अनुमानित कीमत को आधार बनाया जाता है तो इन दोनों प्रकरणों में अलग-अलग मूल्यांकन क्यों? और यदि NCB की कीमत बाध्यकारी नहीं है तो पुलिस जब्ती पत्रक में कीमत निर्धारित करने का आधार क्या है?
👉🏻 गांजे की मात्रा गिनी, कीमत का हिसाब कौन करेगा?
जब सत्यसंवाद ने इस विषय पर कुछ अधिवक्ताओं से विधिक पहलू पर चर्चा की तो बताया कि NDPS मामलों में सजा का निर्धारण मुख्यतः बरामद गांजे की मात्रा और उसकी वैधानिक श्रेणी के आधार पर होता है। लेकिन सवाल यह भी है कि अवैध कारोबार से सरकार और वैध व्यवस्था को होने वाले आर्थिक नुकसान का आंकलन क्यों न हो?
सरकार वैध रूप से नशीले पदार्थों की बिक्री को नियंत्रित कर राजस्व प्राप्त करती है। वहीं अवैध गांजा का कारोबार उस व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में जब पुलिस जब्त गांजे की कीमत भी दर्ज करती है, तो कीमत तय करने का एक समान और प्रमाणित पैमाना होना जरूरी है।
एक अधिवक्ता ने कहा कि न्यायालय में NDPS मामलों की सुनवाई के दौरान मात्रा के साथ जब्ती के मूल्यांकन का आधार भी स्पष्ट होना चाहिए। सवाल सजा को केवल कीमत से जोड़ने का नहीं, बल्कि जब्ती के आर्थिक मूल्य और उससे होने वाले संभावित सरकारी नुकसान के आंकलन में पारदर्शिता और एकरूपता का है।






