👉🏻 एसडीएम की निगरानी में गहन जाँच-पड़ताल जारी,CM हेल्पलाइन में भी हुई शिकायत
कोरबा। जिले के पाली राजस्व अनुविभाग अंतर्गत नगर के शिव मंदिर के समीप और नेशनल हाईवे से लगी बेशकीमती जमीन को रबड़ की तरह खींच-तान कर वास्तविक से कहीं ज्यादा भूमि बताते हुए प्लाटिंग में बिक्री कर देने के मामले में जाँच जोर पकड़ लिया है। स्थानीय सूत्रों के हवाले से सत्यसंवाद के द्वारा यह मामला प्रमुखता से सामने लाए जाने के बाद पाली एसडीएम रोहित कुमार सिंह के द्वारा गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच-पड़ताल शुरू कर दी गई है। जमीन के अस्तित्व से लेकर वर्तमान तक की फाईल खंगाली जा रही है। कागजों की परतें उघाड़ी जा रही हैं और जैसे-जैसे यह परत उघड़ रही है, चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। जांच सही दिशा में जा रही है और जल्द ही इस प्रमाणित राजस्व अपराध के लिए जिम्मेदार व संबंधित लोगों पर शिकंजा भी कसा जा सकेगा, ऐसी प्रबल संभावना है।
निःसन्देह त्वरित लाभ व सुनियोजित सांठगांठ के कारण राजस्व रिकॉर्ड में यह खेल हुआ है। खसरा नंबर 278/3 से संबंधित पुराने मिसल रिकॉर्ड में जहां भूमि का रकबा 38 डिसमिल दर्ज है, वहीं वर्तमान ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में इससे जुड़े उपखसरों का कुल रकबा 0.2120 हेक्टेयर यानी 52.40 डिसमिल दर्ज दिखाई दे रहा है। पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान ऑनलाइन रिकॉर्ड के बीच 14.40 डिसमिल का अंतर सामने आ रहा है। इतना ही नहीं सूत्र तो बताते हैं कि इस जमीन में करीब 10 डिसमिल का और खेला हुआ है जिसमें किसान के द्वारा रास्ता के नाम पर जमीन छोड़ने का जिक्र किया गया है। ऐसे में करीब 25 डिसमिल भूमि वास्तविक दर्ज आंकड़े से कहीं ज्यादा कथित तौर पर परिलक्षित हो रही है। हालांकि भू स्वामी ने किस आधार पर और किस तरह इस जमीन को रबड़ की तरह खींच-तान कर टुकड़ों-टुकड़ों में 14 लोगों को बेचा है, इसका अंतिम निष्कर्ष तो पूरी जांच संपन्न होने के बाद ही उजागर हो पाएगा। पर, इतना तो तय है कि जमीन के इस खेल में अच्छे-अच्छे लोगों पर कानून का शिकंजा कसा जा सकता है। ऐसी संभावनाओं को देखते हुए इनमें खलबली मची हुई है और यह लोग अपने-अपने स्तर पर परिक्रमा भी करने लगे हैं। वैसे, मूल निवासी किसान संघ के अध्यक्ष लाल बहादुर सिंह कोर्राम ने सीएम हेल्प लाइन में इस मामले की शिकायत भी कर दी है।





