👉🏻 शिवाय हॉस्पिटल ने भी बहती गंगा में हाथ धोया,तोड़ दी साडा की चारदीवारी..!
कोरबा। कोरबा में यूं तो उजागर होने वाले शासकीय जमीनों के कब्जा के मामलों में कभी-कभार कुछ बड़ी कार्रवाई हो जाती है लेकिन सालों- साल से जो आंखों देखा अतिक्रमण अधिकारियों की जानकारी में किया जा रहा है उस पर कोई गाज नहीं गिरना सवालों को जन्म देता है। टीपी नगर स्थित नया बस स्टैंड ऐसे ही अतिक्रमण का शिकार हो रहा है।

90 के दशक में उद्घाटित और परिवहन सेवाओं के लिए समर्पित नया बस स्टैंड (अंतरराज्यीय) बदहाली के आंसू रो रहा है। तत्कालीन विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) के कार्यकाल में इस बस स्टैंड का उद्घाटन हुआ। इस दौर में बस स्टैंड क्षेत्र को सुरक्षित करने और उसकी सीमाएं तय करने के लिए लंबी पक्की बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया गया। बस स्टैंड के प्रवेश द्वार से लेकर उसकी अंतिम सीमा तक एक तरफ बंगाली चाल की ओर तो दूसरी तरफ लालूराम कॉलोनी से लगे इलाके की तरफ से यह चारदीवारी खींची गई। कालांतर में सब कुछ ठीक-ठाक था और बस स्टैंड में सुगम तरीके से बसों का आवागमन, ठहराव सुनिश्चित हुआ करता था। बाद में रसूखदारों की ऐसी दखलअंदाजी शुरू हुई कि उनके सामने सभी अधिकारी नतमस्तक होते चले गए।
उन्होंने सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज इस चारदिवारी को तोड़ने वालों को खुली छूट दे दी जिस कारण इस दीवार के इस पार और उस पार बेतहाशा निर्माण वर्तमान में नजर आ रहा है। आलम यह है कि अभी हाल फिलहाल कैबिनेट मंत्री के हाथों उद्घाटित और चर्चित शिवाय हॉस्पिटल ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिया। इस अस्पताल का एक दरवाजा लालूराम कॉलोनी की तरफ खुलता है तो उसने मुख्य प्रवेश द्वार को नया बस स्टैंड की तरफ निकाला है। अचरज की बात यह है कि अस्पताल ने भी नियम कायदा को ताक पर रखकर नगर निगम की सरकारी चारदीवारी को तोड़ते हुए विशाल का रास्ता तैयार किया है। सवाल यह है कि बाउंड्रीवॉल तोड़कर रास्ता बनाने की अनुमति किसने दी?
👉🏻 कई बार पत्र लिख चुका,किसी अधिकारी में दम नहीं,नेता संरक्षण दे रहे

नया बस स्टैंड में बढ़ती बदहाली और सिमटते दायरे को लेकर बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि उनके द्वारा कई बार पत्र जिला प्रशासन से लेकर शासन को लिखा जा चुका है लेकिन किसी भी बड़े-छोटे अधिकारी में इतना दम नहीं है कि वह ऐसे लोगों पर कार्रवाई कर सके। नया बस स्टैंड में पानी की समस्या है, लोगों ने बेजा निर्माण करने के साथ-साथ अपने वाहनों को भी खड़ा करना शुरू कर दिया है। यह यात्री वाहनों का स्टैंड है लेकिन दूसरे लोग भी इसका उपयोग कर रहे हैं, ऐसे में बसों का ठहराव और यात्रियों को काफी दिक्कतें होती हैं। जब यह पूरा एरिया नया बस स्टैंड के लिए चिन्हित किया गया है तो यहां दूसरे कार्य क्यों और किसके इशारे पर हो रहे हैं? बृजेश त्रिपाठी ने साफ शब्दों में कहा कि अधिकारियों में जहां दम नहीं, वहीं नेता लोग भी अधिकारियों को दबाव में रखकर बेजा कब्जा करने वालों को संरक्षण दे रहे हैं। कोई कानून नाम की चीज नहीं। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज सरकारी दीवार को तोड़कर कब्जा कर लिया जा रहा है। बस स्टैंड में व्यापक अतिक्रमण हो रहा है लेकिन बताने के बाद भी किसी को कोई चिंता ही नहीं। उन्होंने इस बात की अपेक्षा जताई है कि विगत तीन माह पूर्व दिए गए पत्र और कराए गए सीमांकन के आधार पर अधिकारियों को सख्त कदम उठाना चाहिए। जिन लोगों ने भी अतिक्रमण किया है, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। बस स्टैंड क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करना चाहिए।






