👉🏼हीट स्ट्रोक से नपं पाली में सैकड़ों चमगादड़ों की मौत
कोरबा-पाली। नौतपा के पूर्व पड़ रही भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों ने आम जनजीवन के साथ-साथ पशु पक्षियों पर भी बड़ा असर डाला है.बल्कि कहर बन कर टूट पड़ा है.नगर पंचायत पाली में बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौत हुई है.
इस वर्ष मौसम के कई रूप देखने को मिले हैं. अप्रैल माह जैसे तैसे गर्मी के मौसम में राहत दे गया था. लेकिन मई माह सारे कसर पूरे कर रहा है. ग्रीष्म ऋतु का पीक समय नौतपा को माना जाता है जो 25 मई से आरम्भ होगा. इससे पूर्व प्रकृति का 42-43 डिग्री सेल्सियस का टार्चर लोगों को दिन में घरों में दुबकने को मजबूर कर रहा है. नगर पंचायत पाली में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है. भीषण गर्मी और उमस ने सभी लोगों की सेहत पर बुरा असर डाला है. दिन में दोपहर में सडकों मे सन्नाटा छा रहा है. इस गर्मी से लू (हीट स्ट्रोक) का खतरा बढ़ गया है. पूरा देश इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है. गर्मी नीत नए रिकॉर्ड बना रही है.जिसमें आम नागरिक से लेकर पशु पक्षी तक हलकान हो गए हैं. इस गर्मी से पाली क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा है. पाली क्षेत्र में हीट स्ट्रोक से बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौत हो गई है।

नगर पंचायत पाली के नौकोनिया तालाब के किनारे स्थित पेड़ों में हजारों की संख्या में चमगादड़ों ने डेरा बसेरा बनाया है. प्रतिवर्ष फरवरी मार्च में बड़ी संख्या में प्रवासी चमगादड़ आकर तालाब के किनारो पर डेरा जमाते हैं.इस वर्ष प्रवासी चमगादड़ की संख्या काफी बढ़ी हैं.जिससे प्रकृति, पर्यावरण प्रेमी ,पक्षी प्रेमी हर्षित हो रहे हैं. तालाब के किनारे स्थित वृक्षों पर सैकड़ों चमगादड़ अंगूर की तरह गुच्छों मे उल्टे लटके देखे जा सकते हैं. सुबह शाम दोपहर में तालाब के ऊपर उड़ान भरना और उनकी जल क्रीड़ा आकर्षित करता है.लेकिन ये चमगादड़ 42- 43 डिग्री का गर्म तापमान झेल नहीं पा रहे हैं और पेड़ों से पके फल की भांति नीचे टपक रहे हैं.बड़ी संख्या में पेड़ों के नीचे चमगादड़ मृत देखे जा सकते हैं।

यह स्थिति पाली के अलावा कई गांव में भी बड़े तालाबों के किनारे स्थित पेड़ों के नीचे दिख रही है.बड़ी संख्या में चमगादड़ की मौत पर वन विभाग को सूचित किया गया है. इस गर्मी के मौसम में पशु पक्षियों के अलावा खेती किसानी पर भी बड़ा असर डाला है. मौसमी सब्जियां झुलस रही है.
0 CHC पाली में बढ़ रहीं हैं मरीजों की संख्या
.सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली में गर्मी और इससे उत्पन्न शारीरिक व्याधियों के मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं. उल्टी दस्त, बुखार ,डिहाईड्रेशन आदि के मरीजों की संख्या बढ़ी है.बीएमओ डॉ अनिल शराफ ने बताया कि लू (हीटस्ट्रोक) जो कि तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण होने वाली एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है.इससे बचने के लिए पर्याप्त पानी पीते रहें, दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलें, और हल्के, ढीले सूती कपड़े पहनें.लू से होने वाले खतरे डिहाइड्रेशन, शरीर में पानी की कमी होना,बेहोशी और चक्कर आना, अत्यधिक गर्मी से ब्लड प्रेशर गिर जाना,अंगों की विफलता,शरीर का तापमान बहुत अधिक (104°F या उससे अधिक) होने पर मस्तिष्क, गुर्दे और दिल पर बुरा असर पड़ना,मांसपेशियों में ऐंठन, शरीर से नमक और पानी निकलने पर गंभीर दर्द होना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. लू से बचाव के लिए प्यास न लगने पर भी रुक-रुक कर पानी पीते रहें,नींबू पानी, नारियल पानी, और छाछ का सेवन करें,धूप से बचें,दोपहर के समय घर से बाहर न निकलें यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो छाता, टोपी और धूप के चश्मे का प्रयोग करें.हमेशा हल्के रंग के, पूरे शरीर को ढकने वाले और ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें. खीरा, तरबूज, और खरबूजा जैसे मौसमी फल खाएं। तला हुआ और मसालेदार खाना खाने से बचें.लू लगने पर प्राथमिक उपचार करें, पीड़ित व्यक्ति को तुरंत किसी छायादार या ठंडी जगह पर लिटा दें,उनके शरीर के तापमान को कम करने के लिए ठंडे पानी की पट्टियां माथे, गर्दन और बगल पर रखें,ओआरएस (ORS) या नमक-चीनी का घोल दें,हालत गंभीर होने पर बिना देर किए नजदीकी अस्पताल ले जाएं.






