👉🏻 दुष्कर्म के आरोपी को पेश नहीं कर पाने से सुप्रीम कोर्ट सख्त
👉🏻 छत्तीसगढ़ सरकार से भी किया जवाब-तलब
नई दिल्ली/रायपुर/कोरबा। सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालती आदेशों की अनदेखी करने पर छत्तीसगढ़ सरकार और पुलिस के प्रति सख्त नाराजगी जाहिर की है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इसे ‘आदेश का जानबूझकर किया गया उल्लंघन’ करार देते हुए कोरबा के पुलिस अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। मामला दुष्कर्म के आरोपी चंद्र कुमार जायसवाल उर्फ ‘बुट्टू’ को अदालत में पेश करने से जुड़ा है, जिसे हाईकोर्ट ने बरी कर दिया था और उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछली स्पष्ट हिदायत के बावजूद आरोपी की अनुपस्थिति अस्वीकार्य है, जिसके लिए अब कोरबा एसपी को 24 अप्रैल को कोर्ट में जवाबदेह होना होगा। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि अगली सुनवाई पर प्रतिवादी को हर हाल में पेश किया जाए और इसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
👉🏻 जानबूझकर उल्लंघन करार दिया
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश का पालन न करने पर छत्तीसगढ़ सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “स्पष्ट और जानबूझकर किया गया उल्लंघन” करार दिया है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने कोरबा के पुलिस अधीक्षक (SP) को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि आदेश का पालन न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए?
👉🏻 कोर्ट ने दिया था यह आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 23 मार्च 2026 को आदेश दिया था कि 15 अप्रैल को सुनवाई के दौरान प्रतिवादी को पेश किया जाए। हालांकि, 20 अप्रैल को सुनवाई के समय वह अदालत में उपस्थित नहीं था। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई। राज्य की ओर से बताया गया कि 15 अप्रैल को प्रतिवादी को पेश किया गया था और बाद में 20 अप्रैल के लिए उपस्थिति से छूट मांगी गई थी।






