👉🏻 घटना की चर्चा शहर से कोयलांचल तक,आखिर क्यों दिया अंजाम
👉🏻 कोयला,कबाड़,डीजल से तो नहीं जुड़े तार….? चर्चा तेज,क्या होंगे बेनकाब,अब तक नहीं लिया घायल का बयान
कोरबा। शनिवार-रविवार की मध्य रात्रि एक एएसआई के पुत्र को कुचलकर हत्या का प्रयास करने और उसके हमलावरों को पकड़ने के लिए पीछा करने वाले युवा पत्रकार का अपहरण कर उसके साथ बलवा की घटना को अंजाम देने, हवाई फायरिंग करने और डकैती के आरोपियों की गिरफ्तारी में अभी तक पुलिस के हाथ खाली है। इस घटना में गंभीर युवक जिंदगी और मौत से जूझ रहा है,उसके ईलाज के लिए खर्च राशि की व्यवस्था हेतु पिता लोगों से मदद मांग रहे हैं। उसे इस हालत में पहुंचाने वाले गिरफ्त से दूर हैं। इधर, परिजन को आश्चर्य इस बात का भी है कि बांकीमोगरा पुलिस ने आज तक घायल अरविंद राठौर का बयान कलमबद्ध नहीं किया है।
इस वारदात को हुए 55 घंटे से अधिक समय बीत चुका है। इस बीच खबर है कि उस वेन्यू कार को पुलिस ने बरामद कर लिया है जिसमें युवा पत्रकार का अपहरण कर उसके साथ मारपीट की गई थी। पुलिस कर्मी नाम रामनारायण रात्रे के पुत्र चंद्रमणि को कुचलने में उपयोग ली गई बोलेरो का कुछ पता नहीं चल सका है और ना ही उसके सवारों की कोई जानकारी मिल सकी है। इस बीच पुष्ट सूत्रों के हवाले से खबर है कि मानिकपुर पुलिस चौकी प्रभारी परमेश्वर राठौर और बांकीमोगरा थाना स्टाफ के द्वारा आपसी समन्वय स्थापित कर आरोपियों की धरपकड़ की कोशिश लगातार की जा रही है। दोनों घटना के तार कोयलांचल से जुड़े हैं।
कुछ संदेहियों का सुराग हाथ लग चुका है। बांकीमोगरा थाना में इन्हें तलब कर पूछताछ करने की जानकारी सामने आ रही है। वैसे, इस घटना की रात और घटना के बाद बांकीमोगरा पुलिस की कार्रवाई की चाल बेहद सुस्त नजर आई है। एक युवा नेता के बताए अनुसार घटना दिनांक की रात जब उसने मौजूद स्टाफ से गस्त तेज करने का सुझाव दिया तो उसे बताया गया कि पेट्रोलिंग गाड़ी में पेट्रोल नहीं है तो भला गस्त कैसे करें! दूसरी तरफ पिछले दिनों ही डीजल चोरों से नजदीकी उजागर होने पर पुलिस अधीक्षक ने थाना के एक आरक्षक को सस्पेंड भी किया। ऐसे में इस घटनाक्रम की जांच की दिशा और दशा दोनों बेहद गंभीर प्रवृत्ति के होने लगे हैं।
दूसरी तरफ इस पूरे मामले को लेकर एक चर्चा शहर से लेकर कोयलांचल तक काफी तेज है कि इन दोनों घटनाओं को अंजाम देने में किसी गिरोह अथवा उससे जुड़े लोगों का हाथ हो सकता है। एएसआई रामनारायण रात्रे जिला पुलिस बल में हैं और निष्ठा के साथ अपने कार्य को अंजाम देते आ रहे हैं। साथ ही युवा पत्रकार अरविंद राठौर के द्वारा समाचारों का प्रकाशन किया जाता है। अपने साथी के साथ वारदात को अंजाम देने वालों को पकड़ने के लिए कोशिश की गई थी। ऐसा भी माना जा रहा है कि कहीं हमलावरों का वास्ता डीजल, कबाड़ और कोयला की चोरी/अवैध कारोबार से जुड़े लोगों से तो नहीं..? क्योंकि जिस तरह से कोरबा शहर से पीछा करते हुए बलगी तक ले जाया गया और बीच रास्ते में फोन करके 25 से 30 लोगों को इकट्ठा कर लिया गया और फिर एक सोची-समझी योजना के साथ हमला किया गया। तो क्या, इस पूरे मामले में ऐसे भी किसी गिरोह अथवा इस तरह के कारोबार में संलिप्त लोगों के हाथ हो सकते हैं। क्या यह सारा घटनाक्रम सोची-समझी योजना थी, या किसी बात/रंजिश को लेकर सबक सिखाने की साजिश? फिलहाल, हर कोई इस घटना की हकीकत जानने के लिए आतुर है कि आखिर पुलिसकर्मी के बेटे को कुचलकर उसकी हत्या का प्रयास क्यों किया गया? हमलावर युवा पत्रकार को जानबूझकर पीछा कराते हुए बलगी तक क्यों ले गए? इन लोगों के पास पिस्टल कहां से आई, पिस्टल किसकी है, आदि-आदि कई तरह के सवाल तैर रहे हैं, लेकिन इन सबमें अहम यह है कि आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। जबकि चोटिल लोगों के द्वारा उनका हुलिया, गाड़ी का नंबर पुलिस के सामने उजागर किया जा चुका है। पुलिस अधिकारी पूरी गोपनीयता बरत रहे हैं, इसलिए अब पुलिस जो खुलासा करेगी, उस पर निगाहें टिकी हैं।






