👉🏻निर्माण कराने वाली संस्था खुद जर्जर भवन में बदहाल, बारिश में भीग रहीं फाईलें
कोरबा-कटघोरा। ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों रुपये की लागत से सड़क, पुलिया, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी और अन्य विकास कार्यों का निर्माण कराने वाली ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) की कटघोरा स्थित कार्यालय व्यवस्था खुद बदहाली का शिकार है। जिस विभाग के जिम्मे पंचायतों के विकास और निर्माण कार्यों की निगरानी है, उसी विभाग का कार्यालय वर्षों से जर्जर और पुराने खपरैल वाले भवन में संचालित होने की स्थिति सामने आई है। बारिश होते ही कार्यालय की छत से पानी टपकने लगता है और कर्मचारियों को जरूरी दस्तावेज एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है।
👉🏻बारिश में छत से टपकता है पानी, फाइलों पर मंडराता खतरा
कटघोरा RES कार्यालय के जर्जर भवन की हालत ऐसी बताई जा रही है कि तेज बारिश के दौरान छत से पानी अंदर आने लगता है। कार्यालय में रखी निर्माण कार्यों से संबंधित फाइलों, टेंडर दस्तावेजों, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों के खराब होने का खतरा बना रहता है। कर्मचारियों के अनुसार कई बार दस्तावेजों और कंप्यूटर उपकरणों को प्लास्टिक से ढककर सुरक्षित रखना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि किसी महत्वपूर्ण शासकीय रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
👉🏻कंप्यूटर और बिजली व्यवस्था पर भी खतरा
जर्जर छत और भवन की स्थिति के साथ कार्यालय में लगे कंप्यूटर, प्रिंटर तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बारिश के दौरान जोखिम में रहते हैं। पानी और बिजली के तारों की मौजूदगी के कारण शॉर्ट सर्किट जैसी दुर्घटना की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। कर्मचारियों की परेशानी यह है कि जिस विभाग से ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों-करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की निगरानी की जाती है, उसके अपने कर्मचारियों को ही सुरक्षित एवं व्यवस्थित कार्यालय उपलब्ध नहीं है।
👉🏻करोड़ों के निर्माण कराने वाला विभाग, खुद पक्के दफ्तर के लिए मोहताज

RES के माध्यम से पंचायतों में 50 लाख से लेकर करोड़ों रुपये तक की लागत के विभिन्न निर्माण कार्य कराए जाते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि विकास कार्यों की निगरानी करने वाली सरकारी निर्माण एजेंसी का अपना कार्यालय ही वर्षों से स्थायी भवन के अभाव में जर्जर किराए के भवन में संचालित होने की बात सामने आ रही है।
कर्मचारियों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि जब विभाग लगातार बड़े-बड़े निर्माण कार्यों के प्रस्ताव और टेंडर तैयार करता है, तो कटघोरा में स्वयं के कार्यालय भवन की समस्या का स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं किया गया?
👉🏻बारिश के बाद और बिगड़े हालात
बताया जा रहा है कि हाल की भारी बारिश के बाद भवन की स्थिति और खराब हुई है। भवन की दीवार में दरार आने तथा छत के हिस्से को नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आई है। ऐसे में कार्यालय में बैठकर काम करना कर्मचारियों के लिए परेशानी के साथ सुरक्षा का विषय भी बन गया है।
यदि भवन वास्तव में उपयोग के लिए असुरक्षित हो चुका है तो तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है।
👉🏻निर्माण कार्यों की फाइलें भी प्रभावित होने की आशंका
RES कार्यालय से पंचायतों के निर्माण कार्यों से जुड़े टेंडर, माप पुस्तिका, भुगतान, कार्यादेश और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का काम होता है। यदि कार्यालय में लगातार पानी रिसता रहा तो दस्तावेजों के खराब होने की आशंका बनी रहेगी। इसका सीधा असर निर्माण कार्यों के भुगतान और प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। इसलिए कार्यालय भवन की समस्या को केवल कर्मचारियों की सुविधा का मामला मानने के बजाय महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा से जोड़कर देखना जरूरी है।
👉🏻पंचायतों के सरपंच भी उठा रहे सवाल
स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि गांवों में स्कूल, आंगनबाड़ी, सड़क और अन्य विकास कार्य कराने वाली संस्था का अपना कार्यालय ही बारिश में सुरक्षित नहीं है। यदि विभाग के महत्वपूर्ण दस्तावेज और तकनीकी रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रहेंगे तो विकास कार्यों की निगरानी और भुगतान संबंधी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
एक पंचायत प्रतिनिधि ने सवाल उठाते हुए कहा कि “गांव में पक्के भवन बनवाने वाली संस्था खुद बारिश में भीग रही है, इससे बड़ी विडंबना क्या होगी?”
🫵🏻कई बार प्रस्ताव भेजने का दावा
RES के अधिकारियों के अनुसार कार्यालय के लिए नए भवन की आवश्यकता को लेकर शासन स्तर पर कई बार पत्राचार किया जा चुका है। हालिया बारिश और भवन की खराब स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था तथा नए भवन के लिए पुनः प्रस्ताव भेजे जाने की बात भी कही गई है। हालांकि, अब देखने वाली बात यह होगी कि वर्षों से लंबित इस समस्या पर प्रशासन कब तक ठोस निर्णय लेता है।
👉🏻अब सवाल सिर्फ भवन का नहीं, सरकारी व्यवस्था का है
कटघोरा RES कार्यालय की जर्जर स्थिति ने सरकारी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब विभाग पंचायतों के लिए करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों की तकनीकी निगरानी करता है, तो उसे स्वयं सुरक्षित, व्यवस्थित और पर्याप्त कार्यालय सुविधा क्यों नहीं मिल सकी?
क्या बारिश के दौरान किसी महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज के खराब होने या किसी कर्मचारी के साथ दुर्घटना होने का इंतजार किया जाएगा? क्या अस्थायी रूप से किसी सुरक्षित शासकीय भवन में कार्यालय को शिफ्ट किया जाएगा? और सबसे बड़ा सवाल—करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य कराने वाली सरकारी एजेंसी के लिए कटघोरा में स्थायी कार्यालय ❓भवन कब बनेगा?
अब गेंद प्रशासन के पाले में है। यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो यह मामला केवल जर्जर भवन का नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड, कर्मचारियों की सुरक्षा और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था का गंभीर प्रश्न बन सकता है।





