कोरबा। जिला कोरबा के टीपी नगर में स्थित पाम मॉल की जमीन को लेकर चले आ रहे विवाद में अब भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए पुलिस द्वारा न्यायालय को गुमराह करने का मामला सामने आया है। पीड़ित अंकित सिंह का गंभीर आरोप है कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर फर्जी खसरा की जांच करते हुए विवेचना अधिकारी ने कोर्ट को गुमराह किया है। इस बात की कोरबा SP से लेकर High Court तक शिकायत की गई है। पुलिस महानिदेशक रायपुर एवं रजिस्ट्रार जनरल, हाईकोर्ट बिलासपुर को भी शिकायत देकर जांच अधिकारी के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।
👉🏻मामले का विवरण:
1.अंकित सिंह ने बताया कि विवादित भूमि: ग्राम कोरबा स्थित खसरा नंबर 663/3 रकबा 0.0380 हे. पर भू-माफियाओं द्वारा फर्जी दस्तावेजों से कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में थाना कोतवाली में अपराध क्र. 1085/2020 धारा 420, 467, 468, 471 भा.दं.सं. दर्ज है।
- न्यायालय का आदेश: माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोरबा ने दिनांक 10/11/2025 को खात्मा अस्वीकार करते हुए खसरा नंबर 663/3 एवं 663/1 के संबंध में 07 बिंदुओं पर जांच का स्पष्ट आदेश दिया था।
- IO द्वारा फर्जीवाड़ा: प्रकरण के विवेचना अधिकारी उप निरीक्षक महा सिंह धुर्वे ने न्यायालय के आदेश के विपरीत काल्पनिक खसरा नंबर 363/03 की जांच कर खात्मा क्र. 2-A/2026 दिनांक 20/02/2026 न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया।
- कलेक्टर का प्रतिवेदन: कार्यालय कलेक्टर कोरबा ने दिनांक 15/03/2021 के प्रतिवेदन के बिंदु क्रमांक 7 में स्पष्ट उल्लेख किया है कि “363/3 जैसा कोई खसरा अस्तित्व में ही नहीं है”।
- *न्यायालय द्वारा खात्मा खारिज: माननीय न्यायालय ने *दिनांक 20/02/2026* को उक्त खात्मा को अस्वीकार कर दिया।
हाईकोर्ट में झूठा शपथ-पत्र:
पीड़ित द्वारा हाईकोर्ट बिलासपुर में WPCR 48/2026 दायर करने पर पुलिस अधीक्षक कोरबा द्वारा प्रस्तुत शपथ-पत्र के साथ वही फर्जी खात्मा ANNEXURE A/3 के रूप में संलग्न किया गया।
👉🏻कानूनी प्रावधान:
सर्वोच्च न्यायालय ने Lalita Kumari vs Govt of UP (2014) 2 SCC 1 में संज्ञेय अपराध पर FIR को अनिवार्य बताया है। State of Haryana vs Bhajan Lal, 1992 Supp (1) SCC 335 के अनुसार पुलिस न्यायालय के निर्देशों से बंधी है। D.K. Basu vs State of WB (1997) 1 SCC 416 के तहत पुलिस की लापरवाही से होने वाली क्षति के लिए राज्य उत्तरदायी है।
👉🏻पीड़ित की मांग:
अंकित सिंह ने दिनांक 14/05/2026 को पुलिस अधीक्षक कोरबा को आवेदन देकर मांग की है कि: - जांच अधिकारी उप निरीक्षक महा सिंह धुर्वे के विरुद्ध BNS 2023 की धारा 198, 199, 229 एवं PC Act की धारा 7 में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाए।
- उक्त अधिकारी को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच संस्थित की जाए।
- प्रकरण की निष्पक्ष विवेचना हेतु जांच अन्य जिले के राजपत्रित अधिकारी अथवा EOW से कराई जाए।
👉🏻BNSS 173(3) के तहत समयसीमा: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 173(3) के अनुसार संज्ञेय अपराध की सूचना पर 3 दिवस में FIR दर्ज करना बाध्यकारी है। 17/05/2026 तक कार्रवाई न होने पर पीड़ित 18/05/2026 को माननीय न्यायालय में धारा 175(3) BNSS के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत करेगा।
👉🏻सुरक्षा संबंधी चेतावनी: आवेदन में उल्लेख है कि इस शिकायत के पश्चात आवेदक या उसके परिवार को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचती है तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी।
👉🏻प्रतिलिपि: यह शिकायत पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज, पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोरबा एवं रजिस्ट्रार जनरल, उच्च न्यायालय बिलासपुर को भी प्रेषित की गई है।
👉🏻दस्तावेज उपलब्ध: आवेदक के पास माननीय JMFC का आदेश दिनांक 10/11/2025, कलेक्टर कार्यालय का पत्र दिनांक 15/03/2021, खात्मा क्र. 2-A/2026 एवं WPCR 48/2026 में प्रस्तुत शपथ-पत्र की स्वप्रमाणित प्रतियां उपलब्ध हैं।






