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तस्करों का “ट्रांजिट रूट” बनता कोरबा जिला

Admin
Last updated: 20/04/2026 1:54 PM
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6 Min Read
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👉🏻 सीमावर्ती इलाकों से चारों ओर खुले प्रवेश और निकास मार्ग चिंताजनक

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      कोरबा। छत्तीसगढ़ सहित कोरबा जिला में भी सड़कों का जाल बिछ रहा है। प्रमुख सहित जंगली व आंतरिक मार्गों की कनेक्टिविटी तो बढ़ रही है किंतु इन मार्गों पर निगरानी का अभाव आपराधिक संवेदनशीलता को बढ़ाता है। मामले बताते हैं कि कोरबा जिला मादक पदार्थों, विशेषकर गांजा के अलावा ईमारती लकड़ियों आदि की तस्करी के एक अहम “ट्रांजिट रूट” के रूप में दिखाई दे रहा है। पूर्व् के और वर्तमान उजागर घटनाक्रमों ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है कि जिले के सीमावर्ती और आंतरिक मार्ग तस्करों/अपराधियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बनते जा रहे हैं।
      कोरबा जिले के भौगोलिक स्तर पर देखें तो कोरबा जिला, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, रायगढ़ और सरगुजा संभाग के सीमावर्ती इलाके ऐसे प्वाइंट्स बन चुके हैं, जहां से होकर तस्करी के नेटवर्क अपने रास्ते बदलते हुए आगे बढ़ते हैं। कोरबा की ओर से निकलने वाले मार्ग कटघोरा–पसान–मरवाही बेल्ट के जरिए सीधे अनूपपुर और आगे के जिलों से जुड़ते हैं, जिससे अंतरराज्यीय मूवमेंट बेहद आसान हो जाता है। इसी प्रकार कोरबा-करतला-रामपुर होते हुए रायगढ़ से उड़ीसा प्रमुख रूट है। उड़ीसा राज्य से गांजा की खेप कोरबा के रास्ते होते हुए गंतव्य तक पहुंचती है। पकड़ में आने वाले अवैध गांजा के प्रायः सभी मामले उड़ीसा प्रांत के ही होते हैं। इन मार्गों की खासियत यह है कि ये मुख्य हाईवे से हटकर जंगल और ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरते हैं, जहां निगरानी अपेक्षाकृत कम रहती है।
      अवैध माल परिवहन/तस्करी का पैटर्न भी अब पहले से अधिक संगठित नजर आ रहा है। हाल ही में पकड़े गए सवा करोड़ का गांजा परिवहन इसका उदाहरण भी है। कोरबा की दिशा से निकलकर वाहन कभी मरवाही की ओर बढ़ते हैं, तो कभी रास्ता बदलते हुए कटघोरा-पाली होते हुए रतनपुर और आगे बिलासपुर की ओर मुड़ जाते हैं। यही तस्करों को पुलिस की नजर से बचने का मौका देता है और कोरबा को एक “कनेक्टिंग ट्रांजिट हब” में बदल देता है।
      👇🏻 चारों दिशाओं में रास्ते सक्रिय हैं
      👉🏻 उत्तर दिशा: पसान–मरवाही होते हुए सीधे मध्यप्रदेश (अनूपपुर)
      👉 पश्चिम दिशा: पाली–रतनपुर होते हुए बिलासपुर और नेशनल हाईवे
      👉 दक्षिण दिशा: कोरबा शहर से चांपा–जांजगीर की ओर
      👉 पूर्व दिशा: कटघोरा से सरगुजा संभाग की ओर जंगल मार्ग….
      इस तरह कोरबा एक “कनेक्टिंग रूट” बन गया है, जहां से अवैध माल को अलग-अलग दिशाओं में खपाया या बाहर भेजा जा सकता है।
      👉🏻 इसलिए चुनते हैं यह रास्ते
      अवैध कारोबारियों/ अपराधियों द्वारा इस रास्ते का चयन एक बड़ा कारण हो सकता है क्योंकि यह रूट जंगल और पहाड़ी इलाकों से गुजरता है। ट्रैफिक कम रहता है, और सबसे महत्वपूर्ण है कि ज्यादा चेकिंग की झंझट नहीं रहती। स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आ रहै कि सीमावर्ती मार्गों पर नियमित चेकिंग नहीं होती, कई जगह स्थायी नाके नहीं हैं, रात के समय निगरानी बेहद कमजोर रहती है। इन्हीं खामियों का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से जिला पार कर लेते हैं।
      👉🏻 राज्य की सीमाओं पर भी चौकसी जरूरी

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      छत्तीसगढ़ अब केवल आंतरिक मार्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सीमाएं मध्यप्रदेश, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र और तेलंगाना से जुड़ती हैं, जो इसे एक संवेदनशील ट्रांजिट ज़ोन बना रही है। इन सीमाओं के बीच फैले जंगल, कच्चे रास्ते और कम निगरानी वाले क्षेत्र तस्करों के लिए आसान गलियारा बनते जा रहे हैं।
      👉🏻 जंगल और ग्रामीण मार्गों का इस्तेमाल
      गांजा, नशीली दवा, लकड़ियों के तस्कर हों या अपराधी या अवैध कबाड़ी, ये मुख्य सड़कों से बचते हुए जंगल और ग्रामीण मार्गों का इस्तेमाल करते हैं, अचानक रूट बदलते हैं और चकमा दे जाते हैं। जरूरत पड़ने पर कोरबा से मरवाही या पाली–रतनपुर होते हुए बिलासपुर की ओर मुड़ जाते हैं। आंतरिक रास्तों से रायगढ़ निकल जाते हैं। यही नेटवर्क अपराधियों के फरार होने में भी मददगार बन रहा है, जहां एक जिले से दूसरे और फिर दूसरे राज्य में प्रवेश कर वे कानून की पकड़ से बाहर निकल जाते हैं।
      👉🏻 मजबूत करना होगा सुरक्षा तंत्र
      इस तरह पूरी स्थिति में सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को लेकर है। सीमावर्ती इलाकों में कई जगह स्थायी चेक पोस्ट का अभाव, रात के समय पुलिस बल की सीमित मौजूदगी, गश्त में कमी और जिलों के बीच समन्वय की कमी जैसी खामियां इनके लिए अवसर बन रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आ रहा है कि कई आंतरिक मार्गों पर बिना किसी प्रभावी जांच के आवागमन संभव है।ऐसे में अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि मजबूत सुरक्षा ढांचा और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती ही इस चुनौती का स्थायी समाधान है। संवेदनशील मार्गों पर 24×7 चेकिंग, अंतरराज्यीय सीमाओं पर संयुक्त नाका, आधुनिक निगरानी तकनीक जैसे सीसीटीवी, ड्रोन और जीपीएस ट्रैकिंग का उपयोग, तथा खुफिया तंत्र को सक्रिय करना बेहद जरूरी हो गया है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर इन ट्रांजिट रूट्स को चिन्हित कर लगातार निगरानी रखना समय की मांग है।

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