🫵🏻 हाथी प्रभावित केन्द्रों में जान हथेली पर, आक्रोश के मध्य सवाल- कब उठेगा 7 करोड़ का जाम धान ?
कोरबा। हाथी प्रभावित उपार्जन केंद्र में रखे धान की रखवाली के दौरान मंडी प्रभारी की जान हाथी ने ले ली। यह घटना बेहद गंभीर है किंतु एक बेजुबान पर इसकी जिम्मेदारी तय करके पल्ला झाड़ लेना उचित नहीं। इस मौत के लिए उन लोगों पर भी जिम्मेदारी प्राथमिकता से तय करने की आवश्यकता है जिनकी वजह से धान की रखवाली करने की नौबत आ पड़ी है। समय पर संपूर्ण धान का उठाव नहीं होना ही इस घटना के लिए जिम्मेदार है और इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ करवाई तो बनती है।
कोरबा जिले में मार्कफेड की बदइंतजामी से समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान का उठाव पहली बार फरवरी माहाँत तक भी पूरा नहीं हो सका है। मार्कफेड के अफसरों का दावा फिसड्डी हुआ। धान का उठाव की लचर परिवहन व्यवस्था से अब समिति के कर्मचारियों की जान आफत में आ गई है जो कुदमुरा उपार्जन केंद्र में दिखा। 1100 क्विंटल शेष ( 27 लाख 57 हजार रुपए से अधिक के) शासकीय धान की रखवाली कर रहे फड़ प्रभारी राजेश सिंह पिता शशिकांत सिंह की एक दंतैल हाथी ने जान ले ली। सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने मृतक के आश्रित को 10 हजार रुपए का सहयोग दिया। अधिकारियों के समक्ष हाथी प्रभावित धान खरीदी केंद्रों से तत्काल धान उठाव ,सुरक्षा का प्रबंध करने की बात कही। वन विभाग ने 6 लाख रुपए की अनुग्रह राशि में से 25 हजार की सहायता राशि तत्काल प्रदान की है।
👉🏻 बदइंतजामी ने रोका धान का उठाव
बताना होगा कि आकांक्षी जिला कोरबा में समर्थन मूल्य पर की जा रही धान खरीदी अभियान 2 दिन बढ़ाई गई मियाद के साथ 7 फरवरी तक विराम लग गया है। जिले में 43 हजार 681 किसानों ने समर्थन मूल्य पर 27 लाख 47 हजार 101 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 650 करोड़ 78 लाख 82 हजार 742.80 रुपए का धान बेचा। कायदे से समितियों में खरीदे गए धान का उठाव न्यूनतम 72 घण्टे अधिकतम 10 दिवस के भीतर हो जाना चाहिए लेकिन शासन की धान परिवहन नीति में ढिलाई की वजह से इस साल ऐसी बदइंतजामी रही कि शत-प्रतिशत धान का उठाव नहीं हो सका। इसकी मूल वजह जिले में खरीदे गए धान का निराकरण करने की जगह अन्य जिलों में खरीदे गए साढ़े 9 लाख क्विंटल से अधिक के धान के उठाव का डीओ जारी करने, जनवरी के अंत में 10 दिनों तक डीओ जारी होने के उपरांत शासन स्तर से धान के उठाव पर रोक लगाया जाना माना जा रही है। इन सबकी वजह से मार्च माह में भी उपार्जन केंद्रों में करोड़ों रुपए के लाखों क्विंटल धान जाम पड़े हैं ,नतीजन समितियों को जीरो शार्टेज धान दे पाना असंभव सा प्रतीत हो रहा है। वहीं आर्थिक नुकसान के साथ अब समिति प्रबंधकों की करोड़ों रुपए के शासकीय धान की रखवाली चौकीदारी करते जान आफत में आ बनी है। जान हथेली में लेकर धान की रखवाली कर रहे हैं।
👉🏻हाथी प्रभावित केंद्रों में 6.86 करोड़ के धान जाम,15 फरवरी तक डीओ कटा पर उठाव नहीं
गौरतलब है कि कुदमुरा क्षेत्र में ही आधा दर्जन धान उपार्जन केंद्र हाथी प्रभावित हैं। इनमें लेमरू, श्यांग, चिर्रा, बरपाली (कोरबा), चचिया एवं कुदमुरा शामिल हैं। महज इन उपार्जन केंद्रों में ही जानकारी अनुसार 28 हजार 994 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 6 करोड़ 86 लाख 86 हजार 786 रुपए का धान जाम पड़ा है। इनमें लेमरू में 3000 ,श्यांग में 18000, चिर्रा में 5000, बरपाली (कोरबा)में 16000 क्विंटल , चचिया में 230 एवं कुदमुरा में 1164 क्विंटल धान का उठाव शेष है। जहाँ जान हथेली पर लेकर कर्मचारी करोड़ों के शासकीय धान की रखवाली कर रहे। बीती रात कुदमुरा में हुए हादसे के बाद सबके हाथ-पांव फूल रहे हैं। 15 फरवरी 100 % धान का तक डीओ कटने के बाद भी धान का उठाव न होना राइस मिलरों की शासकीय कार्य दायित्व के प्रति मनमानी को दर्शाता है, जिसमें संबंधितों पर नियममानुसार कार्रवाई होनी ही चाहिए।
👉🏻फूड ऑफिसर ,डीएमओ,मिलर्स गैर जिम्मेदार , जिम्मेदारों पर दर्ज हो FIR …
जिले में लचर धान उठाव/ परिवहन व्यवस्था के कारण फड़ प्रभारी राजेश कुमार सिंह की हाथी के हमले से हुई मौत कोई सामान्य घटना नहीं है,यह शासन की धान परिवहन नीति सहित सुरक्षा व्यवस्था के दावों पर गंभीर प्रह्नचिन्ह खड़े कर रही है। लचर परिवहन नीति ,व्यवस्था का परिणाम बेकसूरों की मौत के रूप कैसे स्वीकार की जा सकती है? इसमें जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जिम्मेदारों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। इतनी बड़ी घटना पर मार्कफेड के अफसर डीएमओ एवं जिला खाद्य अधिकारी की मीडिया से संवादहीनता भी इनके गैर जिम्मेदारानापन को दर्शाती है। वैसे भी दोनों अफसरों के विरुद्ध समय- समय पर शिकायतें मिलती रही ह₹हैं,लेकिन इस घटना ने शासन- प्रशासन की नीति को कटघरे में खड़ा किया है।








