👉🏻एक ही दिन निगम रिकॉर्ड में दर्ज हुए दो मृत्यु प्रमाण पत्र
👉🏻तहसील के रिकॉर्ड में नहीं मिले संबंधित प्रकरण
कोरबा। नगर पालिक निगम की जन्म-मृत्यु शाखा में दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाने का आरोप है। दोनों मामलों में निगम के सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी दिनेश अघरिया की शिकायत पर पुलिस ने अलग-अलग अपराध दर्ज किए हैं।
- पहला मामला भोला राम पिता स्व. गिरधारी, निवासी कोसमन्दा, जिला जांजगीर-चांपा से जुड़ा है। निगम के रिकॉर्ड में भोला राम की मृत्यु 12 जून 1997 दर्शाई गई और उनका मृत्यु पंजीयन क्रमांक 487, दिनांक 5 सितंबर 2003 को जारी किया गया। मामले में रामशरण को आरोपी बनाया गया है और अपराध क्रमांक 0915/26 दर्ज किया गया है।
- दूसरा मामला रामरतन पिता स्व. जेठू, निवासी कोसमन्दा, जिला जांजगीर-चांपा का है। रिकॉर्ड में उनकी मृत्यु 2 मई 1997 दर्शाकर मृत्यु पंजीयन क्रमांक 490, दिनांक 5 सितंबर 2003 को जारी किया गया। इस मामले में अनिल कुमार पिता रामशरण के खिलाफ अपराध क्रमांक 0914/26 दर्ज किया गया है।
👉🏻 तहसील रिकॉर्ड में नहीं मिला कथित प्रकरण
मामलों की शिकायत मिलने के बाद नगर निगम ने संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई। दोनों मामलों में तहसीलदार कटघोरा से भी रिपोर्ट मांगी गई। तहसीलदार के 11 सितंबर 2026 के प्रतिवेदनों में बताया गया कि वर्ष 2002-03 की संबंधित राजस्व पंजी में दर्ज प्रकरणों की सीमा के भीतर निगम द्वारा मांगे गए संबंधित प्रकरण क्रमांक एवं दिनांक की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
भोला राम के मामले में तहसीलदार का पत्र क्रमांक 981/तह./वाचक/2026 और रामरतन मामले में 982/तह./वाचक/2026 है।
कथित सरकारी दस्तावेजों के आधार पर जारी हुए प्रमाण पत्र
शिकायत के अनुसार, दोनों मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कार्यपालिका दंडाधिकारी कटघोरा के कथित ज्ञापन, बैंक चालान और आवेदन फार्म सहित अन्य दस्तावेज निगम में प्रस्तुत किए गए थे।
भोला राम के मामले में रा.प्र.क. 1395 बी 121/2003 दिनांक 21 अगस्त 2003 तथा रामरतन के मामले में रा.प्र.क. 1396 बी 121/2003 दिनांक 25 अगस्त 2003 का उल्लेख किया गया है।
जांच में सामने आए वंशवृक्ष के आधार पर दोनों मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों के पारिवारिक संबंध भी सामने आए हैं। निगम की शिकायत में आरोप है कि कूटरचना और फर्जी दस्तावेजों के जरिए जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर सरकारी मृत्यु पंजीयन रिकॉर्ड में प्रविष्टि कराई गई।
✍🏻 एक ही रिकॉर्ड में दो फर्जी मौतें?
दोनों मामलों में एक महत्वपूर्ण समानता यह भी है कि दोनों मृत्यु प्रमाण पत्र 5 सितंबर 2003 को जारी किए गए थे। एक में भोला राम की कथित मृत्यु 12 जून 1997 और दूसरे में रामरतन की कथित मृत्यु 2 मई 1997 दर्शाई गई। पुलिस ने दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 229(2), 318(4), 337 और 339 के तहत अपराध दर्ज किया है।
👉🏻 जांच और सवाल के बिन्दु
अब जांच का मुख्य केंद्र यह होगा कि कथित दस्तावेज कहां तैयार हुए, निगम तक कैसे पहुंचे, राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित प्रकरण क्यों नहीं मिला और जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल आगे किसी संपत्ति, उत्तराधिकार, राजस्व या अन्य कानूनी प्रक्रिया में किया गया या नहीं। दो अलग-अलग व्यक्तियों को मृत दर्शाए जाने वाले इन मामलों ने नगर निगम के पुराने मृत्यु पंजीयन रिकॉर्ड की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।






