👉🏻 सत्यसंवाद ने पहले ही उजागर किया था मामला, जाँच और कार्रवाई आज तक रहस्य
👉🏻 डिप्टी रेंजर के खिलाफ भी जाँच अटक-झटक कर चल रही,कार्रवाई डीएफओ भरोसे
कोरबा। कोरबा जिले के कटघोरा वन मंडल में जंगली सूअर का मामला गूंज रहा है। उस समय सत्यसंवाद ने जो उजागर किया था, उसकी पुष्टि अब जा कर डिप्टी रेंजर ने कर दी है। पसान रेंज के लैंगा में अधीनस्थ कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहे अवैध कटाई कार्यों का खुलासा के दौरान यह उजागर हो ही गया। 2 साल पहले दबाया गया सच खुद सामने आया। यह प्रशासनिक तौर पर दुर्भाग्यजनक है कि आज तक जांच और कार्रवाई का कुछ पता नहीं है। अब,फिर जांच दोहराई जा रही है।
दरअसल, पसान रेंज के अंतर्गत ग्राम चंद्रौटी में पिछले दिनों जंगल से सरई व अन्य ईमारती पेड़ की कटाई का मामला सामने आया था। पण्डो जनजाति बाहुल्य लैंगा गांव और उसके आसपास लगे इलाके से ईमारती महत्व के वृक्षों की अवैध कटाई का मामला पूर्व में भी उजागर हो चुका है। इतवार पण्डो व अन्य ग्रामीणों के द्वारा इस मामले में डीएफओ से लेकर कलेक्टर तक शिकायत की गई। पसान रेंजर मनीष सिंह ने इस मामले में जांच होने की बात कही लेकिन यह जांच आज तक पूरी नहीं हो पाई है। इसमें संलिप्त डिप्टी रेंजर उषा सोनवानी पर भी कार्रवाई नहीं हो सकी है। जिन पर वृक्षों की अवैध कटाई कराने का आरोप लगा है,लकड़ी तस्करों के द्वारा किसानों की आड़ लेकर, उनके नाम का सहारा लेकर अवैध कटाई करने के साथ खरीदी-बिक्री का खेल खेला जा रहा है। पूर्व में ग्राम लैंगा में यह मामला सामने आया था जिसमें जांच पड़ताल आज तक हो ही रही है।
👉🏻 डिप्टी रेंजर ने स्वीकारा, लेन-देन हुआ था
इधर,चंद्रौटी के जंगल से अवैध के मामले में जब बात सामने आई तो इसमें बीच का रास्ता निकालने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों साथ कुछ ग्रामीणों की मौजूदगी में एक बैठक आंगन में हुई। इसमें डिप्टी रेंजर उषा सोनवानी भी उपस्थित रही और बातों ही बातों में उन्होंने जो बात निकाल दी, उसने 2 साल पहले कर्री के जंगल मे जंगली सूअर का शिकार के मामले को ताजा कर दिया। अवैध लकड़ी के मामले में कार्रवाई हो या ना हो लेकिन जंगली सूअर का शिकार और इसमें संलिप्त ग्रामीणों से करीब डेढ़ से 2 लाख की वसूली बीट गार्ड (फारेस्ट गार्ड) के द्वारा कर लिए जाने के मामले ने फिर से उछाल मारा है। डिप्टी रेंजर कह रही हैं कि बड़े-बड़े मामले आपस में निपट जाते हैं। उनकी मानें तो ऐसे कई बड़े-बड़े मामले निपटा दिए गए होंगे।
👉🏻 करीब 3 दर्जन ग्रामीणों से 4500-4500 की वसूली
बताते चलें कि मई 2024 में किए अवैध शिकार और इसके एवज में किए गए लेन-देन का खुलासा जुलाई 2024 में हुआ। सत्यसंवाद ने सूत्र के हवाले से उजागर किया था कि- एक जंगली सूअर को मारने के बाद उसके मांस का बंटवारा करते वक्त अपने खबरी की सूचना पर बीट गार्ड वहां पहुंचा था। यहां करीब 3 दर्जन लोगों ने आपस में माँस बांट लिया था। बीटगार्ड ने अपने अधिकारियों को सूचित करने और कार्रवाई करने की बजाय शामिल ग्रामीणों से करीब 4500-4500 रुपये लेकर सबको बख्श दिया। बाद में ग्रामीणों की शिकायत पर मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर के निर्देश उपरांत कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत के द्वारा इसकी जांच का जिम्मा पाली एसडीओ श्री टिकरिहा को सौंपा गया था।
👉🏻 एसडीओ की जांच अब तक रहस्य
पाली एसडीओ चंद्रकांत टिकरिहा ने जांच में क्या पाया, मरे हुए सूअर के नाम पर किन-किन लोगों ने पैसा खाया, किसकी भूमिका कहां तक तय हुई, किस पर कार्रवाई की अनुशंसा गई, यह आज तक रहस्य के गर्भ में ही छिपा हुआ है। हो ना हो यही हाल इस बार की जांच में भी हो जाए..! देखने वाली बात होगी कि जंगली सूअर को इंसाफ कब तक मिल पाएगा, उसका खून आखिर कब रंग लाएगा….?






